भारत में क्रेडिट कार्ड का अनोखा ट्रेंड: खर्च घटा, पर नए ग्राहक जोड़ने में HDFC, Axis Bank आगे

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AuthorNeha Patil|Published at:
भारत में क्रेडिट कार्ड का अनोखा ट्रेंड: खर्च घटा, पर नए ग्राहक जोड़ने में HDFC, Axis Bank आगे
Overview

भारत में क्रेडिट कार्ड मार्केट में एक अनोखा ट्रेंड देखने को मिल रहा है। जहां एक तरफ क्रेडिट कार्ड से होने वाला खर्च फरवरी **2026** में **11%** घटकर **₹1.78 लाख करोड़** पर आ गया, वहीं दूसरी तरफ नए क्रेडिट कार्ड जारी होने की संख्या में **21%** का जबरदस्त उछाल आया है, जो **10.5 लाख** को पार कर गया। HDFC Bank (जिसकी बाजार में **22%** हिस्सेदारी है) और Axis Bank जैसी बड़ी बैंकें ग्राहकों को जोड़ने में सबसे आगे हैं।

खर्च धीमा, पर कार्ड लेने वाले बढ़े!

फरवरी 2026 में, एक महीने पहले यानी जनवरी 2026 की तुलना में क्रेडिट कार्ड से होने वाले खर्च में 11% की गिरावट आई है और यह ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुँच गया। साल-दर-साल (Year-on-Year) आधार पर भी ग्रोथ घटकर केवल 6% रह गई है। यह मंदी आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनावों और करेंसी की अस्थिरता जैसी वजहों से उपभोक्ताओं के सतर्क रवैये का संकेत दे रही है।

इसके ठीक विपरीत, नए क्रेडिट कार्ड जोड़ने के मामले में गजब का उत्साह दिखा। फरवरी में 21% की बढ़ोतरी के साथ 10.5 लाख से ज़्यादा नए कार्ड जारी हुए, जो पिछले छह महीनों में सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा है। इस आक्रामक ग्राहक जोड़-तोड़ का नेतृत्व मुख्य प्राइवेट बैंक कर रहे हैं। HDFC Bank ने अकेले 1.55 लाख नए कार्ड जोड़े, जिससे फरवरी 2026 तक उसकी बाजार हिस्सेदारी 22% बनी रही। Axis Bank ने भी 1.55 लाख और ICICI Bank ने 1.40 लाख नए कार्ड जारी किए। इन तीन बैंकों ने मिलकर लगभग 4.47 लाख नए कार्ड जारी किए, जो बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है। यह रणनीति बताती है कि बैंक तत्काल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के बजाय लंबी अवधि के ग्राहक संबंध और भविष्य की कमाई की क्षमता को प्राथमिकता दे रहे हैं।

बैंक वैल्यूएशन और बाजार का हाल

बाजार में उतार-चढ़ाव और रुपये में कमजोरी के बावजूद, भारतीय बैंकिंग सेक्टर में स्थिरता दिख रही है। HDFC Bank, ICICI Bank और Axis Bank जैसी प्रमुख बैंकें डबल-डिजिट ग्रोथ दिखा रही हैं। अगर वैल्यूएशन की बात करें तो Axis Bank करीब 14.1 के P/E रेश्यो और ₹3.7 लाख करोड़ के मार्केट कैप पर ट्रेड कर रहा है। HDFC Bank, जो क्रेडिट कार्ड मार्केट में 22% हिस्सेदारी रखता है, करीब 16.1 के P/E और ₹1.23 लाख करोड़ के मार्केट कैप पर है। मार्च 2026 में चेयरमैन के इस्तीफे के बाद HDFC Bank के शेयर में करीब 15% की गिरावट आई थी। ICICI Bank की बाजार हिस्सेदारी 16% है और यह लगभग 16.6 के P/E व ₹8.97 लाख करोड़ के मार्केट कैप पर है। SBI Cards, जो इस सेगमेंट में एक अहम खिलाड़ी है, 31.3 के ऊँचे P/E रेश्यो और करीब ₹65,000 करोड़ के मार्केट कैप पर ट्रेड कर रहा है।

RBI के नियम और भविष्य की राह

यह सब तब हो रहा है जब क्रेडिट कार्ड इंडस्ट्री रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नए नियमों के तहत काम कर रही है। RBI ने 2026 से बिलिंग पारदर्शिता, क्रेडिट लिमिट बदलने के लिए ग्राहक की सहमति, पेनाल्टी स्ट्रक्चर और डेटा सिक्योरिटी (टोकेनाइजेशन के ज़रिए) जैसे मुद्दों पर कड़े नियम लागू किए हैं। इन नियमों का मकसद उपभोक्ताओं की सुरक्षा और जिम्मेदार उधारी को बढ़ावा देना है। UPI-लिंक्ड क्रेडिट कार्ड और RuPay का बढ़ता चलन भी पेमेंट के परिदृश्य को बदल रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि खर्च में यह नरमी बनी रह सकती है, जो सतर्क क्रेडिट माहौल और कड़े लेंडिंग मानकों से सीमित हो सकती है। ऐसे में बैंक ग्राहक एक्विजिशन पर जोर देकर भविष्य की कमाई की राह बना रहे हैं।

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