UPI पर 'डार्क पैटर्न्स' का साया: 80% से ज़्यादा ग्राहक परेशान, RBI सख्त!

BANKINGFINANCE
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
UPI पर 'डार्क पैटर्न्स' का साया: 80% से ज़्यादा ग्राहक परेशान, RBI सख्त!
Overview

भारत का डिजिटल पेमेंट सेक्टर UPI के चलते तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन 'डार्क पैटर्न्स' यानी धोखेबाज़ डिजाइन की वजह से ग्राहकों का भरोसा डगमगा रहा है। ये चालबाज़ियां **80%** से ज़्यादा यूज़र्स को प्रभावित कर रही हैं, जिससे RBI को सख़्त नियम लाने पड़ रहे हैं।

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UPI की रफ्तार पर 'डार्क पैटर्न्स' का ग्रहण

UPI आज भारत के डिजिटल ट्रांजैक्शन का मुख्य आधार बन चुका है। फाइनेंशियल ईयर 2025 तक, UPI ने सभी रिटेल डिजिटल पेमेंट्स का 81% हिस्सा संभाला। उम्मीद है कि इस साल 228 बिलियन ट्रांजैक्शन होंगे, जिनकी कीमत करीब ₹300 ट्रिलियन तक पहुंच सकती है। PhonePe, Google Pay और Paytm जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स इस ग्रोथ को लीड कर रहे हैं। लेकिन, इस चमक के पीछे एक बड़ी चिंता छिपी है। Local Circles की एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, 80% से ज़्यादा यूज़र्स ऐसे 'डार्क पैटर्न्स' का शिकार हुए हैं। ये वो चालाक डिज़ाइन हैं जो यूज़र्स को अनचाही खरीदारी या एक्शन लेने के लिए मजबूर करते हैं। ये ई-कॉमर्स, लेंडिंग और ऑनलाइन बैंकिंग जैसे कई ऐप्स में आम हैं।

यूज़र्स कई तरह की दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। लगभग 63% यूज़र्स ने छिपे हुए चार्जेज़ का अनुभव किया, जो पहले बताए नहीं जाते (दो साल पहले यह आंकड़ा 52% था)। सब्सक्रिप्शन ट्रैप भी एक बड़ी समस्या है, 68% यूज़र्स को बार-बार होने वाले पेमेंट्स को कैंसिल करने या उन्हें अनलिंक करने में मुश्किल आती है। 82% यूज़र्स मैनिपुलेटिव इंटरफेस का सामना करते हैं जो अनचाहे प्रोडक्ट्स को पुश करते हैं या उनकी चॉइस को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा, 66% यूज़र्स को वादा किए गए रिवॉर्ड्स नहीं मिलते, 61% के कार्ट में बिना उनकी मर्ज़ी के एक्स्ट्रा आइटम्स जुड़ जाते हैं (बास्केट स्नीकिंग) और 42% यूज़र्स को अनचाहे एक्शन लेने के लिए मज़बूर किया जाता है। वहीं, 79% ऐप्स यूज़र्स को पर्सनल डेटा शेयर करने के लिए गुमराह करते हैं।

RBI ने कसी नकेल, पर चुनौतियां बरकरार

इन बढ़ती समस्याओं को देखते हुए, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपने नियमों को मज़बूत कर रहा है। 'डिजिटल पेमेंट्स - ई-मैंडेट फ्रेमवर्क, 2026' के तहत, अब डेबिट से कम से कम 24 घंटे पहले प्री-ट्रांजैक्शन नोटिफिकेशन देना ज़रूरी है। साथ ही, रिकरिंग पेमेंट्स को कैंसिल करना आसान बनाया गया है और मैंडेट रजिस्टर करने के लिए एक अतिरिक्त सुरक्षा कदम जोड़ा गया है। सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने भी 13 तरह के डार्क पैटर्न्स की लिस्ट जारी की है और इनके खिलाफ गाइडलाइन्स निकाली हैं, उल्लंघन करने वालों पर जुर्माने और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। बैंकों को जुलाई 2026 तक अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म से डार्क पैटर्न्स हटाने होंगे।

हालांकि, यह देखा जा रहा है कि डार्क पैटर्न्स अभी भी धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहे हैं, जो नियमों को लागू करने में आ रही मुश्किलों को दिखाता है। Local Circles के एक ऑडिट में पाया गया कि 97% प्रमुख भारतीय प्लेटफॉर्म्स अभी भी डार्क पैटर्न्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह दर्शाता है कि नियम बनाना सिर्फ पहला कदम है। छिपे हुए चार्जेज़ में हुई बढ़ोतरी, पिछले प्रयासों के बावजूद, यह बताती है कि कैसे ये धोखेबाज़ तरीके लगातार विकसित हो रहे हैं और मज़बूत निगरानी व तेज़ पेनल्टी की ज़रूरत है।

भरोसे का संकट, प्लेटफॉर्म्स पर बड़ा बिज़नेस रिस्क

डार्क पैटर्न्स का इस्तेमाल शायद तुरंत पैसा दिला दे, लेकिन यह डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए लंबे समय में बड़ी समस्याएं खड़ी करता है। जब यूज़र्स का भरोसा टूटता है, तो नए ग्राहक लाने में ज़्यादा खर्च आता है, ग्राहक छोड़कर चले जाते हैं और हर ग्राहक से मिलने वाली कुल वैल्यू कम हो जाती है। PhonePe (लगभग 48% मार्केट शेयर) और Google Pay (लगभग 33% मार्केट शेयर) के दबदबे वाले बाज़ार में, साफ और नैतिक डिज़ाइन ही एक बड़ा अंतर पैदा कर सकते हैं। भले ही NPCI की पॉलिसी किसी एक प्लेयर को 30% ट्रांजैक्शन वॉल्यूम तक सीमित रखती है, लेकिन इसे सख़्ती से लागू नहीं किया गया है। जो प्लेटफॉर्म्स डार्क पैटर्न्स को हटाकर यूज़र चॉइस पर फोकस करेंगे, वे भरोसेमंद वित्तीय सेवाओं की तलाश करने वाले ग्राहकों को आकर्षित कर पाएंगे।

पारदर्शिता ही भविष्य की गारंटी

भारत के डिजिटल पेमेंट सेक्टर का भविष्य इनोवेशन और कंज्यूमर प्रोटेक्शन के बीच संतुलन पर निर्भर करेगा। जैसे-जैसे रेगुलेशन विकसित होंगे और प्रवर्तन मज़बूत होगा, जो प्लेटफॉर्म्स पारदर्शिता, नैतिक डिजाइन और यूज़र की ज़रूरतों पर ध्यान केंद्रित करेंगे, वे लगातार ग्रोथ और मार्केट सक्सेस हासिल करेंगे। रेगुलेटर्स और उपभोक्ताओं के बढ़ते दबाव से एक बड़े बदलाव का संकेत मिलता है: भरोसा, जो स्पष्ट और ईमानदार डिजिटल अनुभवों पर बनता है, सफलता का सबसे महत्वपूर्ण कारक होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.