JPMorgan ने IIFL Finance, Muthoot Finance और Manappuram Finance पर अपनी कवरेज शुरू करते हुए 'ओवरवेट' रेटिंग दी है, जिसके बाद इन कंपनियों के शेयरों में जोरदार उछाल आया है। ब्रोकरेज का मानना है कि अगले 5 सालों में गोल्ड लोन भारत के क्रेडिट मार्केट में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करेंगे।
गोल्ड लोन सेक्टर में नई उम्मीद
भारतीय गोल्ड फाइनेंसिंग कंपनियों के शेयरों में शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। इसकी वजह ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म JPMorgan की ओर से इन कंपनियों पर एक बुलिश रिपोर्ट का आना है। JPMorgan ने IIFL Finance, Muthoot Finance और Manappuram Finance, तीनों को 'ओवरवेट' रेटिंग के साथ कवर करना शुरू किया है। इस खबर के आते ही निवेशकों ने जमकर खरीदारी की। IIFL Finance के शेयर इंट्राडे में करीब 8% चढ़े, जबकि Muthoot Finance और Manappuram Finance में भी लगभग 2% की बढ़त दर्ज की गई।
सोने को 'लिक्विड एसेट' मानने का दौर
JPMorgan के इस आशावादी नजरिए के पीछे यह मानना है कि भारत में सोने को लेकर लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आ रहा है। अब सोना सिर्फ परिवार के मूल्यवान स्टोर से बढ़कर एक लिक्विड फाइनेंशियल एसेट के रूप में देखा जा रहा है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि अगले 5 सालों में गोल्ड लोन, भारत के कुल क्रेडिट मार्केट का 10% हिस्सा हो सकता है, जो कि फाइनेंशियल ईयर 2026 में 5% था। यह अनुमान इस बात पर आधारित है कि त्वरित, सोने के बदले मिलने वाली लिक्विडिटी की मांग मजबूत बनी रहेगी।
ब्रोकरेज ने दिए टारगेट प्राइस
JPMorgan ने इन तीनों लेंडर्स के लिए अलग-अलग टारगेट प्राइस भी तय किए हैं:
- IIFL Finance: ब्रोकरेज ने ₹750 का टारगेट दिया है। उनका मानना है कि कंपनी के टर्नअराउंड की शुरुआत हो चुकी है, जिससे प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार की उम्मीद है।
- Muthoot Finance: इसके लिए ₹3,400 का टारगेट सेट किया गया है। ब्रोकरेज का कहना है कि इस साल अब तक शेयर में 22% की गिरावट ने इसे निवेशकों के लिए एक आकर्षक एंट्री पॉइंट बनाया है।
- Manappuram Finance: कंपनी के लिए ₹395 का टारगेट दिया गया है। इसे भी एक टर्नअराउंड स्टोरी के तौर पर देखा जा रहा है, और हाल के नतीजों से ऑपरेशनल सुधार के संकेत मिल रहे हैं।
जोखिमों पर भी रहेगी नजर
हालांकि, बाजार इन अनुमानों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहा है, लेकिन निवेशकों को गोल्ड लोन बिजनेस से जुड़े जोखिमों पर भी गौर करना होगा। इस सेक्टर के लिए सबसे बड़ी चिंता रेगुलेटरी यानी नियामक निगरानी है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के कड़े नियम, खासकर लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेशियो, कंपनियों को सोने के वजन के आधार पर कितना लोन दे सकती हैं, इसकी सीमा तय करते हैं। इन नियमों में कोई भी सख्ती इन कंपनियों की लोन ग्रोथ को तुरंत प्रभावित कर सकती है।
इसके अलावा, यह सेक्टर सोने की कीमतों के प्रति भी काफी संवेदनशील है। सोने के बढ़ते दाम से लोन का अमाउंट बढ़ सकता है, लेकिन कीमतों में तेज गिरावट से कोलैटरल वैल्यू कम हो जाएगी। इससे कर्जदारों को ज्यादा सिक्योरिटी देनी पड़ सकती है या क्रेडिट रिस्क बढ़ सकता है। वहीं, पारंपरिक बैंक भी गोल्ड लोन पोर्टफोलियो बढ़ा रहे हैं, जो अक्सर NBFCs की तुलना में कम ब्याज दरें ऑफर करते हैं। इस बढ़ती प्रतिस्पर्धा से गोल्ड फाइनेंसर्स के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।
आगे चलकर, बाजार पार्टिसिपेंट्स इन कंपनियों के मार्जिन परफॉर्मेंस पर नजर रखेंगे कि क्या वे बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रख पाते हैं। इसके साथ ही, रेगुलेटरी अपडेट्स और सोने की कीमतों में स्थिरता भी अहम कारक होंगे जो आने वाले महीनों में निवेशक की भावना को प्रभावित कर सकते हैं।
