बैंकों पर बिकवाली का दबाव, फिर भी वैल्यूएशन आकर्षक
संजय मूकीम, जो JPMorgan के India Equity Research के हेड हैं, मानते हैं कि बड़े बैंक और फाइनेंशियल कंपनियां मीडियम-टर्म के लिए आकर्षक वैल्यूएशन (Valuation) के कारण मौके पेश करती हैं। लेकिन, मार्च 2026 में इन बैंकों पर बिकवाली का काफी दबाव देखा गया, जिसमें PSU और प्राइवेट बैंकों के शेयर 15-20% तक गिरे। यह दिखाता है कि बाजार की अनिश्चितता के दौर में, ये स्टॉक ग्लोबल सेंटीमेंट (Global Sentiment) और कैपिटल आउटफ्लो (Capital Outflow) के प्रति संवेदनशील हैं। Nifty Bank का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) फिलहाल 45.408 पर है, जो एक न्यूट्रल (Neutral) स्थिति को दर्शाता है। भारतीय बैंकों का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो 12.3x है, जो पिछले 3-साल के औसत से कम है। कई पब्लिक सेक्टर बैंकों, जैसे IDBI Bank और Bank of India, 'बहुत आकर्षक' P/E रेश्यो पर ट्रेड कर रहे हैं, जबकि Indian Bank का P/E (10.36-10.58) कुछ साथियों की तुलना में महंगा माना जा रहा है।
ग्लोबल बदलावों के बीच डिफेंस और रिन्यूएबल्स पर फोकस
वहीं, डिफेंस सेक्टर में ग्रोथ की जबरदस्त संभावना दिख रही है। ग्लोबल भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और भारत के 'मेक इन इंडिया' (Make in India) पहल के चलते इस सेक्टर का मार्केट 2026 में $31.76 बिलियन से बढ़कर 2031 तक $38.73 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। घरेलू खरीद पर 75% का जोर और बढ़ते डिफेंस एक्सपोर्ट (Defence Export) इसके मुख्य ग्रोथ फैक्टर हैं। इसी तरह, रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में भी भारी निवेश की उम्मीद है। भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट (GW) रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता हासिल करना है, जिसके लिए अगले 5 सालों में $350 बिलियन के निवेश का अनुमान है। अच्छी बात यह है कि भारत पहले ही नॉन-फॉसिल फ्यूल (Non-Fossil Fuel) क्षमता में 50% का आंकड़ा पार कर चुका है, जो लक्ष्य से काफी आगे है। हालांकि, इस ग्रोथ को बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर कैपिटल मोबिलाइजेशन (Capital Mobilisation) और इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure), फाइनेंसिंग (Financing) व ग्रिड कनेक्टिविटी (Grid Connectivity) जैसी चुनौतियों से निपटना अहम होगा।
वैल्यूएशन अपील के बावजूद IT सेक्टर में टेक्निकल कमजोरी
दूसरी ओर, IT सेक्टर, जिसे अक्सर एक स्टेबल (Stable) निवेश माना जाता है, फिलहाल टेक्निकल तौर पर कुछ कमजोर संकेत दे रहा है। Nifty IT इंडेक्स का RSI करीब 40.753 है, जो 'सेल' (Sell) का इशारा है, और ओवरऑल टेक्निकल इंडिकेटर्स 'स्ट्रांग सेल' (Strong Sell) की ओर इशारा कर रहे हैं। इसके बावजूद, Nifty IT का P/E रेश्यो 20.64 है, जो पिछले 7-साल के औसत 27.13 से काफी नीचे है। यह लंबे समय के लिए अंडरवैल्यूएशन (Undervaluation) का संकेत हो सकता है। IT कंपनियां फाइनेंशियल ईयर 2026 की पहली तिमाही में ग्लोबल इकोनॉमिक अनिश्चितता (Global Economic Uncertainty) और क्लाइंट्स (Clients) के सतर्क खर्च के कारण धीमी ग्रोथ की उम्मीद कर रही हैं। उन्हें क्लाइंट्स को बनाए रखने के लिए AI और कॉस्ट कंट्रोल (Cost Control) पर ज्यादा ध्यान देना होगा।
