Q4 2025 में खत्म हुई तिमाही के दौरान इंडिया के क्रेडिट मार्केट (Credit Market) ने अच्छी रफ़्तार पकड़ी, Credit Market Indicator (CMI) 97 से बढ़कर 102 पर पहुँच गया। इस ग्रोथ में गोल्ड लोन (Gold Loan) का सबसे बड़ा योगदान रहा, जो अब रिटेल लेंडिंग (Retail Lending) वॉल्यूम का 36% और वैल्यू का 39% बन चुका है। सोने के बढ़ते दामों के चलते लोगों ने अपने गहनों पर ज़्यादा लोन लिया, जिससे गोल्ड लोन का एवरेज साइज बढ़कर ₹1.9 लाख हो गया है, जो मार्च 2023 के मुकाबले करीब 1.8 गुना है। इस उछाल ने CMI के सप्लाई साइड (Supply Side) को काफी मजबूत किया है।
लेकिन इस तेज़ ग्रोथ के पीछे लेंडर्स (Lenders) की घबराहट भी बढ़ी है। फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशंस (Financial Institutions) अब 730 या उससे ज़्यादा CIBIL स्कोर वाले बरोअर्स (Borrowers) को ज़्यादा तवज्जो दे रहे हैं, ताकि अपने पोर्टफोलियो रिस्क (Portfolio Risk) को कम किया जा सके। इसका सीधा असर नए कस्टमर्स (New-to-Credit Customers) पर दिख रहा है, जिनका शेयर नए लोन में घटकर सिर्फ 16% रह गया है, जो दो साल पहले 22% हुआ करता था।
CMI का यह बढ़ा हुआ लेवल क्रेडिट हेल्थ (Credit Health) की मिली-जुली तस्वीर दिखाता है। जहां परफॉरमेंस सब-इंडेक्स (Performance Sub-index) दिसंबर 2025 में 107 पर पहुँचा, वहीं सप्लाई साइड (Supply Side) 98 पर रहा। हालांकि, गोल्ड लोन के बूम ने सप्लाई साइड को सहारा दिया। ओवरऑल रिटेल क्रेडिट ग्रोथ (Retail Credit Growth) ठीक ठाक है, लेकिन सुरक्षित लोन जैसे गोल्ड लोन की तरफ बढ़ता झुकाव, बिना गारंटी वाले, कंजम्पशन-ड्रिवन (Consumption-Driven) क्रेडिट से दूरी को दर्शाता है।
गोल्ड लोन अब छोटे ऑफर से निकलकर बड़े रिटेल क्रेडिट प्रोडक्ट बन गए हैं, जो साउथ इंडिया से लेकर नॉर्थ और वेस्ट तक फैल गए हैं। मार्च 2025 तक ऑर्गनाइज्ड गोल्ड लोन मार्केट (Organized Gold Loan Market) में पब्लिक सेक्टर बैंक्स (Public Sector Banks) की हिस्सेदारी 82% थी, हालांकि NBFCs (Non-Banking Financial Companies) भी तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं। उम्मीद है कि मार्च 2026 तक यह मार्केट ₹15 ट्रिलियन तक पहुँच जाएगा। सोने के बढ़ते दाम एक ही कोलैटरल (Collateral) पर बड़े लोन की सुविधा देते हैं, लेकिन प्राइस वोलैटिलिटी (Price Volatility) का रिस्क भी बढ़ाते हैं। इकोनॉमिक अनिश्चितता (Economic Uncertainty) के दौर में गोल्ड लोन हमेशा से एक स्टेबल ऑप्शन साबित हुआ है।
क्रेडिट मार्केट की सबसे बड़ी चिंता माइक्रो-LAP (Loan Against Property) सेगमेंट में बनी हुई है। दिसंबर 2025 में माइक्रो-LAP में 90+ दिनों की डिफ़ॉल्ट दर (Delinquency Rate) 3.1% तक पहुँच गई, जो पिछले साल से 35 बेसिस पॉइंट ज़्यादा है। एनालिस्ट्स (Analysts) के मुताबिक, बिना गारंटी वाले बिज़नेस लोन (Business Loans) और माइक्रो-LAP में डिफ़ॉल्ट बढ़ रहे हैं। गोल्ड लोन की ग्रोथ अगर सिर्फ कोलैटरल पर निर्भर करती है, तो उसमें भी रिस्क है। सोने के दामों में बड़ा उतार-चढ़ाव बरोअर्स के लिए मार्जिन कॉल (Margin Call) की स्थिति पैदा कर सकता है या उन्हें और कोलैटरल डालने की ज़रूरत पड़ सकती है।
एनालिस्ट्स (Analysts) NBFC सेक्टर (NBFC Sector) को लेकर थोड़ा पॉजिटिव हैं और FY26 में 15-17% ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं, जिसका कारण कंज्यूमर डिमांड (Consumer Demand) और गोल्ड लोन का बढ़ता फॉर्मलाइजेशन (Formalization) है। हालांकि, वे मानते हैं कि एसेट क्वालिटी (Asset Quality) पर नज़र रखनी होगी, खासकर अनसिक्योर्ड लेंडिंग (Unsecured Lending) और माइक्रोफाइनेंस (Microfinance) में। जहां बड़ा क्रेडिट मार्केट टिकाऊ दिख रहा है, वहीं गोल्ड लोन का बूम और माइक्रो-LAP जैसी कमजोर पॉकेट्स के बीच का अंतर यह दिखाता है कि मार्केट रिस्क प्रोफाइल (Risk Profile) के हिसाब से बंट रहा है। भविष्य की ग्रोथ उन्हीं बरोअर्स को मिलेगी जिनका क्रेडिट हिस्ट्री (Credit History) मज़बूत है, जबकि माइक्रो-LAP जैसे सेगमेंट्स को मज़बूत रिस्क मैनेजमेंट (Risk Management) की ज़रूरत पड़ेगी।