कैपिटल गेंस टैक्स बचाने का नया जरिया
IndusInd Bank ने कैपिटल गेंस अकाउंट स्कीम (CGAS) को शुरू किया है। इस स्कीम का मकसद ग्राहकों को अपनी संपत्ति (asset) की बिक्री से प्राप्त पूंजीगत लाभ (capital gains) को एक विशेष खाते में जमा करके उस पर लगने वाले टैक्स को कुछ समय के लिए टालने (defer) का मौका देना है। यह कैपिटल गेंस टैक्स से बचने के लिए एक प्रभावी तरीका है, खासकर तब जब ग्राहक उस पैसे को दोबारा कहीं और निवेश करने की सोच रहे हों।
मुनाफा घटने और वैल्यूएशन की चिंता
हालांकि, बैंक के लिए यह स्कीम ऐसे समय पर आई है जब उसे खुद कई वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। 25 मार्च, 2026 तक, बैंक के शेयर लगभग ₹818-₹819 के स्तर पर कारोबार कर रहे थे। बैंक का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) करीब ₹63,800 करोड़ है। लेकिन, निवेशकों के लिए चिंता की बात बैंक की वैल्यूएशन (Valuation) है। IndusInd Bank का अर्निंग्स पर शेयर (EPS) -26.10 है, जिसके चलते इसका पिछले बारह महीनों का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो लगभग -31.35 हो गया है। यह पिछले P/E रेशियो 16.5 से एक बड़ा अंतर दिखाता है, जो कमाई को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है। शेयर के हालिया प्रदर्शन में भी उतार-चढ़ाव देखा गया है।
सेक्टर में डिपॉजिट की कमी
यह सिर्फ IndusInd Bank की कहानी नहीं है, बल्कि पूरे भारतीय बैंकिंग सेक्टर को डिपॉजिट ग्रोथ (Deposit Growth) में सुस्ती का सामना करना पड़ रहा है। फरवरी 2026 तक, क्रेडिट ग्रोथ (Credit Growth) जहां 14.9% सालाना बढ़ी, वहीं डिपॉजिट ग्रोथ केवल 12.5% रही। इससे लोन-टू-डिपॉजिट रेशियो (LDR) 80% से ऊपर चला गया है। इसके अलावा, करंट अकाउंट सेविंग अकाउंट (CASA) रेशियो में भी भारी गिरावट आई है, जो FY22 में 44.8% से घटकर दिसंबर 2025 तक 37.9% रह गया है। इस वजह से बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) पर दबाव बढ़ रहा है और उन्हें महंगे होलसेल फंडिंग और टर्म डिपॉजिट पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
CGAS में बढ़ी प्रतिस्पर्धा
CGAS के मैदान में अब प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है। नवंबर 2025 से, 19 प्राइवेट बैंकों को यह स्कीम पेश करने की मंजूरी मिली है, जिनमें HDFC Bank, ICICI Bank और Kotak Mahindra Bank जैसी प्रमुख बैंकें शामिल हैं। इससे करदाताओं के लिए विकल्प तो बढ़े हैं, लेकिन बैंकों के बीच इन एसेट्स को आकर्षित करने की होड़ तेज हो गई है। उदाहरण के लिए, IndusInd Bank टाइप बी टर्म डिपॉजिट ₹10,000 से शुरू कर रहा है, जबकि ICICI Bank इसी तरह की सुविधा के लिए ₹25,000 की न्यूनतम राशि मांग रहा है।
IndusInd Bank के वित्तीय जोखिम
IndusInd Bank की मौजूदा वित्तीय स्थिति में कई बड़े जोखिम दिख रहे हैं। बैंक लगातार छह तिमाहियों से निगेटिव कमाई (negative earnings) की रिपोर्ट कर रहा है। सबसे हालिया अवधि में, बैंक ने ₹1,488.35 करोड़ का प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) लॉस दर्ज किया और प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 88.5% की भारी गिरावट आई। यह लगातार मुनाफा न कमा पाना इसके निगेटिव TTM EPS और P/E रेशियो में साफ झलकता है। हालांकि कुछ एनालिस्ट प्लेटफॉर्म्स ने हाल ही में स्टॉक को 'होल्ड' (Hold) रेटिंग दी है, लेकिन कई एनालिस्टों की 'सेल' (Sell) रेटिंग बनी हुई है। बैंक की बुक वैल्यू ₹833 है और स्टॉक अपनी बुक वैल्यू के करीब 0.98 गुना पर ट्रेड कर रहा है, जो अक्सर कमजोर कमाई वाली कंपनियों में देखने को मिलता है। बैंक की ₹14,36,530 करोड़ की आकस्मिक देनदारियां (contingent liabilities) और प्रमोटर होल्डिंग का 15.4% पर होना भी सावधानी बरतने की ओर इशारा करता है।
बैंकों और IndusInd का आउटलुक
FY26 और FY27 में बैंकिंग सेक्टर के लिए लगभग 13% की एडवांस ग्रोथ का अनुमान है, जो संभावित पॉलिसी रेट कट (policy rate cuts) से समर्थित है। लेकिन, ऊंचे LDR और डिपॉजिट जुटाने की चुनौती NIMs पर दबाव बनाए रखेगी। विभिन्न बैंकों द्वारा CGAS का विस्तार ग्राहकों के लिए सुविधा बढ़ाएगा। IndusInd Bank की इस स्कीम की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपने लाभ के संकट के बावजूद एसेट्स को कितना आकर्षित कर पाता है और प्रतिस्पर्धी बैंकिंग माहौल में डिपॉजिट ग्रोथ को कैसे मजबूत करता है।