JPMorgan India का 30% ग्रोथ का भरोसा: वजहें क्या हैं?
JPMorgan India के मैनेजिंग डायरेक्टर और ग्लोबल कॉर्पोरेट बैंकिंग के हेड, Pranav Chawda का कहना है कि भारत की बड़ी कंपनियों के साथ मजबूत रिश्ते और उनकी बदलती कॉरपोरेट स्ट्रैटेजी (Corporate Strategy) ही इस 30% ग्रोथ की मुख्य वजहें हैं। उनका मानना है कि कंपनियां अब रेसिलिएंस (Resilience) और टेक्नोलॉजिकल एडवांस्ड (Technological Advancement) पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं, जिससे नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) का बदलता मिजाज
Pranav Chawda के मुताबिक, कंपनियां पारंपरिक कैपेसिटी एक्सपेंशन (Capacity Expansion) या नए प्लांट लगाने की बजाय अब सप्लाई चेन (Supply Chain) को मजबूत करने, टेक्नोलॉजी अपग्रेड (Technology Upgrade) करने और रेसिलिएंस (Resilience) बढ़ाने पर फोकस कर रही हैं। यह ट्रेंड 2010-2014 के पुराने कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) साइकल से काफी अलग है और JP Morgan इसे भुनाने के लिए तैयार है।
रुपया-आधारित कर्ज की बढ़ती मांग
डॉलर बॉन्ड (Dollar Bonds) और एक्सटर्नल कमर्शियल बोरिंग्स (External Commercial Borrowings - ECBs) की हेजिंग कॉस्ट (Hedging Costs) में बढ़ोतरी के कारण, भारतीय कंपनियों के लिए रुपया-आधारित लोन (Rupee-denominated Borrowing) लेना अब पहले से कहीं ज्यादा फायदेमंद हो गया है। JP Morgan इस जरूरत को पूरा करने के लिए एक 'वन-स्टॉप शॉप' (One-Stop Shop) के रूप में काम कर रहा है, जो गिफ्ट सिटी (GIFT City) से ऑनशोर रुपया डेट (Onshore Rupee Debt) और ऑफशोर डॉलर डेट (Offshore Dollar Debt) दोनों की सुविधा देता है।
इनोवेशन और लंबी अवधि का विजन
बैंक भारत की इनोवेशन इकोनॉमी (Innovation Economy) का भी समर्थन कर रहा है और शुरुआती चरणों से ही वेंचर-बैकड (Venture-backed) कंपनियों को सपोर्ट दे रहा है। Chawda का कहना है कि अगले 5 सालों में रेवेन्यू (Revenue) दोगुना होने की उम्मीद है और बैंक भारत में अगले 50 सालों और उससे भी आगे तक निवेशित रहने के लिए प्रतिबद्ध है। पुणे (Pune) में हाल ही में किया गया विस्तार भी ग्राहकों के करीब रहने की उनकी रणनीति का हिस्सा है।
