Instant Term Insurance: 'इंस्टेंट क्लेम' के लुभावने वादे के पीछे छिपा बड़ा जोखिम

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AuthorMehul Desai|Published at:
Instant Term Insurance: 'इंस्टेंट क्लेम' के लुभावने वादे के पीछे छिपा बड़ा जोखिम

कई इंश्योरेंस कंपनियां अब परिवारों को तत्काल खर्च के लिए 'इंस्टेंट क्लेम' की सुविधा दे रही हैं। लेकिन सावधान रहें, यह कोई फाइनल सेटलमेंट नहीं, बल्कि एक एडवांस है। अगर बाद में आपका क्लेम रिजेक्ट होता है, तो कंपनी आपसे यह पैसा वापस मांग सकती है।

भारत में कई लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां अब पॉलिसीहोल्डर्स को 24 से 48 घंटे के भीतर क्लेम का एक हिस्सा देने का वादा कर रही हैं। यह सुविधा फ्यूनरल खर्च, हॉस्पिटल बिल या अन्य तत्काल जरूरतों के लिए मार्केटिंग टूल की तरह इस्तेमाल की जा रही है। लेकिन, सबसे बड़ा सच यह है कि यह पैसा 'फाइनल अप्रूवल' नहीं, बल्कि डेथ बेनिफिट के अगेंस्ट एक 'एडवांस' है।

क्लेम रिजेक्ट होने पर क्या होगा?

बीमा कंपनियों के लिए डेथ क्लेम की जांच करना कानूनी रूप से अनिवार्य है, खासकर पॉलिसी शुरू होने के शुरुआती 3 साल के भीतर। यदि कंपनी को जांच में मेडिकल हिस्ट्री छिपाने या पॉलिसी शर्तों के उल्लंघन का पता चलता है, तो क्लेम रिजेक्ट हो सकता है। ऐसे में कंपनी के पास यह अधिकार है कि वह आपको दिए गए 'एडवांस' की वसूली करे। सोचिए, एक दुखद घड़ी में जब परिवार ने वह पैसा खर्च कर दिया हो, तब अचानक पैसे वापसी की मांग परिवार पर कितना बड़ा वित्तीय बोझ डाल सकती है।

विज्ञापन और हकीकत का अंतर

इंश्योरेंस कंपनियां 24-48 घंटे में भुगतान का वादा तो करती हैं, लेकिन इसके लिए जरूरी डॉक्यूमेंट्स (जैसे डेथ सर्टिफिकेट, मेडिकल रिपोर्ट आदि) मिलने के बाद ही समय की घड़ी शुरू होती है। यदि कोई भी विसंगति मिलती है, तो यह प्रक्रिया काफी लंबी खींच सकती है।

जरूरी सलाह

ज्यादातर प्लान्स में इस सुविधा का फायदा लेने के लिए 1 से 3 साल का वेटिंग पीरियड होता है। वित्तीय जानकारों का मानना है कि केवल इंश्योरेंस क्लेम के भरोसे रहने के बजाय, हर परिवार को एक अलग 'इमरजेंसी फंड' बनाना चाहिए, ताकि किसी अनहोनी की स्थिति में उन्हें किसी 'कंडीशनल एडवांस' के जोखिम पर निर्भर न रहना पड़े।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.