भारत में MTF का तूफ़ान! ₹1.2 लाख करोड़ का बाज़ार, पर रिस्क की चिंता बढ़ी

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AuthorNeha Patil|Published at:
भारत में MTF का तूफ़ान! ₹1.2 लाख करोड़ का बाज़ार, पर रिस्क की चिंता बढ़ी
Overview

भारतीय शेयर बाज़ार में मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) का दबदबा लगातार बढ़ रहा है। जनवरी 2026 तक, यह बाज़ार **₹1.2 लाख करोड़** के पार निकल गया है, जो पिछले साल के मुकाबले **43%** की ज़बरदस्त तेज़ी दिखाता है। यह ग्रोथ ग्राहकों की मांग और F&O पर लगे प्रतिबंधों के बीच हुई है, लेकिन अब बाज़ार में बढ़ते लेवरेज (कर्ज़) और संभावित सिस्टमैटिक रिस्क को लेकर चिंताएं भी बढ़ने लगी हैं।

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लेवरेज का बढ़ता जाल और रेगुलेटरी एक्शन

भारत में मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) का बाज़ार तेज़ी से फल-फूल रहा है, जिसने जनवरी 2026 तक ₹1.2 लाख करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 43% की भारी वृद्धि है। इस तेज़ी का मुख्य कारण ग्राहकों की ओर से बढ़ता आकर्षण और डेरिवेटिव्स (F&O) पर लगे कुछ प्रतिबंधों के चलते निवेशकों का कैश सेगमेंट में अधिक लेवरेज के साथ ट्रेड करना है।

प्रमुख डिजिटल ब्रोकर Groww ने अपने MTF पोर्टफोलियो में चार गुना वृद्धि देखी है, जो दिसंबर 2025 की तिमाही में ₹2,307 करोड़ तक पहुंच गया। वहीं, Angel One और Zerodha जैसे बड़े ब्रोकरेज फर्मों के MTF पोर्टफोलियो भी ₹4,000 करोड़ और ₹6,000 करोड़ से ज़्यादा के रहे हैं।

हालांकि, इस ग्रोथ के बीच, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने फरवरी 2026 में बैंकों द्वारा ब्रोकरों को MTF के लिए लोन देने पर कुछ पाबंदियां लगाई थीं। इसके बावजूद, ब्रोकरेज फर्मों ने अपनी पकड़ मज़बूत रखी है। वे मुख्य रूप से अपनी आंतरिक कमाई (internal accruals), मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) से फंड जुटा रही हैं, जिन पर RBI के निर्देशों का सीधा असर कम है। Angel One के ग्रुप CFO, विनीत अग्रवाल ने भी इस बात की पुष्टि की है।

सेबी (SEBI) भी इस सेगमेंट को और सुरक्षित बनाने के लिए सक्रिय है। इसी कड़ी में, सेबी ने MTF ऑपरेट करने वाले ब्रोकरों के लिए न्यूनतम नेट-वर्थ (net-worth) की ज़रुरत को ₹3 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने का प्रस्ताव दिया है, ताकि वित्तीय मज़बूती बढ़ाई जा सके और निवेशकों के हितों की रक्षा हो सके।

बाज़ार का प्रदर्शन और ब्रोकरेज पर असर

भारतीय इक्विटी बाज़ार का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। जहां Nifty 50 ने 2025 में 10.5% का उछाल दर्ज किया, वहीं 2026 के जनवरी महीने में यह एक दशक में अपने सबसे खराब प्रदर्शन में से एक रहा, जो भू-राजनीतिक तनावों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के पैसे निकालने के कारण 3.10% गिरा।

बाज़ार की इस अस्थिरता के विपरीत, MTF सेगमेंट में लेवरेज लगातार बढ़ रहा है। नियामक खबरों के कारण फरवरी 2026 के मध्य में Angel One के शेयर में 9.5% की गिरावट आई थी। इसके बावजूद, विश्लेषकों का Angel One पर भरोसा कायम है, और ज़्यादातर 'Buy' रेटिंग के साथ ₹3,075 का टारगेट प्राइस दे रहे हैं, जो मौजूदा स्तर से 23% से अधिक की संभावित तेज़ी दिखाता है। ब्रोकरेज का मूल्यांकन अब 'फेयर' ज़ोन में है, और P/E रेश्यो 29.74 हो गया है।

