इंश्योरेंस सेक्टर में AI का दौर है, लेकिन एक नई रिपोर्ट के मुताबिक **50%** से ज्यादा ग्राहक लाइफ इंश्योरेंस के लिए आज भी इंसानी सलाह को प्राथमिकता देते हैं। जिन कंपनियों ने AI और इंसानी अनुभव का तालमेल बिठाया है, उन्होंने **41%** तक ज्यादा प्रीमियम ग्रोथ दर्ज की है।
बीमा जगत में इस वक्त आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और भरोसे के बीच एक नया संतुलन बन रहा है। जहां AI का इस्तेमाल एडमिनिस्ट्रेटिव कामों को आसान बनाने के लिए किया जा रहा है, वहीं यह स्पष्ट है कि यह सलाहकारों (Advisors) की जगह नहीं ले सकता। डेटा बताता है कि लाइफ इंश्योरेंस जैसे जटिल मामलों में 50% से ज्यादा ग्राहक खरीदारी से पहले किसी इंसान से बात करना पसंद करते हैं।
हाइब्रिड मॉडल ही असली फॉर्मूला
सफलता का मंत्र अब पूरी तरह ऑटोमेशन नहीं, बल्कि हाइब्रिड मॉडल है। जो कंपनियां AI के जरिए अपने सलाहकारों को सपोर्ट कर रही हैं, उन्हें भारी फायदा हो रहा है। ऐसे संस्थानों ने पिछले 3 वर्षों में अपने प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले 41% अधिक प्रीमियम ग्रोथ दर्ज की है। AI यहां सलाहकारों को ग्राहकों की जरूरतों और हिस्ट्री को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर रहा है, जिससे क्लाइंट मीटिंग्स अधिक प्रभावी हो रही हैं।
ऑपरेशंस में AI का असर
अंडरराइटिंग और फ्रॉड डिटेक्शन जैसे क्षेत्रों में भी AI क्रांति ला रहा है। मेडिकल रिपोर्ट्स को प्रोसेस करने और पॉलिसी अप्रूवल में लगने वाले समय को AI ने काफी कम कर दिया है। साथ ही, यह संदिग्ध ट्रांजैक्शंस को पकड़ने में भी मदद कर रहा है। हालांकि, कंपनियों को IRDAI के कड़े नियमों, डेटा प्राइवेसी और टेक्नोलॉजी की भारी लागत जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है।
भारत बना इनोवेशन का हब
भारत अब केवल एक सर्विस हब नहीं रहा, बल्कि इंश्योरेंस इनोवेशन का केंद्र बनता जा रहा है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स डेटा मैनेजमेंट जैसी पुरानी समस्याओं को AI के जरिए सुलझा रहे हैं। निवेशकों के लिए अब चुनौती यह है कि वे उन कंपनियों पर नजर रखें जो टेक्नोलॉजी में निवेश तो कर रही हैं, लेकिन साथ ही अपने मुनाफे के मार्जिन (Profit Margins) को भी बरकरार रखने में कामयाब हैं।
