India’s Financial Billionaires: डिजिटल दौर में रईसों की नई लिस्ट, ट्रेडिशनल बैंकिंग को मिली चुनौती

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
India’s Financial Billionaires: डिजिटल दौर में रईसों की नई लिस्ट, ट्रेडिशनल बैंकिंग को मिली चुनौती

भारत के फाइनेंशियल सेक्टर के 15 परिवारों के पास कुल **$65 बिलियन** से ज्यादा की दौलत है। नई रिपोर्ट के मुताबिक अब पैसा कमाने का तरीका बदल रहा है, जहां ट्रेडिशनल लेंडिंग की जगह डिजिटल-फर्स्ट मॉडल तेजी से ले रहे हैं, हालांकि हाई लेवरेज और रेगुलेटरी दबाव चिंता का विषय हैं।

ब्लूमबर्ग की हालिया रिपोर्ट 'India Finance Rich List' ने भारतीय वित्तीय जगत में आए बड़े बदलावों को उजागर किया है। कुल 15 परिवारों के पास $65 बिलियन से ज्यादा की संपत्ति है। हालांकि उदय कोटक जैसे दिग्गज अभी भी टॉप पर हैं, लेकिन अब बाजार का झुकाव ट्रेडिशनल बैंकिंग से हटकर रिटेल-केंद्रित और डिजिटल फाइनेंशियल सर्विसेज की तरफ तेजी से बढ़ा है।

डिजिटल और रिटेल फाइनेंस का दबदबा

शेयर बाजार में बढ़ती भागीदारी और इंस्टेंट क्रेडिट की मांग ने पूरे बिजनेस मॉडल को बदल दिया है। ज़ेरोधा (Zerodha), जिसे कामथ बंधु चलाते हैं, इस डिजिटल क्रांति का चेहरा बन चुका है। कंपनी ने 2026 फाइनेंशियल ईयर में ₹4,283 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया है, जो पिछले साल के मुकाबले 1.2% की मामूली बढ़त दिखाता है, लेकिन यह एक स्थिर बिजनेस मॉडल की पुष्टि करता है। वहीं, सचिन बंसल की कंपनी 'Navi' ने अगस्त 2026 में Prosus से $100 मिलियन की फंडिंग जुटाई है, जो डिजिटल लेंडिंग में निवेशकों का भरोसा दिखाता है।

जोखिम और बाजार की हकीकत

तेजी से बढ़ती इस वेल्थ के साथ कई खतरे भी जुड़े हैं। नया बिजनेस मॉडल रिटेल एक्टिविटी पर टिका है, जिससे ये कंपनियां बाजार में गिरावट और सख्त नियमों के प्रति संवेदनशील हो गई हैं।

खासकर मार्जिन ट्रेडिंग फंडिंग (MTF) का बढ़ता बुक साइज चिंताजनक है। ज़ेरोधा का MTF बुक ₹9,000 करोड़ तक पहुंच गया है। खुद सीईओ नितिन कामथ ने माना है कि उधार के पैसे (borrowed money) के साथ ट्रेडिंग करना बाजार के बिगड़ने पर लिक्विडिटी की समस्या पैदा कर सकता है। दूसरी तरफ, पिरामल फाइनेंस (Piramal Finance) जैसे ट्रेडिशनल खिलाड़ी अपने लोन बुक पर फोकस कर रहे हैं, जिन्होंने 2026 की दूसरी तिमाही में 24% की रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है।

फिलहाल, पूरा सेक्टर रेगुलेटर्स की रडार पर है। पारदर्शिता और कंज्यूमर डेट को लेकर सरकार की सख्ती बढ़ रही है। ऐसे में वही कंपनियां टिकेंगी जो कर्ज के स्तर को काबू में रखेंगी और बदलते नियमों के साथ खुद को ढालेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.