भारतीय म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) के जरिए विदेशी बाजारों में निवेश करने वालों के लिए एक अहम मोड़ आया है। देश की म्यूचुअल फंड कंपनियों के लिए विदेशों में निवेश की कुल 7 अरब डॉलर की सीमा लगभग पूरी हो चुकी है। इस वजह से, ICICI Prudential AMC जैसी कई फंड हाउस अब अपने प्रमुख इंटरनेशनल फंड्स में नए निवेश को रोक रहे हैं।
इस नियम के कारण, निवेशकों का पैसा अब उन रास्तों की ओर मुड़ रहा है जहाँ ऐसी कोई सीमा नहीं है। ऐसे में, इंडिविजुअल निवेशकों के लिए 250,000 डॉलर प्रति वर्ष तक की राशि विदेश भेजने की सुविधा वाली Liberalised Remittance Scheme (LRS) और गिफ्ट सिटी (GIFT City) जैसे विकल्प काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए निवेशक सीधे विदेशी स्टॉक, ईटीएफ (ETFs) और बॉन्ड्स में निवेश कर सकते हैं, जिससे म्यूचुअल फंड की सीमा का झंझट खत्म हो जाता है। हालांकि, इन रास्तों में करंसी एक्सचेंज (Currency Exchange) और टैक्स (Tax) से जुड़े कुछ अतिरिक्त खर्चे और जटिलताएं आ सकती हैं, साथ ही भविष्य में इन रास्तों के रेगुलेशन (Regulation) में बदलाव का जोखिम भी बना रहता है।
दूसरी तरफ, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) अपनी को-लोकेशन (Colocation) सुविधाओं का भारी विस्तार कर रहा है। अगले तीन सालों में 4,000 से अधिक रैक्स की क्षमता हासिल करने के लिए एक्सचेंज करीब ₹520-550 करोड़ का निवेश कर रहा है। इस कदम से हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग (High-Frequency Trading) करने वाले ब्रोकर्स और ट्रेडिंग फर्म्स को और भी तेज एक्सेस मिलेगा। NSE का लक्ष्य है कि वह अपने मार्केट शेयर को 90% से ऊपर बनाए रखे और ट्रेडिंग वॉल्यूम को और बढ़ाए, खासकर डेरिवेटिव्स (Derivatives) सेगमेंट में। हालांकि, NSE का यह बड़ा निवेश (Investment) ऐसे समय में है जब वह पहले से ही ब्रोकरेज (Brokerage) और को-लोकेशन (Colocation) सेवाओं में 90% से अधिक मार्केट शेयर रखता है। ऐसे में, इस भारी-भरकम कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) से मिलने वाले रिटर्न पर भी सवाल उठ सकते हैं, खासकर अगर बाजार की ग्रोथ धीमी पड़ जाए या प्रतिस्पर्धी दबाव बढ़े।
बाजार में रिटेल निवेशकों (Retail Investors) की तादाद 11 करोड़ से ऊपर पहुंच गई है, लेकिन इस बढ़ोतरी के टिकाऊ होने पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। खासकर युवा निवेशकों में डेरिवेटिव्स (Derivatives) जैसे जटिल और जोखिम भरे प्रोडक्ट्स के प्रति बढ़ता रुझान चिंताजनक है। ऐसे प्रोडक्ट दोनों तरफ - फायदा और नुकसान - को कई गुना बढ़ा देते हैं। ऐसे में, ऐसे निवेशक जिन्होंने सिर्फ तेजी का दौर देखा है, बाजार में किसी बड़ी गिरावट की स्थिति में अपनी पूंजी को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा, कई अनरजिस्टर्ड 'फिनफ्लुएंसर्स' (Finfluencers) द्वारा दी जाने वाली गलत या भ्रामक सलाह निवेशकों को बड़े कर्ज़े में फंसा सकती है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह नया निवेशक वर्ग बाजार की बड़ी गिरावटों का सामना कैसे करता है।