Gen Z का क्रेडिट पर फोकस: बढ़ती खपत या कर्ज का जाल?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Gen Z का क्रेडिट पर फोकस: बढ़ती खपत या कर्ज का जाल?

भारत में युवा पीढ़ी (Gen Z) अब अपनी जरूरतों और खर्चों के लिए क्रेडिट और EMI का इस्तेमाल बढ़ा रही है। हालिया स्टडी के मुताबिक, इससे उनकी वित्तीय सेहत अच्छी दिख रही है, लेकिन यह बढ़ते कर्ज और संभावित 'डेट ट्रैप' की चिंताएं भी बढ़ा रहा है, जिस पर निवेशकों को पैनी नजर रखनी होगी।

Gen Z की बदलती सोच

'द ग्रेट इंडियन वॉलेट 2026' (The Great Indian Wallet 2026) रिपोर्ट के अनुसार, भारत में एक नई पीढ़ी यानी Gen Z अपनी जीवनशैली और जरूरी खर्चों के लिए क्रेडिट कार्ड और ईएमआई (EMI) पर ज्यादा भरोसा कर रही है। इस बदलाव के चलते फाइनेंशियल वेल-बीइंग इंडेक्स (Financial Well-Being Index) 40 अंकों पर पहुंच गया है, जो 2023 के बाद का उच्चतम स्तर है।

स्टडी बताती है कि 64% Gen Z युवा बड़े खर्चों के लिए क्रेडिट टूल्स का इस्तेमाल करने में आत्मविश्वास महसूस करते हैं। साथ ही, 87% लोग मानते हैं कि उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। मजेदार बात यह है कि Millennials और Gen X की तुलना में Gen Z अभी कम पारिवारिक जिम्मेदारियां उठा रही है, जिसकी वजह से उनकी बचत दर भी अच्छी है।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

निवेशकों के लिए यह ट्रेंड मिला-जुला असर दिखाता है। एक तरफ, क्रेडिट प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग बैंकों और एनबीएफसी (NBFCs) के लिए ग्रोथ का बड़ा जरिया बन रही है। युवा ग्राहक डिजिटल लेंडिंग, 'बाय नाउ, पे लेटर' (BNPL) और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल जितनी जल्दी शुरू कर रहे हैं, उतनी ही तेजी से असुरक्षित कर्ज (unsecured lending) का वॉल्यूम भी बढ़ रहा है। यह 'क्रेडिट-फर्स्ट' एप्रोच कंजम्पशन को बढ़ावा दे रही है और रिटेल लेंडिंग बूम का मुख्य कारण बन रही है।

बढ़ते जोखिमों पर डालें नजर

हालांकि, इस तेज ग्रोथ के साथ बड़े जोखिम भी जुड़े हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी कंजम्पशन-आधारित असुरक्षित कर्जों में हो रही तेज बढ़ोतरी पर चिंता जता चुका है। वित्तीय क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती कर्ज की ग्रोथ को एसेट क्वालिटी (asset quality) के साथ संतुलित रखना है। ट्रांसयूनियन सिबिल (TransUnion CIBIL) जैसे इंडस्ट्री सोर्स बताते हैं कि 'न्यू-टू-क्रेडिट' (New-To-Credit) ग्राहकों में इस युवा वर्ग की बड़ी हिस्सेदारी है। इससे यह चिंता बढ़ जाती है कि कहीं वे अपनी लंबी अवधि की भुगतान क्षमता से ज्यादा खर्च तो नहीं कर रहे।

मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि जहां क्रेडिट की सुविधा धन निर्माण और बिजनेस बढ़ाने में मदद करती है, वहीं यह सावधानी से न संभाला जाए तो 'डेट ट्रैप' (debt trap) का कारण भी बन सकता है। खास वित्तीय पड़ावों तक पहुंचने से पहले ही कंजम्पशन के लिए उधार लेने की आदत डिफॉल्सी रेट (delinquency rates) बढ़ा सकती है। हाल के इंडस्ट्री डेटा यह भी बताते हैं कि युवा वर्ग में डिफॉल्सी रेट्स पर ही लेंडर्स का फोकस है, क्योंकि असुरक्षित क्रेडिट तक जल्दी पहुंच उन्हें आर्थिक मंदी के दौरान ज्यादा कर्ज लेने के लिए प्रेरित कर सकती है।

आगे क्या देखना होगा?

निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात क्रेडिट क्वालिटी पर नजर रखना होगा। भले ही लोन ग्रोथ के आंकड़े अच्छे दिखें, लेकिन इस ट्रेंड की निरंतरता इस बात पर निर्भर करेगी कि लेंडर्स जोखिम का प्रबंधन कैसे करते हैं। निवेशकों को भविष्य की अर्निंग रिपोर्ट्स और क्रेडिट अपडेट्स पर गौर करना चाहिए ताकि पता चल सके कि बढ़ती क्रेडिट मांग से बैड लोंस बढ़ रहे हैं या नहीं, या फिर लेंडर्स इस युवा, क्रेडिट-चाहने वाले वर्ग के जोखिम प्रोफाइल को सफलतापूर्वक संभाल पा रहे हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.