India Growth Story: मैन्युफैक्चरिंग और क्रेडिट बूम पर एक्सपर्ट्स की नजर, जानिए क्या है वजह

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
India Growth Story: मैन्युफैक्चरिंग और क्रेडिट बूम पर एक्सपर्ट्स की नजर, जानिए क्या है वजह

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ET NOW मार्केट समिट 2026 में देश के बड़े मार्केट एक्सपर्ट्स ने भारत के मैन्युफैक्चरिंग और क्रेडिट सेक्टर में ज़बरदस्त ग्रोथ की संभावना जताई है। बैंक क्रेडिट ग्रोथ **17%** से ऊपर है और ब्याज दरें स्थिर बनी हुई हैं, ऐसे में निवेशक देश के हाई-वैल्यू इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च की ओर बढ़ते रुझान पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।

क्या है खास?

इस हफ्ते ET NOW मार्केट समिट 2026 में, TRUST Group के उत्पल सेठ, Enam Holdings के श्रीधर सिवारम और Alchemy Capital Management के हिरन वेद जैसे प्रमुख मार्केट जानकारों ने भारत के अगले दशक के आर्थिक रोडमैप पर चर्चा की। एक्सपर्ट्स ने अगले 10 सालों के लिए तीन मुख्य ग्रोथ इंजन की पहचान की: बिजनेस एक्सपेंशन (कैपेक्स) पर लगातार खर्च, मजबूत क्रेडिट की मांग और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नई जान।

चर्चा में यह बात सामने आई कि भले ही ग्लोबल इकोनॉमी में उतार-चढ़ाव हो, लेकिन भारत की अपनी ग्रोथ रफ्तार मजबूत बनी हुई है। एक्सपर्ट्स ने उन सेक्टर्स पर पॉजिटिव व्यू रखा जो देश की प्राथमिकताओं जैसे एनर्जी सिक्योरिटी, डिफेंस और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट करते हैं। ये सेक्टर इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती जरूरत से भी जुड़े हैं, जो डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास के लिए जरूरी है।

मैन्युफैक्चरिंग और खर्च का बदलता नज़रिया

निवेशक इस बात पर खास ध्यान दे रहे हैं कि भारतीय कंपनियां कैसे खर्च कर रही हैं। पैनल ने बताया कि कंपनियां सिर्फ बेसिक कैपेसिटी बढ़ाने के बजाय अब ज्यादा वैल्यू वाले प्रोडक्ट्स की ओर बढ़ रही हैं। एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस और स्पेशलाइज्ड इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट जैसे इंडस्ट्रीज को इसका सीधा फायदा होने की उम्मीद है। पावर ग्रिड अपग्रेड और इंडस्ट्रियल हार्डवेयर बनाने वाली कंपनियां देश की बढ़ती इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस अगले कई सालों तक जारी रहेगा। ये कोई शॉर्ट-टर्म ट्रेंड नहीं है, बल्कि इंडस्ट्रियल प्रोसेस का आधुनिकीकरण और डोमेस्टिक प्रोडक्शन की ओर बढ़ना ही असली ग्रोथ इंजन बने रहेंगे।

क्रेडिट ग्रोथ का हाल

फाइनेंशियल सर्विसेज पर मार्केट की नजरें टिकी हुई हैं, जहां क्रेडिट ग्रोथ डबल-डिजिट में बनी हुई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के हालिया आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 तक बैंक क्रेडिट ग्रोथ लगभग 17.4% से 17.7% तक पहुंच गई थी। यह रिटेल और कॉर्पोरेट दोनों तरह के उधारकर्ताओं की ओर से लगातार मजबूत लोन डिमांड का संकेत है।

हालांकि, इस तेज ग्रोथ के साथ एक चुनौती भी है जिस पर निवेशक नजर रख रहे हैं: क्रेडिट ग्रोथ और डिपॉजिट ग्रोथ के बीच बढ़ता गैप। जहां लोन की मांग ज्यादा है, वहीं डिपॉजिट ग्रोथ उतनी तेजी से नहीं बढ़ रही है। इससे बैंकों के सामने लिक्विडिटी का संकट खड़ा हो सकता है, जिसे उन्हें मैनेज करना होगा। इस लेंडिंग की रफ्तार को बनाए रखने और फंडिंग प्रेशर से बचने के लिए बैंकों को एक हेल्दी क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो बनाए रखना जरूरी होगा।

ब्याज दरें और मैक्रो स्टेबिलिटी

मॉनेटरी पॉलिसी की बात करें तो एक्सपर्ट्स का मानना है कि RBI का मौजूदा रुख सही है। सेंट्रल बैंक ने जून 2026 की मीटिंग में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा और न्यूट्रल स्टैंड बनाए रखा। यह फैसला ग्लोबल एनर्जी और सप्लाई चेन में रुकावटों से पैदा होने वाले महंगाई के जोखिमों को संभालने और ग्रोथ को बनाए रखने के बीच एक संतुलन दर्शाता है।

निवेशकों के लिए, स्थिर ब्याज दरों का माहौल कंपनियों के लिए उधार लेने की लागत के बारे में कुछ स्पष्टता देता है। हालांकि, मैक्रो एनवायरमेंट कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव जैसे बाहरी कारकों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है, जिन पर RBI की कड़ी नजर है।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

जैसे-जैसे मार्केट इन लॉन्ग-टर्म थीम्स का मूल्यांकन कर रहा है, कुछ चीजें महत्वपूर्ण बनी रहेंगी। पहला, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का हाई-वैल्यू प्रोडक्शन ग्रोथ को बनाए रखने की क्षमता लंबी अवधि की प्रॉफिटेबिलिटी के लिए अहम होगी। दूसरा, निवेशकों को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि बैंक क्रेडिट डिमांड और डिपॉजिट ग्रोथ के बीच के गैप को कैसे मैनेज करते हैं, क्योंकि इससे बैंकिंग मार्जिन और लिक्विडिटी कंडीशन प्रभावित होंगी। अंत में, वैश्विक मूल्य दबावों पर RBI की मॉनेटरी पॉलिसी का विकास इक्विटी और क्रेडिट-सेंसिटिव सेक्टर्स के लिए सेंटिमेंट को प्रभावित करता रहेगा।

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Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.