मुनाफे में जोरदार उछाल, पर डिविडेंड में बड़ी सेंध
बैंक के नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में 15% का जबरदस्त इजाफा हुआ, जो ₹5,376 करोड़ पर पहुंच गया। इससे बैंक के कोर लेंडिंग बिजनेस (Core Lending Business) की मजबूती का पता चलता है। एसेट क्वालिटी (Asset Quality) में भी सुधार देखा गया, ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) रेशियो घटकर 1.92% हो गया।
बाजार की नकारात्मक प्रतिक्रिया और डिविडेंड की चिंता
इन मजबूत ऑपरेशनल आंकड़ों के बावजूद, शेयर बाजार ने IndusInd Bank के शेयर पर नकारात्मक प्रतिक्रिया दी। शेयर 1.44% गिरकर ₹847.95 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स (Nifty 50 Index) में 1.14% की गिरावट आई। एनालिस्ट्स (Analysts) और निवेशकों की मुख्य चिंता फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए प्रस्तावित डिविडेंड का ₹1.50 प्रति शेयर पर लाया जाना है, जो फाइनेंशियल ईयर 2024 के ₹16.50 के मुकाबले काफी कम है।
वैल्यूएशन और पीयर कम्पेरिजन (Peer Comparison)
बाजार में बैंक की वैल्यूएशन (Valuation) को लेकर मिली-जुली राय है। कुछ रिपोर्टें P/E रेशियो 17.8 (अप्रैल 2026 तक) दिखाती हैं, जबकि कुछ में हालिया कमाई के आधार पर निगेटिव P/E या 'एट लॉस' (At Loss) का भी जिक्र है। यह स्थिति HDFC Bank (FY26 के लिए ₹15.50 डिविडेंड) और ICICI Bank (FY26 के लिए ₹12 डिविडेंड) जैसे अन्य बड़े बैंकों से अलग है, जिन्होंने डिविडेंड में इतनी बड़ी कटौती नहीं की है।
सेक्टर की चाल और डिपॉजिट ग्रोथ पर दबाव
भारतीय बैंकिंग सेक्टर में सामान्य तौर पर मजबूती बनी हुई है, क्रेडिट ग्रोथ (Credit Growth) के 11-13% रहने का अनुमान है। हालांकि, इंडस्ट्री में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और डिपॉजिट्स (Deposits) के लिए होड़ के चलते बैंकों के मुनाफे पर थोड़ा दबाव आ सकता है। IndusInd Bank के लिए डिपॉजिट ग्रोथ धीमी रही है, जिसमें रिटेल डिपॉजिट्स (Retail Deposits) का हिस्सा सिर्फ 44% है, जो पिछले साल से थोड़ा कम है।
भविष्य की कमाई और एनालिस्ट्स का रुख
FY26 के लिए ₹1.50 प्रति शेयर का डिविडेंड कट, जो 2009 के बाद सबसे कम है, भविष्य की कमाई को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है। यह संकेत दे सकता है कि बैंक को कैपिटल (Capital) की कमी का सामना करना पड़ रहा है, भविष्य में कमाई कम रहने की उम्मीद है, या बैंक शेयरहोल्डर्स को रिटर्न देने के बजाय इंटरनल कैपिटल बढ़ाने को प्राथमिकता दे रहा है। कई P/E एनालिसिस में निगेटिव P/E या 'एट लॉस' अर्निंग्स पर शेयर (EPS) का जिक्र, अंदरूनी प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) को लेकर सवाल खड़े करता है।
एनालिस्ट्स (Analysts) का रुख सतर्क है, कंसेंसस रेटिंग 'न्यूट्रल' (Neutral) या 'होल्ड' (Hold) है, और कई 'सेल' (Sell) की सलाह दे रहे हैं। बैंक की 48.9% की कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो (Cost-to-Income Ratio) भी ऑपरेशनल इनएफिशिएंसी (Operational Inefficiency) की ओर इशारा करती है।
