भारतीय निवेशकों ने मार्जिन ट्रेडिंग के जरिए रिकॉर्ड **₹1.49 लाख करोड़** का कर्ज लिया है। यह चलन ब्रोकरेज हाउस के लिए तो मुनाफे का सौदा है, लेकिन मार्केट में गिरावट आने पर निवेशकों के लिए बड़ा रिस्क बन सकता है।
बाजार में बढ़ता कर्ज का बोझ
सितंबर के मध्य तक मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) का कुल आंकड़ा ₹1.49 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर को छू गया है। पिछले साल के ₹99,000 करोड़ के मुकाबले यह एक भारी उछाल है। MTF की सुविधा के जरिए निवेशक अपनी जेब में मौजूद पैसों से ज्यादा के शेयर खरीद सकते हैं, जबकि बाकी का पैसा ब्रोकर कर्ज के तौर पर देता है।
ब्रोकरेज की नई कमाई
कैश मार्केट की सुस्ती के बीच ब्रोकरेज फर्मों के लिए यह एक अहम इनकम सोर्स बन गया है। जब ट्रेडिंग वॉल्यूम और ब्रोकरेज फीस कम होती है, तो इन मार्जिन लोन पर मिलने वाला ब्याज ब्रोकरेज कंपनियों के मुनाफे को सहारा देता है।
प्रमुख खिलाड़ियों की बात करें, तो Angel One का औसत MTF बुक सितंबर तिमाही में ₹6,600 करोड़ रहा, जिसमें पिछली तिमाही के मुकाबले 20% की बढ़त देखी गई। वहीं Groww का मार्जिन बुक 23% बढ़कर ₹4,130 करोड़ और Zerodha का बुक अगस्त तक ₹9,265 करोड़ रहा, जो उनकी कुल कमाई का लगभग 10% है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
मार्जिन ट्रेडिंग का सीधा मतलब है लिवरेज (Leverage), जो मुनाफे के साथ-साथ नुकसान को भी कई गुना बढ़ा देता है। चूंकि Nifty और Sensex अभी साल की शुरुआत के स्तर से नीचे चल रहे हैं, ऐसे में बाजार का रुख अनिश्चित है। अगर मार्केट में कोई बड़ी गिरावट आती है, तो निवेशकों को 'मार्जिन कॉल' का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में ब्रोकर या तो तुरंत अतिरिक्त फंड जमा करने को कहता है या फिर कर्ज चुकाने के लिए जबरन शेयर बेच देता है, जिससे निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सिस्टम में कर्ज का स्तर जिस तरह बढ़ रहा है, उसे देखते हुए यह देखना जरूरी होगा कि अस्थिर बाजार में ब्रोकरेज कंपनियां इन लोन की रिकवरी कैसे करती हैं। फिलहाल, ब्रोकरेज अपने रेवेन्यू को स्थिर रखने के लिए पूरी तरह ट्रांजैक्शन फीस से हटकर इस क्रेडिट मॉडल पर निर्भर होते जा रहे हैं।