वहीं, नवंबर 2025 में लिस्ट हुई Groww के शेयर में तेज़ी जारी है। विश्लेषकों का 'Buy' रेटिंग के साथ ₹190 का टारगेट है, जो उनके बढ़ते MTF बुक साइज और नए प्रोडक्ट्स लॉन्च से प्रेरित है। Groww ने Q3 FY26 में रेवेन्यू में 16% की वृद्धि कर ₹1,261 करोड़ दर्ज किए, हालांकि बढ़ी हुई लागतों के कारण नेट प्रॉफिट 28% घटकर ₹547 करोड़ रह गया। Q3 FY26 में MTF सेगमेंट में Groww की मार्केट हिस्सेदारी बढ़कर 2% हो गई, जो पिछले साल 0.7% थी।

सिस्टमैटिक रिस्क की आशंका

MTF सेगमेंट में लेवरेज पर बढ़ती निर्भरता, खासकर ऐसे बाज़ार में जहाँ लंबे समय से बड़ी तेज़ी नहीं देखी गई है, एक बड़ा सिस्टमैटिक रिस्क पैदा करती है। Zerodha के फाउंडर, नितिन कामत ने बार-बार आगाह किया है कि इंडस्ट्री का MTF बुक साइज़ पांच गुना बढ़ गया है, जबकि ब्रोकरों के रिस्क मैनेजमेंट मॉडल में वैसी मज़बूती नहीं आई है।

भले ही ब्रोकर आंतरिक फंड से MTF को सपोर्ट कर रहे हैं, लेकिन अगर यही ग्रोथ रेट बिना बैंक फंडिंग के जारी रहा तो यह टिकाऊ नहीं होगा और ग्राहकों के लिए फंड की लागत बढ़ सकती है। बाज़ार में अचानक 20-30% की गिरावट आने पर, मौजूदा हाई लेवरेज के कारण सिंक्रोनाइज्ड लिक्विडेशन (एक साथ भारी बिकवाली) का खतरा है, जो निवेशकों और ब्रोकर की बैलेंस शीट, दोनों को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।

बाज़ार में पैसे की कमी (tight liquidity) और शॉर्ट-सेलिंग की सीमित संभावना इस रिस्क को और बढ़ाती है। सेबी की नेट-वर्थ कैप्स वाली ज़रूरतें भी क्लाइंट्स के बड़े पैमाने पर डिफॉल्ट करने की स्थिति में पूर्ण सुरक्षा प्रदान नहीं कर पाएंगी। इसके अलावा, 2026 की शुरुआत में FPIs का लगातार पैसा निकालना और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बाज़ार की अस्थिरता को बढ़ा रही हैं, जिससे ऐसे जोखिम वाले परिदृश्य की संभावना बढ़ जाती है। सेबी द्वारा ब्रोकर नेट-वर्थ की ज़रूरतें बढ़ाना इन अंतर्निहित कमजोरियों के प्रति रेगुलेटरी की जागरूकता को दर्शाता है।

भविष्य की राह

रेगुलेटरी का शिकंजा कसता जा रहा है, ऐसे में Groww जैसी ब्रोकरेज फर्में कमोडिटी, लोन और वेल्थ मैनेजमेंट जैसे दूसरे क्षेत्रों में विविधीकरण (diversification) करके MTF पर संभावित दबाव से निपटने की कोशिश कर रही हैं। Angel One और Groww जैसे प्रमुख खिलाड़ियों के लिए विश्लेषकों का नज़रिया आम तौर पर सकारात्मक है, लेकिन इसे बाज़ार में बढ़ते लेवरेज और रेगुलेटरी जांच के परिदृश्य में देखना होगा। MTF की ग्रोथ कितनी टिकाऊ रहेगी, यह निवेशकों के लेवरेज के प्रति भूख और कैपिटल मार्केट की क्षमता के बीच संतुलन पर निर्भर करेगा कि वे किसी भी झटके को सिस्टमैटिक अस्थिरता पैदा किए बिना कैसे झेल पाते हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.