भारत का ₹121 लाख करोड़ का क्रेडिट मार्केट: AI से 'सुस्त अंडरराइटिंग' का होगा इलाज, तेज़ होंगी लोन स्वीकृतियां!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
भारत का ₹121 लाख करोड़ का क्रेडिट मार्केट: AI से 'सुस्त अंडरराइटिंग' का होगा इलाज, तेज़ होंगी लोन स्वीकृतियां!
Overview

भारत का ₹121 लाख करोड़ का विशाल क्रेडिट मार्केट 'धीमी अंडरराइटिंग' के कारण सुस्त पड़ गया है। अंडरराइटर्स का **50%** तक समय सिर्फ डेटा इकट्ठा करने में चला जाता है, जिससे लोन अप्रूवल में देरी हो रही है। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को इस समस्या का एक अहम समाधान माना जा रहा है।

AI का बढ़ता कदम: 'एग्जीक्यूशन डेकेड' की शुरुआत

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के फाइनेंशियल सेक्टर में AI का इस्तेमाल अब ट्रायल स्टेज से निकलकर पूरी कंपनी-व्यापी उपयोग की ओर बढ़ रहा है। इसे बैंकों के लिए "AI एग्जीक्यूशन डेकेड" कहा जा रहा है।

क्रेडिट ग्रोथ के लिए AI क्यों ज़रूरी?

आर्थिक हालातों के अनुकूल होने और छोटे व मध्यम व्यवसायों (MSMEs) के लिए सरकार द्वारा क्रेडिट गारंटी जैसी योजनाओं के विस्तार से क्रेडिट की मांग बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में, AI-संचालित अंडरराइटिंग को निरंतर विस्तार के लिए ज़रूरी माना जा रहा है। AI का सफल उपयोग कार्यकुशलता (efficiency) बढ़ाएगा, जोखिम प्रबंधन (risk management) को बेहतर करेगा और क्रेडिट की पहुंच को व्यापक बनाएगा, जिससे लेंडर्स को प्रतिस्पर्धा में आगे रहने में मदद मिलेगी।

नैतिक पहलू और मानवीय निगरानी

हालांकि, बैंकों को AI नवाचार को मजबूत नैतिक नियमों, पारदर्शी प्रक्रियाओं और मानवीय निरीक्षण के साथ संतुलित करना होगा। यह जोखिमों को प्रबंधित करने और निष्पक्ष वित्तीय विकास का समर्थन करने के लिए महत्वपूर्ण है।

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