Fertilizer Subsidy: सरकार का खजाना खाली! 4 महीने में ही खत्म हुआ सालाना बजट का **56%**

BANKINGFINANCE
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
Fertilizer Subsidy: सरकार का खजाना खाली! 4 महीने में ही खत्म हुआ सालाना बजट का **56%**

सरकार के फर्टिलाइजर सब्सिडी बजट पर दबाव बढ़ गया है। वित्त वर्ष के केवल चार महीनों में ही कुल **₹1.71 लाख करोड़** के बजट का **56%** हिस्सा खर्च हो चुका है, जो सरकार की चिंता बढ़ा रहा है।

सब्सिडी का गणित और चुनौती

आंकड़ों पर नजर डालें तो इस फाइनेंशियल ईयर के शुरुआती साढ़े चार महीनों में ही सरकार ने लगभग ₹99,000 करोड़ फर्टिलाइजर सब्सिडी के रूप में जारी कर दिए हैं। यह कुल बजट का 56% है, जो बताता है कि कमोडिटी मार्केट की अस्थिरता का असर कितना गहरा है।

क्यों बढ़ रहा है खर्च?

यूरिया की कीमतें तो ग्लोबल मार्केट में 60% तक गिरी हैं, लेकिन असली परेशानी DAP (Di-ammonium phosphate) और MOP (Muriate of Potash) से आ रही है। इन न्यूट्रिएंट्स की ग्लोबल कीमतों में 10% से 15% तक का इजाफा हुआ है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इम्पोर्ट करता है, इसलिए किसानों को सस्ती दरों पर खाद मुहैया कराने के लिए सरकार को भारी-भरकम अंतर (gap) चुकाना पड़ रहा है।

कंपनियों पर असर

इस संकट का सीधा असर Coromandel International और Gujarat State Fertilizers and Chemicals (GSFC) जैसी कंपनियों पर पड़ सकता है। अमोनिया और सल्फर जैसे कच्चे माल की ऊंची कीमतें इनके प्रॉफिट मार्जिन को दबा रही हैं। अगर ग्लोबल स्तर पर कीमतों में नरमी नहीं आई, तो कंपनियों के लिए अपनी ऑपरेशनल कॉस्ट मैनेज करना मुश्किल होगा।

सरकारी खजाने पर क्या होगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो सरकार का खर्च अनुमान से ₹15,000 करोड़ से ₹20,000 करोड़ तक बढ़ सकता है। यह फिस्कल डेफिसिट के लिहाज से एक बड़ा रिस्क है। आने वाले समय में सरकार की मिड-ईयर बजट समीक्षा और सब्सिडी आवंटन पर मार्केट की नजरें टिकी रहेंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.