क्यों विदेशी कंपनियां भारत की ओर खिंची चली आ रही हैं?
भारत की गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (GIFT City) इन दिनों ग्लोबल कॉर्पोरेट ट्रेजरी ऑपरेशन्स के लिए एक हॉट डेस्टिनेशन बन गया है। अडानी ग्रुप, भारती एयरटेल, जेनपैक्ट, ZF Friedrichshafen और आर्सेलर मित्तल जैसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियाँ अब अपना ट्रेजरी का काम यहीं से संभाल रही हैं। पहले ये कंपनियाँ सिंगापुर या नीदरलैंड्स जैसे देशों में थीं। गिफ्ट सिटी में आने की सबसे बड़ी वजह यहाँ मिलने वाली टैक्स में भारी छूट, सस्ती फंडिंग और विदेश में डिविडेंड या अतिरिक्त कैश भेजने पर बहुत कम टैक्स लगना है। साथ ही, फॉरेन करेंसी एसेट्स रखने की सुविधा से रुपये के उतार-चढ़ाव का जोखिम भी कम हो जाता है।
इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक, अगले 3 महीनों में 17 कॉर्पोरेट ट्रेजरी सेंटर्स यहाँ अपनी सेवाएं शुरू करने वाले हैं। यह कदम भारत सरकार के उस लक्ष्य को भी पूरा करता है जिसके तहत देश की कंपनियों के अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रवाह पर बेहतर नियंत्रण और निगरानी रखी जा सके।
गिफ्ट सिटी: भारत का उभरता हुआ फाइनेंशियल पावरहाउस
GIFT City, भारत का पहला स्मार्ट सिटी और इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC), तेज़ी से विकसित होकर सिंगापुर और दुबई जैसे बड़े वित्तीय केंद्रों को सीधी टक्कर दे रहा है। 2015 में लॉन्च हुई इस सिटी का मकसद दुनिया के बड़े वित्तीय केंद्रों जैसे लंदन और न्यूयॉर्क के मानकों को छूना था। 2020 में इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) के गठन ने एक सिंगल रेगुलेटरी सिस्टम लाकर काम को बहुत आसान बना दिया। हाल ही में टैक्स हॉलिडे को 20 साल तक बढ़ाने और बैंकों को चालू खातों पर ब्याज देने की प्रक्रिया को सुगम बनाने जैसे कदमों ने इसकी अपील को और भी मज़बूत किया है।
सिंगापुर और दुबई को सीधी टक्कर!
अगर टैक्स एफिशिएंसी की बात करें, तो गिफ्ट सिटी कई मायनों में आगे है। यहाँ 10 साल तक 100% टैक्स एग्जंप्शन मिलता है, कुछ सिक्योरिटीज पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता और अन्य लेवीज़ भी काफी कम हैं। इसकी तुलना में, सिंगापुर का कॉर्पोरेट टैक्स लगभग 17% है, जबकि दुबई के फ्री जोन अब 9% कॉर्पोरेट टैक्स लागू कर रहे हैं।
हालाँकि सिंगापुर क्रॉस-बॉर्डर टैक्स ट्रीटीज़ में आगे है और दुबई वेल्थ मैनेजमेंट में, लेकिन गिफ्ट सिटी भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था तक सीधी पहुँच और कम ऑपरेटिंग एक्सपेंस का लाभ देता है। टैलेंट पूल भी काफी मज़बूत है, जो ग्लोबल फंड्स और फिनटेक फर्मों को आकर्षित कर रहा है। ग्लोबल फाइनेंशियल सेंटर्स इंडेक्स (GFCI) में गिफ्ट सिटी लगातार ऊपर चढ़ रहा है और मार्च 2025 तक यह 46वें स्थान पर पहुँचने का अनुमान है। IFSCA को उम्मीद है कि अगले साल ट्रेजरी सेंटर्स की मांग दोगुनी या तिगुनी हो सकती है।
चुनौतियाँ और आगे का रास्ता
अपनी तेज़ तरक्की के बावजूद, गिफ्ट सिटी को स्थापित वित्तीय केंद्रों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जिन्होंने सालों से निवेशकों का भरोसा जीता है। सिंगापुर इनोवेशन और रेगुलेटरी टेक्नोलॉजी में अभी भी आगे है। गिफ्ट सिटी के टैक्स इंसेंटिव बड़े हैं, लेकिन इनका स्थायी प्रभाव और बदलते ग्लोबल फाइनेंशियल नियमों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी। किसी भी तरह की रेगुलेटरी अनिश्चितता, जो IFSCA के आने से काफी कम हुई है, फिर भी निवेशक के भरोसे को प्रभावित कर सकती है।
साथ ही, लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड और टैलेंट की ज़रूरत भी एक बड़ी चुनौती है। गिफ्ट सिटी के हाइब्रिड रेगुलेटरी मॉडल की असली परीक्षा इसके बढ़ने के साथ ही होगी, खासकर तब जब इसकी तुलना स्थापित और भरोसेमंद प्रणालियों से की जाएगी। अधिक मल्टीनेशनल कंपनियों को आकर्षित करने से इंफ्रास्ट्रक्चर और सेवाओं पर दबाव बढ़ेगा, जिसके लिए सावधान प्रबंधन की ज़रूरत है। आर्सेलर मित्तल जैसी कंपनियों के लिए ट्रेजरी ऑपरेशन्स स्थापित करना भारत की सामान्य आर्थिक स्थितियों और रेगुलेटरी स्पष्टता पर भी निर्भर करेगा, जो बदल सकती हैं।
भविष्य का नज़ारा
GIFT City में ट्रेजरी ग्रोथ की मुख्य वजह ग्लोबल ट्रेंड्स हैं जो हाइब्रिड ट्रेजरी मॉडल को बढ़ावा दे रहे हैं। इनमें बढ़ती ब्याज दरों और ग्लोबल डिवीज़न के बीच सेंट्रल ओवरसाइट और रीजनल फ्लेक्सिबिलिटी का मिश्रण होता है। भारत सरकार और रेगुलेटर्स ग्लोबल/रीजनल कॉर्पोरेट ट्रेजरी सेंटर्स (GRCTCs) के लिए नियमों को स्पष्ट करने और प्रक्रिया को आसान बनाने पर काम कर रहे हैं। यह गिफ्ट सिटी को इंटरनेशनल फाइनेंस के लिए एक टॉप चॉइस बनाने की मज़बूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जैसे-जैसे मल्टीनेशनल कॉरपोरेशन्स अपने कैपिटल और रिस्क मैनेजमेंट पर फिर से विचार कर रही हैं, गिफ्ट सिटी ग्लोबल ट्रेजरी बिज़नेस का एक बड़ा हिस्सा हासिल करने के लिए तैयार है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय क्षेत्र में भारत की स्थिति और मज़बूत होगी।
