भारत में गोल्ड ज्वेलरी के बदले लिए जाने वाले लोन में जबरदस्त तेजी आई है। अगस्त 2026 तक यह आंकड़ा **83.2%** बढ़कर **₹5.6 लाख करोड़** पर पहुंच गया है। सोने की रिकॉर्ड कीमतों और औपचारिक लोन की बढ़ती मांग से यह सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है।
भारत के फॉर्मल गोल्ड लोन मार्केट में इस साल जोरदार तेजी देखने को मिली है। डेटा के अनुसार, अगस्त 2026 तक गोल्ड ज्वेलरी के खिलाफ लिए गए लोन में 83.2% की सालाना वृद्धि हुई है। यह बदलाव दर्शाता है कि कैसे छोटे कारोबारी और आम लोग अब अनौपचारिक साहूकारों के बजाय बैंकों और NBFCs की ओर रुख कर रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह सोने की कीमतों में आया उछाल है, जिससे लोगों को अपने गहनों के बदले बड़ी लोन राशि मिल रही है।
ग्रोथ की संभावनाएं (Growth Dynamics)
रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुमानों के मुताबिक, इस सेक्टर का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) मार्च 2028 तक ₹30 ट्रिलियन के पार जा सकता है। बैंकों और NBFCs के लिए यह बिजनेस इसलिए भी आकर्षक है क्योंकि यह पूरी तरह से सुरक्षित एसेट (सोना) पर आधारित है। बिजनेस लोन के मुकाबले इसमें डॉक्यूमेंटेशन कम होता है, इसलिए छोटे कारोबारी इसे वर्किंग कैपिटल की जरूरतों के लिए सबसे आसान जरिया मान रहे हैं।
रिस्क और निवेशकों के लिए चेतावनी (Market Monitorables)
तेजी के साथ-साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। सबसे बड़ी चिंता लोन के 'एंड-यूज' (End-use) को लेकर है। अब लोग गोल्ड लोन का इस्तेमाल बिजनेस के बजाय पर्सनल खर्चों (Consumption) के लिए ज्यादा कर रहे हैं, जो भविष्य में डिफॉल्ट का खतरा पैदा कर सकता है।
इसके अलावा, मार्केट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने मार्जिन पर दबाव डाल दिया है। लोन पाने के लिए कंपनियां ब्याज दरों को कम कर रही हैं, जिससे प्रॉफिटेबिलिटी प्रभावित हो सकती है। सबसे बड़ा रिस्क 'गोल्ड प्राइस वोलेटिलिटी' का है। यदि सोने की कीमतों में अचानक बड़ी गिरावट आती है, तो लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेशियो गड़बड़ा जाएगा, जिससे लेंडर्स को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। निवेशकों को आने वाले समय में कंपनियों के एसेट क्वालिटी और इंटरेस्ट मार्जिन पर कड़ी नजर रखनी होगी।
