सरकारी खजाने की नई योजना के तहत, Power Finance Corporation (PFC) ने Rural Electrification Corporation (REC) को अपने में मिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। PFC के बोर्ड ने इस मर्जर (merger) प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए भारत के राष्ट्रपति के पास भेजा है। यह कवायद सरकारी NBFCs को एक साथ लाकर उन्हें बड़ा और अधिक कुशल बनाने की सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
बाजार की प्रतिक्रिया (Market Reaction)
इस खबर का बाजार पर मिला-जुला असर देखा गया। 16 मई 2026 को, Power Finance Corporation के शेयर 1.63% गिरकर ₹444.00 पर बंद हुए, जबकि Rural Electrification Corporation के शेयर 0.72% लुढ़ककर ₹345.70 पर आ गए। बाजार की यह प्रतिक्रिया मर्जर के क्रियान्वयन को लेकर चल रही चिंताओं को दर्शा सकती है, खासकर शेयर एक्सचेंज रेशियो (share exchange ratio) जैसे जटिल मुद्दों पर।
स्केल और वैल्यूएशन (Scale & Valuation)
इस प्रस्तावित विलय का लक्ष्य India का सबसे बड़ा सरकारी NBFC बनाना है, जिसकी कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (market capitalization) लगभग ₹2.38 लाख करोड़ होगी (PFC की ~₹1.47 लाख करोड़ और REC की ~₹0.91 लाख करोड़)। PFC का मौजूदा P/E (Price-to-Earnings) रेशियो लगभग 5.68 है, वहीं REC का वैल्यूएशन 5.58 के आसपास है। ये आंकड़े Bajaj Finance (P/E ~33.8) या Shriram Finance (P/E ~22.01) जैसे बड़े प्राइवेट NBFCs की तुलना में काफी कम हैं, जो वैल्यूएशन में एक बड़ी खाई की ओर इशारा करता है।
आगे की चुनौतियां (Key Challenges Ahead)
हालांकि, इस राह में कई बड़ी चुनौतियां हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि सरकार की हिस्सेदारी 51% से नीचे जा सकती है। अनुमानों के मुताबिक, बहुमत बनाए रखने के लिए लगभग ₹25,000 करोड़ की पूंजी निवेश की आवश्यकता हो सकती है। इसके अलावा, शेयर एक्सचेंज रेशियो तय करने के लिए REC का स्वतंत्र मूल्यांकन एक बड़ी बाधा है। दोनों कंपनियों के बॉन्ड (bond) नियमों में भी 51% से कम सरकारी हिस्सेदारी होने पर बदलाव के क्लॉज (clause) हो सकते हैं, जो एक मुश्किल नियामक और वित्तीय स्थिति पैदा कर सकते हैं। दो बड़ी सरकारी संस्थाओं को एकीकृत करना भी अपनी चुनौतियों के साथ आता है।
भविष्य का दृष्टिकोण (Future Outlook)
विश्लेषकों का रुख दोनों कंपनियों के प्रति आम तौर पर सकारात्मक है। PFC को 'स्ट्रॉन्ग बाय' (Strong Buy) रेटिंग मिली है और इसका औसत 1-वर्षीय टारगेट प्राइस ₹502.2 है। REC के लिए भी ज्यादातर विश्लेषक 'बाय' (Buy) रेटिंग दे रहे हैं। मर्जर का पूरा होना, जो 1 अप्रैल 2027 तक तय है, इन जटिल वैल्यूएशन और नियामक मुद्दों को सुलझाने पर निर्भर करेगा।