भारत का गोल्ड लोन मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें बड़ी NBFCs ने पारंपरिक कंपनियों को कड़ी चुनौती दी है। हालांकि, सोने की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी ने क्रेडिट में **84%** की उछाल लाई है, लेकिन जानकारों का मानना है कि **0.2%** का कम NPA आंकड़ा खतरे के संकेत छुपा सकता है।
भारत के गोल्ड लोन सेक्टर में बड़ा बदलाव दिख रहा है। अब सिर्फ Muthoot Finance और Manappuram Finance जैसे पुराने खिलाड़ियों का दबदबा नहीं रहा, बल्कि कई बड़ी NBFCs इस स्पेस में उतर आई हैं। फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस अब अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन के बजाय गोल्ड लोन को ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं।
सोने की कीमतों का खेल
इस ग्रोथ के पीछे सोने की कीमतों में आई भारी तेजी है। 2024 के मध्य में जो सोना ₹69,000 प्रति 10 ग्राम था, वह अब ₹1.54 लाख के आसपास ट्रेड कर रहा है। कीमतों में इस उछाल से कर्ज लेने वालों को ज्यादा लोन मिल रहा है, और लेंडर्स को भी सुरक्षा कवच मिल गया है।
NPA आंकड़ों का सच
सेक्टर में 0.2% का NPA अनुपात काफी आकर्षक दिखता है, लेकिन निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए। जानकार इसे 'डिनोमिनेटर इफेक्ट' कह रहे हैं, यानी लोन बुक का साइज बढ़ने से खराब लोन का प्रतिशत कम दिख रहा है। असल में, करीब 50% लोन 3 महीने से कम अवधि के हैं, जो बताता है कि लोग बार-बार सोना गिरवी रखकर अपनी लिक्विडिटी की कमी पूरी कर रहे हैं।
आगे क्या होगा?
अब तक इस सेक्टर की मुनाफाखोरी सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण सुरक्षित रही है। अगर सोने के दाम गिरते हैं या स्थिर होते हैं, तो लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेश्यो बिगड़ सकता है। निवेशकों के लिए अगली कुछ तिमाहियों में यह देखना अहम होगा कि क्या कंपनियां गिरती कीमतों के बीच भी अपने पोर्टफोलियो की क्वालिटी को बनाए रख पाती हैं।
