सुप्रीम कोर्ट के एक बड़े फैसले के बाद इंश्योरेंस कंपनियों के शेयरों में आज यानी 5 अगस्त को जबरदस्त उछाल देखा गया। कोर्ट ने नई कारों के लिए थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस को 4 साल और नई दोपहिया वाहनों के लिए 6 साल तक अनिवार्य कर दिया है।
इंश्योरेंस कंपनियों के शेयरों में क्यों आई तेजी?
नई कारों के लिए थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 4 साल कर दी गई है। वहीं, नई दोपहिया वाहनों के लिए यह अवधि 5 साल से बढ़ाकर 6 साल कर दी गई है। इस फैसले के बाद New India Assurance, Go Digit General Insurance, और ICICI Lombard जैसी प्रमुख जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के शेयरों में 10% तक की तेजी देखी गई।
रोड सेफ्टी और बीमा कवरेज पर असर
सुप्रीम कोर्ट के इस कदम का मकसद भारत में बिना बीमा वाले वाहनों की संख्या को कम करना है, जो वर्तमान में लगभग 56% है। कोर्ट का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजा मिल सके।
निवेशकों के लिए क्या हैं खास बातें?
हालांकि, इंश्योरेंस कंपनियों के लिए प्रीमियम कलेक्शन बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन निवेशकों को कुछ बातों पर नज़र रखनी होगी। नई कारों की ऊंची शुरुआती लागत से वाहन बिक्री प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर बीमा पॉलिसियों की बिक्री पर पड़ सकता है।
इसके अलावा, इंश्योरेंस कंपनियां रेगुलेटेड प्रीमियम पर काम करती हैं। लंबी अवधि का बीमा लेने पर कंपनियां लंबे समय के लिए क्लेम की देनदारियों को संभालने के लिए जिम्मेदार होंगी। अगर दुर्घटनाओं या अन्य कारणों से क्लेम का अनुपात (claims ratio) बढ़ता है, तो यह कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित कर सकता है।
कोर्ट ने 'नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल' (बिना बीमा के ईंधन नहीं) नियम को लागू करने की भी योजना बनाई है, जो पेट्रोल पंपों पर लागू हो सकता है। इस नियम के अमल और इसके असर पर भी निवेशकों की पैनी नजर रहेगी।
