IndusInd Bank Share: SFIO की रडार पर ₹3000 करोड़ का घपला! जांच के दायरे में आई बड़ी ऑडिट फर्म्स

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
IndusInd Bank Share: SFIO की रडार पर ₹3000 करोड़ का घपला! जांच के दायरे में आई बड़ी ऑडिट फर्म्स
Overview

सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) इंडसइंड बैंक पर शिकंजा कसता जा रहा है। बैंक पर **₹1,000 करोड़** के अनवेरिफाइड ट्रेजरी ट्रेड्स (treasury trades) और अपनी माइक्रोफाइनेंस यूनिट भारत फाइनेंशियल इंक्लूजन लिमिटेड (BFIL) के जरिए **₹2,000 करोड़** के संभावित लोन एवरग्रीनिंग (loan evergreening) जैसे गंभीर आरोप हैं।

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इंडसइंड बैंक (IndusInd Bank) अब सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) के शिकंजे में और कस गया है। जांच एजेंसी ने बैंक के पिछले एक दशक में शामिल प्रमुख ऑडिट फर्मों से भी पूछताछ शुरू कर दी है, जिससे इस मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

यह जांच बैंक के ₹1,000 करोड़ के अनवेरिफाइड ट्रेजरी ट्रेड्स (unverified treasury trades) और ₹2,000 करोड़ से जुड़े संभावित लोन एवरग्रीनिंग (loan evergreening) के मामलों पर केंद्रित है, जो खास तौर पर इसकी माइक्रोफाइनेंस सब्सिडियरी भारत फाइनेंशियल इंक्लूजन लिमिटेड (Bharat Financial Inclusion Limited - BFIL) से जुड़े बताए जा रहे हैं।

कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs - MCA) के आदेश पर यह जांच दिसंबर 2025 में शुरू हुई थी, जो ऑडिटर और फोरेंसिक रिपोर्टों से मिली चिंताओं के बाद आगे बढ़ी। हालांकि बैंक ने मार्च 2026 में कहा था कि कर्मचारियों को कोई सीधा समन नहीं मिला है, लेकिन ऑडिट फर्मों से SFIO की पूछताछ जांच में एक बड़ा मोड़ है।

इस पूरे मामले का असर बैंक के टॉप मैनेजमेंट पर भी पड़ा है, जिसके चलते पूर्व सीईओ और डिप्टी सीईओ अप्रैल 2025 में इस्तीफा दे चुके हैं।

इंडसइंड बैंक के शेयर की कीमत में मई 2026 के मध्य ₹886 से ₹908 के बीच उतार-चढ़ाव देखा गया है, जो कि मार्च 2025 से चली आ रही अकाउंटिंग दिक्कतों के बाद बाजार की अनिश्चितता को दर्शाता है। बैंक का P/E रेश्यो (Price-to-Earnings ratio) 74-78 के आसपास या कभी-कभी -32.68 तक नकारात्मक दर्ज किया गया है, जबकि बैंकिंग इंडस्ट्री का औसत P/E रेश्यो लगभग 11.13 है। यह भारी अंतर निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।

SFIO का ऑडिट फर्मों तक पहुंचना कॉर्पोरेट गवर्नेंस (corporate governance) को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। डेरिवेटिव्स (derivatives) से जुड़े पांच से सात साल पुराने मामलों की जांच बताती है कि कहीं न कहीं सिस्टम में खामियां रही हैं। ₹2,000 करोड़ का अनुमानित असर बैंक के मुनाफे को प्रभावित कर सकता है और निवेशकों के भरोसे को कम कर सकता है, जो कि अतीत में भारतीय बैंकों के लिए धोखाधड़ी के आरोपों के बाद स्टॉक में बड़ी गिरावट का कारण रहा है।

बैंक का मार्केट कैपिटलाइजेशन (market capitalization) लगभग ₹69,000-69,500 करोड़ है, लेकिन मौजूदा रेगुलेटरी दबाव और संभावित नई खुलासे बैंक के मूल्यांकन और स्थिरता पर सवाल खड़े कर सकते हैं। एनालिस्ट्स (analysts) की राय मिली-जुली है, औसत टारगेट प्राइस करीब ₹911-₹913 है। निवेशकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि इंडसइंड बैंक इस जांच का सामना कैसे करता है और निवेशकों का विश्वास कैसे फिर से जीतता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.