एजुकेशन लोन की मांग में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब छोटे शहरों के स्टूडेंट्स करियर-उन्मुख कोर्स के लिए ज्यादा अप्लाई कर रहे हैं। Kuhoo Finance प्लेटफॉर्म पर **86.5%** आवेदन टियर II और III शहरों से आए हैं।
भारत में एजुकेशन फाइनेंसिंग (Education Financing) के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव साफ नजर आ रहा है। अब छोटे शहरों के छात्र अपने करियर के सपनों को पूरा करने के लिए ज्यादा एजुकेशन लोन ले रहे हैं। Kuhoo Finance के हालिया डेटा के अनुसार, जनवरी 2025 से जुलाई 2026 के बीच आए कुल आवेदनों में से 86.5% टियर II और III शहरों से थे। यह दिखाता है कि उच्च शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट की चाहत अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है।
नौकरी-केंद्रित कोर्स की बढ़ती मांग
छात्र क्या पढ़ रहे हैं, इसका पैटर्न भी बदल रहा है। जॉब-ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए फाइनेंसिंग ने लोन बांटने में सबसे बड़ा हिस्सा (41.7%) लिया, इसके बाद 29% के साथ MBA प्रोग्राम्स रहे। इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे अन्य कोर्स का हिस्सा कम रहा। यह ट्रेंड बताता है कि छात्र और उनके परिवार ऐसे एजुकेशन पाथ को प्राथमिकता दे रहे हैं जो सीधे, मापे जा सकने वाले करियर रिजल्ट दें और जल्दी नौकरी दिला सकें।
भौगोलिक विस्तार
मांग के मामले में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सबसे आगे रहे, जिन्होंने देश के कुल आवेदनों में क्रमशः 12.87% और 12.52% का योगदान दिया। कर्नाटक, बिहार और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी काफी हलचल देखी गई, जो दर्शाता है कि उच्च शिक्षा की ललक एक राष्ट्रव्यापी घटना है।
निवेशकों के लिए जानकारी और सेक्टर के रिस्क
फाइनेंशियल सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए, यह ट्रेंड बताता है कि बैंक और नॉन-बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनी (NBFCs) कहां ग्रोथ के अवसर पा सकते हैं। हालांकि, छोटे शहरों में विस्तार करने की अपनी चुनौतियाँ हैं। एजुकेशन लेंडिंग एक रिटेल एसेट क्लास है जिसमें नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) का रेशियो ज्यादा हो सकता है। जब लोन खराब हो जाते हैं, तो पैसा वसूलना मुश्किल हो सकता है, खासकर अनसिक्योर्ड लोन या भविष्य की कमाई की क्षमता पर दिए गए लोन के लिए।
इस क्षेत्र के कई लेंडर अब छात्रों की क्षमता का आकलन करने के लिए AI-ड्रिवन अंडरराइटिंग मॉडल का उपयोग कर रहे हैं, न कि केवल पारंपरिक कोलैटरल या क्रेडिट हिस्ट्री पर निर्भर रह रहे हैं। हालांकि इससे क्रेडिट की पहुंच बढ़ती है, लेकिन इसमें ऑपरेशनल और मॉडल रिस्क भी जुड़ जाते हैं। निवेशक आमतौर पर इन नई अंडरराइटिंग स्ट्रैटेजी पर बारीकी से नजर रखते हैं ताकि यह देखा जा सके कि वे समय के साथ एसेट क्वालिटी बनाए रख सकते हैं या नहीं।
इसके अलावा, एक NBFC सेगमेंट के तौर पर, एजुकेशन लेंडिंग रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के रेगुलेटरी दिशानिर्देशों और ब्याज दरों के चक्रों के प्रति संवेदनशील रहती है। जैसे-जैसे कंपनियां छोटे बाजारों में प्रवेश कर रही हैं, उन्हें डिजिटल ग्राहक अधिग्रहण की लागत और उन क्षेत्रों में क्रेडिट योग्यता का आकलन करने की तकनीकी चुनौतियों का भी प्रबंधन करना होगा जहां क्रेडिट डेटा कम औपचारिक है। इन क्षेत्रों में लोन की लंबी अवधि की रीपेमेंट पैटर्न की निगरानी उद्योग की स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण कारक होगी।
