भारत का रिटेल क्रेडिट मार्केट जून 2026 तक **₹142 लाख करोड़** के स्तर पर पहुंच गया है, जो सालाना आधार पर **18%** की ग्रोथ दिखाता है। इस तेजी में अनसिक्योर्ड लोन की **26%** हिस्सेदारी सबसे अहम रही है।
भारत के रिटेल क्रेडिट सेक्टर में लगातार तेजी का दौर जारी है। जून 2026 तक मार्केट का कुल आकार ₹142 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। हालांकि लोन लेने की रफ्तार में मामूली नरमी आई है, लेकिन बैंकों और फाइनेंस कंपनियों के लिए यह लोन वॉल्यूम अब भी कमाई का बड़ा जरिया बना हुआ है।
अनसिक्योर्ड लोन में तूफानी तेजी
बाजार की इस बढ़त के पीछे सबसे बड़ा हाथ अनसिक्योर्ड लेंडिंग का है, जिसमें 26% का उछाल दर्ज किया गया है। पर्सनल लोन का AUM ₹16.2 लाख करोड़ पर पहुंच गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 14% ज्यादा है। वहीं, कंज्यूमर ड्यूरेबल फाइनेंसिंग में 37% की जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है, जिसका AUM अब ₹1.1 लाख करोड़ हो गया है।
NBFCs (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां) इस सेगमेंट में काफी आक्रामक नजर आ रही हैं, खासकर ₹30,000 से कम के छोटे टिकट वाले लोन में। ये कंपनियां उन ग्राहकों तक पहुंच बना रही हैं, जिनका क्रेडिट हिस्ट्री ज्यादा मजबूत नहीं है। निवेशकों के लिए यह ग्रोथ का मौका जरूर है, लेकिन यह उन्हें कंज्यूमर स्पेंडिंग में होने वाले बदलावों के प्रति अधिक संवेदनशील भी बनाता है।
एसेट क्वालिटी और मार्केट डायनामिक्स
राहत की बात यह है कि एसेट क्वालिटी अभी स्थिर बनी हुई है। जून 2026 तक नेट 30+ डेलीक्वेंसी रेट (30 दिन या उससे अधिक बकाया लोन) सुधरकर 3.0% पर आ गया है, जो पिछले साल की समान अवधि में 4.1% था। वहीं, हाउसिंग लोन का बाजार ₹43.6 लाख करोड़ के AUM के साथ 13% की दर से आगे बढ़ रहा है, जहां पारंपरिक बैंक अपनी धाक जमाए हुए हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी (Investor Monitorables)
मजबूत आंकड़ों के बीच कुछ संरचनात्मक जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता:
- क्रेडिट कंसंट्रेशन: कई अनसिक्योर्ड उधारकर्ताओं के पास पहले से ही बड़े वैल्यू वाले सिक्योरर्ड लोन हैं। आर्थिक हालात बिगड़ने पर यह डिफॉल्ट का खतरा बढ़ा सकता है।
- सीजनिंग रिस्क: पिछले 18 से 24 महीनों में बांटे गए भारी लोन अब मैच्योरिटी के करीब हैं। इनकी वास्तविक रीपेमेंट क्वालिटी आने वाले समय में पता चलेगी।
- क्रेडिट कॉस्ट: पोर्टफोलियो की उम्र बढ़ने के साथ कंपनियों को प्रोविजनिंग बढ़ानी पड़ सकती है, जिससे उनके क्रेडिट कॉस्ट में इजाफा संभव है।
- ब्याज दरें: बदलते इंटरेस्ट रेट साइकल का सीधा असर उधारकर्ताओं की रीपेमेंट क्षमता पर पड़ेगा, जिस पर निवेशकों को बारीक नजर रखनी चाहिए।
