भारत में अब प्रोफेशनल फैमिली ऑफिस का चलन तेजी से बढ़ रहा है। बीते 6 सालों में इनकी संख्या **45** से बढ़कर **300** के पार पहुंच गई है, जो कुल मिलाकर **$30 बिलियन** से ज्यादा की संपत्ति संभाल रहे हैं।
प्रोफेशनल मैनेजमेंट की ओर बढ़ते कदम
भारत के अमीर परिवारों के लिए अब पैसा सिर्फ बढ़ाना काफी नहीं है, उसे मैनेज करना भी एक बड़ी प्राथमिकता बन गया है। साल 2026 तक देश में 300 से अधिक समर्पित फैमिली ऑफिस हो चुके हैं। इसकी मुख्य वजह है बिजनेस से एग्जिट, आईपीओ (IPO) और कमाई के नए जरियों का बढ़ना। अब परिवार 'एड-हॉक' निवेश को छोड़कर प्रोफेशनल गवर्नेंस मॉडल अपना रहे हैं।
चार्टबुक के चौंकाने वाले आंकड़े
Ionic Wealth की सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले दशक में खरबों डॉलर की संपत्ति का हस्तांतरण अगली पीढ़ी में होगा। युवा पीढ़ी (मिलेनियल्स और जेन Z) अब पुरानी 'पैसिव वेल्थ प्रिजर्वेशन' तकनीक के बजाय 'स्ट्रेटेजिक कैपिटल एलोकेशन' पर जोर दे रही है।
एडवाइस गैप और चुनौतियां
भारत में अभी भी प्रोफेशनल सलाहकारों के पास केवल 15% पारिवारिक संपत्ति ही मैनेज होती है, जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा 50% के करीब है। बड़ी चुनौती यह है कि केवल 20% फैमिली ऑफिस के पास ही स्पष्ट उत्तराधिकार या ट्रस्ट स्ट्रक्चर मौजूद हैं। इसके अलावा, प्राइवेट इक्विटी और स्टार्टअप्स जैसे 'अल्टरनेटिव एसेट्स' में निवेश करने से लिक्विडिटी रिस्क भी बढ़ गया है।
छोटे परिवारों के लिए नया ट्रेंड
जिन परिवारों के पास ₹5 करोड़ से ₹50 करोड़ की संपत्ति है, उनके लिए पूरा फैमिली ऑफिस बनाना महंगा पड़ता है। ऐसे में वे 'फैमिली ऑफिस प्रिंसिपल्स' अपना रहे हैं, जिसमें कंसोलिडेटेड रिपोर्टिंग और टैक्स प्लानिंग के जरिए बिना ज्यादा खर्च किए प्रोफेशनल अनुशासन लाया जा रहा है।
