इंडसइंड बैंक (IndusInd Bank) अब सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) के शिकंजे में और कस गया है। जांच एजेंसी ने बैंक के पिछले एक दशक में शामिल प्रमुख ऑडिट फर्मों से भी पूछताछ शुरू कर दी है, जिससे इस मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
यह जांच बैंक के ₹1,000 करोड़ के अनवेरिफाइड ट्रेजरी ट्रेड्स (unverified treasury trades) और ₹2,000 करोड़ से जुड़े संभावित लोन एवरग्रीनिंग (loan evergreening) के मामलों पर केंद्रित है, जो खास तौर पर इसकी माइक्रोफाइनेंस सब्सिडियरी भारत फाइनेंशियल इंक्लूजन लिमिटेड (Bharat Financial Inclusion Limited - BFIL) से जुड़े बताए जा रहे हैं।
कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs - MCA) के आदेश पर यह जांच दिसंबर 2025 में शुरू हुई थी, जो ऑडिटर और फोरेंसिक रिपोर्टों से मिली चिंताओं के बाद आगे बढ़ी। हालांकि बैंक ने मार्च 2026 में कहा था कि कर्मचारियों को कोई सीधा समन नहीं मिला है, लेकिन ऑडिट फर्मों से SFIO की पूछताछ जांच में एक बड़ा मोड़ है।
इस पूरे मामले का असर बैंक के टॉप मैनेजमेंट पर भी पड़ा है, जिसके चलते पूर्व सीईओ और डिप्टी सीईओ अप्रैल 2025 में इस्तीफा दे चुके हैं।
इंडसइंड बैंक के शेयर की कीमत में मई 2026 के मध्य ₹886 से ₹908 के बीच उतार-चढ़ाव देखा गया है, जो कि मार्च 2025 से चली आ रही अकाउंटिंग दिक्कतों के बाद बाजार की अनिश्चितता को दर्शाता है। बैंक का P/E रेश्यो (Price-to-Earnings ratio) 74-78 के आसपास या कभी-कभी -32.68 तक नकारात्मक दर्ज किया गया है, जबकि बैंकिंग इंडस्ट्री का औसत P/E रेश्यो लगभग 11.13 है। यह भारी अंतर निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।
SFIO का ऑडिट फर्मों तक पहुंचना कॉर्पोरेट गवर्नेंस (corporate governance) को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। डेरिवेटिव्स (derivatives) से जुड़े पांच से सात साल पुराने मामलों की जांच बताती है कि कहीं न कहीं सिस्टम में खामियां रही हैं। ₹2,000 करोड़ का अनुमानित असर बैंक के मुनाफे को प्रभावित कर सकता है और निवेशकों के भरोसे को कम कर सकता है, जो कि अतीत में भारतीय बैंकों के लिए धोखाधड़ी के आरोपों के बाद स्टॉक में बड़ी गिरावट का कारण रहा है।
बैंक का मार्केट कैपिटलाइजेशन (market capitalization) लगभग ₹69,000-69,500 करोड़ है, लेकिन मौजूदा रेगुलेटरी दबाव और संभावित नई खुलासे बैंक के मूल्यांकन और स्थिरता पर सवाल खड़े कर सकते हैं। एनालिस्ट्स (analysts) की राय मिली-जुली है, औसत टारगेट प्राइस करीब ₹911-₹913 है। निवेशकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि इंडसइंड बैंक इस जांच का सामना कैसे करता है और निवेशकों का विश्वास कैसे फिर से जीतता है।