India MTF Surge: ₹1.16 लाख करोड़ के पार खुला बाज़ार, निवेशक लीवरेज्ड ट्रेडिंग के लिए हुए बेताब!

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AuthorNeha Patil|Published at:
India MTF Surge: ₹1.16 लाख करोड़ के पार खुला बाज़ार, निवेशक लीवरेज्ड ट्रेडिंग के लिए हुए बेताब!
Overview

भारत में मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) ने निवेशकों के बीच जबरदस्त क्रेज दिखाया है। यह सुविधा दिसंबर 2025 तक बढ़कर **₹1.16 लाख करोड़** के पार पहुंच गई है, जो FY23 में महज **₹24,920 करोड़** थी। यह निवेशकों के लीवरेज्ड ट्रेडिंग के प्रति बढ़ते आकर्षण का साफ संकेत है।

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MTF ग्रोथ से बाज़ार में आई तेज़ी

भारत में कुल पेंडिंग मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) का आंकड़ा दिसंबर 2025 तक चौंकाने वाले ₹1.16 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। यह FY23 में दर्ज ₹24,920 करोड़ की तुलना में लगभग पांच गुना की वृद्धि है। इससे लीवरेज्ड ट्रेडिंग के लिए निवेशकों की मजबूत मांग का पता चलता है। MTF की मदद से निवेशक कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू का केवल एक हिस्सा जमा करके शेयर खरीद सकते हैं, बाकी राशि का भुगतान ब्रोकर करते हैं, जो आम तौर पर सालाना 9% से 16% ब्याज दर पर होता है।

ब्रोकर कंसंट्रेशन और रिस्क

MTF बाज़ार मुख्य रूप से कुछ बड़े, बैंक-समर्थित ब्रोकरेज हाउस के इर्द-गिर्द केंद्रित है, जिनका बाज़ार में लगभग 50% हिस्सा है। Zerodha, Angel One, Motilal Oswal और Bajaj Securities जैसे इंडिपेंडेंट ब्रोकर का हिस्सा थोड़ा कम, लगभग 5-6% प्रत्येक है। PPFAS एसेट मैनेजमेंट ने इस ओर इशारा किया है कि छोटे, स्वतंत्र ब्रोकर अपने सीमित कैपिटल बेस और फंडिंग के रास्तों के कारण ज़्यादा क्रेडिट और लिक्विडिटी रिस्क का सामना कर सकते हैं। इन ब्रोकर के लिए फंडिंग के मुख्य स्रोत उनका अपना कैपिटल, NBFCs से उधार या कमर्शियल पेपर होते हैं, जबकि बैंकों पर रेगुलेटरी पाबंदियां ज़्यादा होती हैं।

वोलेटिलिटी और जोखिम प्रबंधन

बाज़ार विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ी हुई वोलेटिलिटी (Volatility) लीवरेज्ड पोजीशन्स के लिए मार्जिन कॉल को बढ़ा सकती है। ऐसे हालात जबरन लिक्विडेशन (forced liquidations) को ट्रिगर कर सकते हैं, जिससे सिस्टम में काउंटरपार्टी क्रेडिट रिस्क बढ़ सकता है। इन खतरों से निपटने के लिए, ब्रोकर आमतौर पर कड़े रिस्क मैनेजमेंट प्रोटोकॉल लागू करते हैं। इसमें व्यक्तिगत शेयरों और किसी एक निवेशक के एक्सपोज़र पर विशेष सीमाएं तय करना शामिल है, ताकि बढ़ती ट्रेडिंग गतिविधि के बीच बाज़ार की स्थिरता बनी रहे।

PPFAS फंड की रणनीति

PPFAS एसेट मैनेजमेंट, अपने Parag Parikh Liquid Fund के ज़रिए ब्रोकिंग कंपनियों में निवेश के लिए एक सावधानी भरा तरीका अपनाता है। फंड अपने कुल पोर्टफोलियो का 5% से ज़्यादा बैंक-समर्थित ब्रोकिंग एंटिटी में निवेश नहीं करता, और किसी एक कंपनी में निवेश अधिकतम 3% तक सीमित रखता है। यह इंडस्ट्री के औसत 11% एक्सपोज़र से काफी कम है। PPFAS ऐसी कंपनियों को पसंद करता है जिनके रेवेन्यू स्ट्रीम विविध होते हैं, और जो MTF के अलावा म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस वितरण से भी कमाई करती हैं। साथ ही, उनके पास पर्याप्त लिक्विडिटी बफ़र्स और पैरेंट बैंकों का अहम सपोर्ट भी होता है। Parag Parikh Liquid Fund खुद एक ओपन-एंडेड लिक्विड स्कीम है जिसे कम ब्याज दर और क्रेडिट रिस्क के साथ शॉर्ट-टर्म इनकम जनरेट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.