InvestValue मैनेजर का बड़ा दावा: अगले 10 साल तक चलेगा बुल रन, पर बैंकिंग शेयरों से सावधान!

BANKINGFINANCE
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
InvestValue मैनेजर का बड़ा दावा: अगले 10 साल तक चलेगा बुल रन, पर बैंकिंग शेयरों से सावधान!

InvestValue Capital के सिद्धार्थ पुरोहित का मानना है कि हर महीने ₹32,000 करोड़ के SIP इनफ्लो के दम पर भारतीय शेयर बाजार अगले 10 साल तक तेजी दिखाएगा। वह मैन्युफैक्चरिंग और एक्सचेंज जैसे सेक्टरों पर बुलिश हैं, लेकिन बढ़ती एसेट क्वालिटी की चिंताओं और महंगाई के चलते बैंकिंग और इंश्योरेंस सेक्टरों में सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।

10 साल का बुल रन, कैसे?

InvestValue Capital के इक्विटी फंड मैनेजर सिद्धार्थ पुरोहित का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार ग्रोथ के एक दशक में प्रवेश कर चुका है। यह भरोसा रिटेल निवेशकों की मजबूत भागीदारी से आ रहा है, जिसमें हर महीने ₹32,000 करोड़ का सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) इनफ्लो शामिल है। यह लगातार पैसा बाजार को लिक्विडिटी का सपोर्ट दे रहा है।

वैल्यूएशन पर क्या है राय?

हालांकि, पुरोहित निवेशकों को सिर्फ इंडेक्स के स्तरों से आगे देखने की सलाह देते हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, निफ्टी का एक साल का फॉरवर्ड प्राइस-टू-बुक (P/B) रेश्यो 2.96 के नीचे गिरकर 6 साल के निचले स्तर पर आ गया है। यह भले ही वैल्यूएशन ठंडा होने का संकेत दे, लेकिन असल में बाजार 'सस्ता' नहीं है। एनालिस्ट्स का कहना है कि 2023 में निफ्टी की गणना के तरीके में हुए बदलाव (स्टैंडअलोन से कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल्स में) के कारण अब कमाई की क्वालिटी पर ज्यादा ध्यान देना होगा।

सेक्टरों में कहां है मौका और कहां खतरा?

पुरोहित फाइनेंशियल मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे एक्सचेंज, वेल्थ मैनेजमेंट और एसेट मैनेजमेंट कंपनियों पर सकारात्मक हैं। फाइनेंस के अलावा, वह इंडस्ट्रियल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों में भी संभावनाएं देख रहे हैं। पावर, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियां एनर्जी की डिमांड और इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसे लॉन्ग-टर्म थीम से फायदा उठा रही हैं। उन्होंने एल्युमिनियम प्रोड्यूसर्स के लिए भी स्थिर आउटलुक बताया है, जहां ग्लोबल सप्लाई टाइट होने से कुछ कंपनियों को फायदा हो रहा है।

दूसरी तरफ, फंड मैनेजर बैंकिंग और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) सेक्टरों पर सतर्क रुख बनाए हुए हैं। यहां बढ़ते बैड लोन (NPA) और रिटेल बॉरोअर्स पर महंगाई के असर की चिंताएं हैं। इंश्योरेंस इंडस्ट्री भी इन्हीं मैक्रोइकॉनॉमिक दबावों के चलते प्रॉफिटेबिलिटी की चुनौती झेल रही है।

नतीजों और इकोनॉमी का हाल

बाजार की मजबूती पॉजिटिव नतीजों से टिके हुए हैं। फाइनेंशियल ईयर 27 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में कई मिड और स्मॉल-कैप कंपनियों ने डबल-डिजिट ग्रोथ और बेहतर प्रॉफिट मार्जिन दर्ज किए हैं। इससे पता चलता है कि कंपनियां अभी भी कॉम्पिटिटिव माहौल में कीमतें बनाए रखने में सक्षम हैं। इकोनॉमी की बात करें तो, पुरोहित फाइनेंशियल ईयर 27 के लिए 6.7% जीडीपी ग्रोथ का अनुमान लगा रहे हैं। हालांकि, ग्लोबल ऑयल कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी वोलेटिलिटी का खतरा बना हुआ है, लेकिन ग्रोथ की कहानी मजबूत दिख रही है। जैसे-जैसे बाजार सितंबर तिमाही के नतीजों की ओर बढ़ेगा, निवेशकों का फोकस इस बात पर रहेगा कि क्या कंपनियां वैल्यूएशन मेट्रिक्स और महंगाई के दबाव के बीच इस कमाई की गति को बनाए रख पाती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.