भारत की महिलाओं का दबदबा! ₹76 लाख करोड़ के क्रेडिट बूम से बिजनेस को मिली नई उड़ान

BANKINGFINANCE
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
भारत की महिलाओं का दबदबा! ₹76 लाख करोड़ के क्रेडिट बूम से बिजनेस को मिली नई उड़ान
Overview

भारत में महिलाएं क्रेडिट ग्रोथ को लीड कर रही हैं। उनका कुल **₹76 लाख करोड़** का पोर्टफोलियो देश के कुल लेंडिंग का **26%** है। यह माइक्रोफाइनेंस से निकलकर रिटेल और बिजनेस लोन की ओर एक बड़ा बदलाव दिखाता है, जिसे देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ने और मजबूत किया है।

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महिलाओं के हाथ में आर्थिक बदलाव की डोर

महिलाओं के क्रेडिट पोर्टफोलियो में गजब की उछाल आई है, जो अब ₹76 लाख करोड़ के आंकड़े को छू गया है। यह सिर्फ लोन मिलने से कहीं बढ़कर, भारत में गहरे आर्थिक बदलावों का संकेत है। साफ दिख रहा है कि फोकस छोटे माइक्रोफाइनेंस लोन से हटकर, बिजनेस और आय बढ़ाने वाले बड़े लोन की ओर बढ़ा है। महिलाओं द्वारा लिए जाने वाले बिजनेस लोन का हिस्सा अब उनके कुल उधार का 25% हो गया है, जो 2017 में सिर्फ 16% था। यह एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है।

महिला उद्यमियों का बढ़ता दबदबा

महिला उद्यमी देश के लिए एक बड़ी शक्ति बनकर उभर रही हैं। 2017 के बाद से उनके बिजनेस लोन पोर्टफोलियो में 7.5 गुना की वृद्धि हुई है। पिछले तीन सालों में, इन लोन को लेने वाली महिलाओं की संख्या सालाना 31% की दर से बढ़ी है, जो उनके मजबूत उद्यमी जज्बे को दिखाता है। यह ट्रेंड लंबे समय तक चलने वाली आर्थिक ग्रोथ के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि यह क्रेडिट के इस्तेमाल को उपभोग (consumption) से हटाकर आय सृजन (income generation) की ओर ले जा रहा है।

डिजिटल साधनों से मिली रफ्तार

भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे आधार ई-केवाईसी (Aadhaar e-KYC), यूपीआई (UPI), और पेपरलेस अंडरराइटिंग (paperless underwriting) ने इस बूम में अहम भूमिका निभाई है। डिजिटाइजेशन ने बाधाओं को दूर किया है, जिससे लेंडर्स (lenders) अब वेरिफायबल फाइनेंशियल डेटा का उपयोग करके क्रेडिट योग्यता का बेहतर आकलन कर पाते हैं। लोन अप्रूवल (loan approvals) में तेजी आई है। उदाहरण के लिए, कंजम्पशन लोन (consumption loans) के लिए उसी दिन अप्रूवल का आंकड़ा 2022 में 34% था, जो 2025 तक बढ़कर 45% हो गया है। यह बढ़ी हुई एफिशिएंसी (efficiency) को दिखाता है।

महिलाओं के लिए अभी भी हैं चुनौतियां

इस प्रगति के बावजूद, महिलाओं के लिए क्रेडिट तक पहुंच अभी भी पूरी तरह से समान नहीं है। पहली बार लोन लेने वाली महिलाएं अक्सर तत्काल घरेलू जरूरतों के लिए कंजम्पशन और गोल्ड लोन का सहारा लेती हैं। एडवांस बिजनेस क्रेडिट, जैसे कैश क्रेडिट (cash credit) और ओवरड्राफ्ट (overdraft) तक उनकी पहुंच अभी भी कम है, जो ग्रोथ के लिए काफी गुंजाइश दिखाती है। हालांकि डिजिटल पहुंच महत्वपूर्ण है, लेकिन यह पूर्ण वित्तीय समावेशन (financial inclusion) और सशक्तिकरण के लिए पर्याप्त नहीं है; फॉर्मल फाइनेंशियल सिस्टम (formal financial system) में आगे बढ़ने पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.