स्टेबल सेक्टर और ऑयल एंड गैस पर सावधानी
मार्केट की इस अस्थिरता (Volatility) के बीच, पावर (Power) और हेल्थकेयर (Healthcare) जैसे सेक्टर अपेक्षाकृत स्टेबल माने जा रहे हैं। हेल्थकेयर सेक्टर, खासकर डायग्नोस्टिक्स (Diagnostics) और स्पेशियलिटी (Specialty) सेगमेंट में, प्रीमियम वैल्यूएशन (Premium Valuation) एंजॉय कर रहा है, जिसका मार्केट वैल्यू 2025 तक $638 बिलियन पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, मूकीम ने ऑयल एंड गैस (Oil & Gas) शेयरों पर सावधानी बरतने की सलाह दी है। इसकी वजह क्रूड ऑयल (Crude Oil) की वोलेटाइल (Volatile) कीमतें, करेंसी में उतार-चढ़ाव, पॉलिसी की अनिश्चितता और रेगुलेटरी हर्डल्स (Regulatory Hurdles) हैं।
एग्जीक्यूशन और फाइनेंसिंग की चुनौतियां
सरकार की पॉलिसी और जियोपॉलिटिकल जरूरतें डिफेंस और रिन्यूएबल एनर्जी के लिए पॉजिटिव आउटलुक (Outlook) तो देती हैं, लेकिन इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को पूरा करने और फाइनेंस करने में बड़ी चुनौतियां हैं। 2030 तक 500 GW रिन्यूएबल एनर्जी का लक्ष्य हासिल करने के लिए बड़े पैमाने पर और निरंतर कैपिटल मोबिलाइजेशन की आवश्यकता होगी। फाइनेंसिंग, लैंड एक्विजिशन (Land Acquisition) और ग्रिड इंटीग्रेशन (Grid Integration) में दिक्कतें बनी हुई हैं। डिफेंस सेक्टर में स्वदेशी उत्पादन पर जोर देना रणनीतिक है, लेकिन यह सेमीकंडक्टर्स (Semiconductors) जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी में गैप्स को उजागर कर सकता है। बैंकों के लिए, आकर्षक वैल्यूएशन को उनके मैक्रो इकोनॉमिक शॉक्स (Macroeconomic Shocks) और ग्लोबल लिक्विडिटी (Global Liquidity) के प्रति संवेदनशीलता से संतुलित करना होगा, जैसा कि मार्च 2026 की बिकवाली में दिखा।
भविष्य का अनुमान और बाजार की रिकवरी
गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) का अनुमान है कि भारत की रियल जीडीपी (Real GDP) 2026 में 6.9% की मजबूत ग्रोथ दर्ज करेगी, जबकि महंगाई 3.9% तक बढ़कर RBI के लक्ष्य के करीब रहेगी। RBI ने अपनी की-रेपो रेट (Key Repo Rate) 5.25% पर स्थिर रखी है, जो एक स्टेबल इंटरेस्ट रेट एनवायरनमेंट (Interest Rate Environment) का संकेत है। मार्च की तेज गिरावट के बाद अप्रैल 2026 की शुरुआत में बाजार में कुछ रिकवरी (Recovery) देखने को मिली है, लेकिन यह रिकवरी ग्लोबल जियोपॉलिटिकल टेंशन के समाधान और IT जैसे सेक्टरों में टेक्निकल सिग्नल्स (Technical Signals) से परे अर्निंग्स ग्रोथ (Earnings Growth) दिखाने पर निर्भर करेगी। निवेशक स्पष्ट सरकारी समर्थन और ठोस ग्रोथ ड्राइवर्स (Growth Drivers) वाले सेक्टरों को पसंद करेंगे, जबकि मैक्रो इकोनॉमिक दबावों के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में सावधानी बरतेंगे।