भारत का प्राइवेट क्रेडिट मार्केट अब **$30 अरब** के स्तर पर पहुंच गया है। लेकिन, 2026 के IBC अमेंडमेंट एक्ट के बाद रिकवरी के नियम सख्त हो गए हैं, जो निवेशकों के लिए रिस्क बढ़ा सकते हैं।
भारत का प्राइवेट क्रेडिट सेक्टर तेजी से बड़ा फाइनेंशियल मार्केट बनकर उभरा है। साल 2026 की पहली छमाही में ही इस सेक्टर में 100 से ज्यादा ट्रांजेक्शन के जरिए $3.5 अरब का निवेश हुआ है। हालांकि, यहां मिलने वाला रिटर्न 22% तक आकर्षक हो सकता है, लेकिन नए नियमों के बाद गेम पूरी तरह बदल गया है।
IBC 2026: वसूली का बदला गणित
26 मई, 2026 से लागू हुए IBC (Insolvency and Bankruptcy Code) अमेंडमेंट एक्ट ने पूरी तस्वीर बदल दी है। अब लेंडर का 'सिक्योर्ड स्टेटस' केवल कोलैटरल की वास्तविक वैल्यू तक ही सीमित है। इसका मतलब है कि अगर गिरवी रखी गई संपत्ति या अनलिस्टेड शेयर कागजों पर महंगे दिख रहे हैं, तो भी आप उन पर भरोसा नहीं कर सकते। लेंडर्स को अब पैसा वसूलने के लिए एसेट की सही मार्केट वैल्यू का बारीकी से हिसाब रखना होगा।
बाजार का ट्रेंड और जोखिम
अभी इस मार्केट में 74% हिस्सा डोमेस्टिक फंड्स का है। रियल एस्टेट सेक्टर 35% डील्स के साथ लीड कर रहा है, जबकि फूड एंड बेवरेज सेक्टर में निवेश 12 गुना उछला है।
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चेतावनी लिक्विडिटी की है। बैंक FD या सरकारी बॉन्ड के मुकाबले यहां पैसा 3 से 7 साल के लिए लॉक हो जाता है। चूंकि ये एसेट स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड नहीं होते, इसलिए वैल्यूएशन में गड़बड़ी होने पर बड़ा रिस्क हो सकता है। फंड मैनेजर्स का ट्रैक रिकॉर्ड और लीगल पेपर्स की मजबूती अब इस सेक्टर में निवेश का सबसे अहम पैमाना बन गई है।
