कॉर्पोरेट लोन में बंपर तेज़ी! कैपेक्स (Capex) रिवाइवल ने पकड़ी रफ्तार, 'इंडिया इंक' की डिमांड **13%** बढ़ी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
कॉर्पोरेट लोन में बंपर तेज़ी! कैपेक्स (Capex) रिवाइवल ने पकड़ी रफ्तार, 'इंडिया इंक' की डिमांड **13%** बढ़ी
Overview

भारत में कॉर्पोरेट लोन की मांग में ज़बरदस्त तेज़ी देखने को मिल रही है। लेंडर्स (Lenders) बता रहे हैं कि कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) और वर्किंग कैपिटल (Working Capital) की ज़रूरतें बढ़ने से अर्थव्यवस्था में रिवाइवल (Revival) आया है। ऑयल एंड गैस (Oil and Gas), इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure), मेटल्स (Metals) और पावर (Power) जैसे सेक्टर इस डिमांड को लीड कर रहे हैं। State Bank of India (SBI) और Axis Bank जैसे बड़े बैंकों ने भी अपने कॉर्पोरेट लोन पोर्टफोलियो में शानदार ईयर-ऑन-ईयर (Year-on-Year) ग्रोथ दर्ज की है, जो मज़बूत आर्थिक गतिविधियों का संकेत दे रहा है।

कॉरपोरेट लैंडिंग में बंपर तेज़ी: आर्थिक उम्मीदों को मिला सहारा

फाइनेंसियल सेक्टर के लेंडर्स (Lenders) कॉर्पोरेट क्रेडिट ग्रोथ में एक ज़बरदस्त उछाल देख रहे हैं। यह साफ़ तौर पर 'इंडिया इंक' (India Inc.) की इन्वेस्टमेंट (Investment) और वर्किंग कैपिटल (Working Capital) की बढ़ती ज़रूरत को दर्शाता है। इस ग्रोथ की मुख्य वजह ऑयल एंड गैस (Oil and Gas), इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure), मेटल्स (Metals) और पावर (Power) जैसे अहम सेक्टरों में कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) का फिर से शुरू होना है। इसके साथ ही, बड़ी नॉन-बैंक फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) से भी काफी डिमांड आ रही है। कुल मिलाकर, मज़बूत आर्थिक गतिविधियों (Economic Activity) की वजह से कंपनियां अपने ऑपरेशन्स बढ़ा रही हैं और ज़रूरी फाइनेंसिंग (Financing) जुटा रही हैं।

बड़े बैंक भी दिखा रहे हैं ज़बरदस्त ग्रोथ

प्रमुख वित्तीय संस्थानों (Financial Institutions) ने भी अपनी लेंडिंग (Lending) में तेज़ी दर्ज की है। देश के सबसे बड़े लेंडर State Bank of India (SBI) के कॉर्पोरेट लोन बुक में दिसंबर तिमाही में ईयर-ऑन-ईयर (Year-on-Year) 13.4% की ग्रोथ देखी गई, जो कि ₹13.33 लाख करोड़ तक पहुंच गया। यह पिछली तिमाही के 7.1% की ग्रोथ से एक बड़ा उछाल है। SBI के पास फिलहाल लगभग ₹8 लाख करोड़ का कॉर्पोरेट लोन पाइपलाइन (Loan Pipeline) है। प्राइवेट सेक्टर के बैंक भी पीछे नहीं हैं: HDFC Bank के ₹7.7 लाख करोड़ के कॉर्पोरेट लोन बुक में 10.3% की ग्रोथ दर्ज हुई, जो पिछली तिमाही के 6.4% से बेहतर है। Axis Bank ने अपने ₹3.75 लाख करोड़ के कॉर्पोरेट लोन बुक में शानदार 27% का एक्सपेंशन (Expansion) बताया है, जो सितंबर तिमाही के 20% ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ से काफी ज़्यादा है। वहीं, ICICI Bank के डोमेस्टिक कॉर्पोरेट पोर्टफोलियो (Domestic Corporate Portfolio) में 5.6% ईयर-ऑन-ईयर और 6.5% सीक्वेंशियली (Sequentially) ग्रोथ हुई है।

ट्रेड डील्स (Trade Deals) से बढ़ेगी आगे की रफ्तार

बैंकर्स का अनुमान है कि यह ग्रोथ का ट्रेंड (Growth Trajectory) और भी मज़बूत होगा। इसकी एक वजह कई ट्रेड एग्रीमेंट्स (Trade Agreements) के कारण बढ़ता एक्सपोर्ट (Export) परिदृश्य है। इन समझौतों से कैपेसिटी एडिशन (Capacity Addition) को बढ़ावा मिलने और क्रॉस-बॉर्डर सप्लाई चेन (Cross-border Supply Chains) को मज़बूती मिलने की उम्मीद है। SBI के चेयरमैन CS Setty ने कहा कि GST रैशनलाइज़ेशन (GST Rationalization) के बाद आर्थिक गतिविधियों में काफी सुधार आया है, जिससे वर्किंग कैपिटल यूटिलाइजेशन (Working Capital Utilization) बढ़ा है और विभिन्न सेक्टरों में लॉन्ग-टर्म लोन (Long-term Loans) की एक विज़िबल पाइपलाइन (Visible Pipeline) दिख रही है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आने वाले ट्रेड डील्स (Trade Deals) ग्लोबल वैल्यू चेन्स (Global Value Chains) से जुड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाएंगे।

बेंचमार्क लेंडिंग रेट्स (Benchmark Lending Rates) हुए स्टेबल

लेंडिंग मार्केट (Lending Market) में एक अहम बदलाव यह आया है कि बेंचमार्क्स (Benchmarks) स्टेबल हो गए हैं। अब ज़्यादातर लेंडिंग एक्सटर्नल बेंचमार्क-लिंक्ड रेट्स (External Benchmark-Linked Rates) पर हो रही है। इससे बरोअर्स (Borrowers) और लेंडर्स (Lenders) दोनों के लिए ट्रांसपेरेंसी (Transparency) और प्रेडिक्टिबिलिटी (Predictability) बढ़ी है। Axis Bank के विजय मुलबाग़ल (Vijay Mulbagal) ने ग्रोथ का श्रेय क्लाइंट एंगेजमेंट (Client Engagement) और फास्टर टर्नअराउंड टाइम (Faster Turnaround Times) को दिया है, खासकर पावर (Power), कॉर्पोरेट रियल एस्टेट (Corporate Real Estate) और डाइवर्सिफाइड कॉन्ग्लोमेरेट (Diversified Conglomerate) सेगमेंट में।

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