Global Fintech Fest 2026 में भारत के फिनटेक सेक्टर ने Agentic AI की ओर रुख किया है। अब बैंकिंग सिस्टम में इंसानी दखल कम होगा और AI खुद फैसले लेगा, लेकिन रेगुलेटरी चुनौतियों और रेवेन्यू मॉडल को लेकर अभी भी चिंताएं बनी हुई हैं।
भारत का फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी (Fintech) सेक्टर एक बड़े बदलाव की दहलीज पर है। मुंबई में आयोजित Global Fintech Fest 2026 में दिग्गज लीडर्स और पॉलिसीमेकर्स ने Unified Payments Interface (UPI) की सफलता से आगे बढ़कर Agentic AI के एकीकरण पर जोर दिया है। इसका सीधा मकसद बैंकिंग को ट्रांजेक्शन से हटाकर ऑटोनॉमस फैसलों की ओर ले जाना है, जहाँ AI खुद कर्जदारों के रिस्क का आंकलन करेगा और रियल-टाइम में फ्रॉड को रोकेगा।
पेमेंट्स से आगे की तैयारी
भारतीय फिनटेक की कहानी अब तक केवल डिजिटल पेमेंट्स तक सीमित रही है। हालांकि यह इंफ्रास्ट्रक्चर करोड़ों लोगों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ चुका है, लेकिन अब वक्त है वैल्यू चेन में ऊपर उठने का। बिना मानवीय हस्तक्षेप के जटिल कार्यों को पूरा करने वाले ऑटोनॉमस सिस्टम से लोन अप्रूवल और साइबर सुरक्षा की रफ्तार कई गुना बढ़ जाएगी।
रेगुलेटरी और सुरक्षा का पेच
ऑटोनॉमस सिस्टम के साथ नए जोखिम भी सामने आ रहे हैं। Reserve Bank of India (RBI) के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि AI के गलत फैसले या वित्तीय नुकसान के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए। इसके अलावा, एल्गोरिदमिक बायस (Algorithmic Bias) और नए तरह के साइबर हमलों का खतरा भी इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी चुनौती है।
मुनाफे की चुनौती
सबसे बड़ा सवाल है कि कंपनियां इस महंगी तकनीक के लिए पैसा कहां से लाएंगी? 2020 से ही UPI ट्रांजेक्शन पर Merchant Discount Rate (MDR) नहीं है, जिससे पेमेंट प्रोवाइडर्स का रेवेन्यू सीमित है। अब जब कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश कर रही हैं, तो निवेशकों की नजर इस बात पर है कि वे कैसे फी-बेस्ड रेवेन्यू के अलावा नए बिजनेस मॉडल तैयार करती हैं।
आगे क्या होगा?
अब बाजार की नजरें रेगुलेटर्स की नई गाइडलाइंस पर टिकी हैं। विशेष रूप से AI ओवरसाइट, जवाबदेही (Liability), और डेटा गवर्नेंस को लेकर आने वाले नियम ही तय करेंगे कि भारत का फिनटेक भविष्य किस दिशा में बढ़ेगा।
