IndusInd Bank के शेयरों में आज **5%** की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, भले ही कंपनी के पहली तिमाही (Q1) के मुनाफे में **₹1,037 करोड़** का इजाफा हुआ हो। खराब एसेट क्वालिटी और गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं ने निवेशकों को परेशान कर दिया।
Detailed Coverage
नतीजों के बावजूद क्यों गिरी IndusInd Bank?
IndusInd Bank ने 2027 फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में ₹1,037 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। पिछले साल की इसी अवधि में यह मुनाफा ₹604 करोड़ था। नतीजों से पहले शेयर में 18% का तगड़ा उछाल आया था, लेकिन नतीजों के बाद गुरुवार को शेयर 5% से ज्यादा टूट गए।
फाइनेंशियल परफॉरमेंस और एसेट क्वालिटी
बैंक के मैनेजमेंट की कोशिशों से एसेट क्वालिटी में सुधार दिखा है। लोन 3.3% बढ़कर ₹3.26 लाख करोड़ तक पहुंच गए। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) रेशियो 18 बेसिस पॉइंट घटकर 3.25% हो गया। यह सुधार माइक्रोफाइनेंस सेगमेंट में स्ट्रेस कम होने से हुआ। नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) 3.57% रहा, लेकिन एक बार के टैक्स रिफंड को छोड़ दें तो एडजस्टेड मार्जिन 3.35% पर आ गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि बैंक ने कम ब्याज वाले होलसेल लोन पर ज्यादा फोकस किया।
मैनेजमेंट का मानना है कि क्रेडिट कॉस्ट और कम होगी और वे इस फाइनेंशियल ईयर के अंत तक 1% रिटर्न ऑन एसेट्स (ROA) का लक्ष्य रख रहे हैं। हालांकि, बैंकिंग सेक्टर की तुलना में बैंक की ग्रोथ थोड़ी धीमी है। जहां पूरे बैंकिंग सिस्टम में 18.6% की क्रेडिट ग्रोथ दिखी, वहीं IndusInd Bank का एडवांस 2.3% घटा है।
गवर्नेंस और मार्केट सेंटीमेंट
निवेशकों का भरोसा बनाए रखने में गवर्नेंस से जुड़ी चिंताएं एक बड़ी वजह बनी हुई हैं। ये मुद्दे सितंबर 2024 में अकाउंटिंग प्रैक्टिस और माइक्रोफाइनेंस लोन के क्लासिफिकेशन को लेकर सामने आए थे। बैंक ने इन पर सुधार के कदम उठाए हैं, लेकिन मई में रेगुलेटर्स और सरकारी दफ्तरों में व्हिसलब्लोअर की नई शिकायतों ने शेयर पर दबाव बढ़ा दिया है। इन शिकायतों में इनसाइडर ट्रेडिंग और ऑडिट फाइंडिंग्स को दबाने के आरोप लगाए गए हैं। बैंक का कहना है कि उसे इन आरोपों के संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।
आगे की रणनीति
बैंक अब फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही में रिटेल और SME लोन पर ज्यादा फोकस करेगा, खासकर मॉर्टगेज और गोल्ड लोन जैसे सुरक्षित प्रोडक्ट्स पर। इसका मकसद ग्रोथ और एसेट क्वालिटी के बीच बैलेंस बनाना है।
निवेशकों के लिए, इन फाइनेंशियल सुधारों की निरंतरता और बैंक की गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं का समाधान देखना अहम होगा। जब तक बैंक लगातार अच्छा परफॉरमेंस और स्पष्ट गवर्नेंस स्टैंडर्ड नहीं दिखा पाता, तब तक वह अपने पीयर्स (दूसरे बैंकों) की तुलना में कम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर सकता है।
