भारत में क्रेडिट की दो चाल: गोल्ड लोन में **128%** का उछाल, एक्सपोर्ट सेक्टर में **17%** की गिरावट!

BANKINGFINANCE
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
भारत में क्रेडिट की दो चाल: गोल्ड लोन में **128%** का उछाल, एक्सपोर्ट सेक्टर में **17%** की गिरावट!
Overview

जनवरी 2026 के ताजा आंकड़े भारत के क्रेडिट मार्केट में एक बड़ा विभाजन दिखा रहे हैं। गोल्ड से जुड़े लोन में पिछले साल की तुलना में **128%** का जबरदस्त उछाल आया है, जो घरेलू स्तर पर लिक्विडिटी की बढ़ी हुई मांग का संकेत देता है। वहीं, एक्सपोर्ट क्रेडिट में **17.2%** की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो वैश्विक व्यापार की अनिश्चितताओं का नतीजा है।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

घरेलू क्रेडिट में तेजी, पर विदेशी व्यापार पर दबाव

भारत का क्रेडिट मार्केट इस समय दो अलग-अलग रास्ते पर चलता दिख रहा है। एक तरफ जहां घर और छोटे-बड़े कारोबार लोन लेकर अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ देश का विदेशी व्यापार धीमा पड़ता नजर आ रहा है। यह स्थिति उन कंपनियों के लिए चिंताजनक है जो एक्सपोर्ट पर निर्भर हैं।

गोल्ड लोन की तूफानी रफ्तार: 128% का उछाल!

जनवरी 2026 में गोल्ड लोन की मांग में रिकॉर्डतोड़ 128% का इजाफा हुआ है। यह पिछले साल जनवरी (91%) की तुलना में काफी बड़ा जंप है। इससे पता चलता है कि भारतीय परिवार इन दिनों अपने सोने को गिरवी रखकर तुरंत पैसे का इंतजाम करने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। छोटी-मोटी जरूरतें पूरी करने, अचानक आए खर्चों से निपटने या कर्ज चुकाने के लिए लोग गोल्ड लोन की ओर रुख कर रहे हैं। सोने के बढ़ते दाम भी एक वजह हैं, क्योंकि इससे गिरवी रखे सोने का मूल्य बढ़ जाता है। साथ ही, गोल्ड लोन मिलना अपेक्षाकृत आसान और जल्दी हो जाता है। हालांकि, यह परिवारों की वित्तीय सेहत पर दबाव का संकेत भी हो सकता है, क्योंकि वे ऊंचे ब्याज वाले ऐसे लोन पर निर्भर हो रहे हैं। बैंकों द्वारा दिए जा रहे गोल्ड लोन में तो और भी तेज ग्रोथ देखी गई है।

नॉन-फूड क्रेडिट में 14% की ग्रोथ, पर एक्सपोर्ट क्रेडिट 17.2% गिरा

कुल मिलाकर, नॉन-फूड क्रेडिट में 14% की अच्छी ग्रोथ दर्ज की गई है, जो पिछले साल (11%) से बेहतर है। रिटेल लोन 15% और कॉर्पोरेट उधार 12% तक बढ़ा है। जेम्स एंड ज्वैलरी और इंजीनियरिंग जैसे इंडस्ट्री सेक्टर्स में भी 36% की तगड़ी ग्रोथ दिखी है।

इसके बिलकुल उलट, एक्सपोर्ट क्रेडिट में 17.2% की बड़ी गिरावट आई है। यह सीधे तौर पर ग्लोबल ट्रेड में चल रही अनिश्चितताओं और अमेरिका की तरफ से लगाए गए टैरिफ (शुल्क) का असर है। हालांकि, 2 फरवरी 2026 से लागू हुए एक नए द्विपक्षीय ट्रेड डील के तहत टैरिफ घटाकर 18% कर दिए गए हैं, लेकिन इसका एक्सपोर्ट पर पूरा असर दिखने में अभी समय लगेगा।

रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को सरकारी पुश: 62% ग्रोथ

रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) सेक्टर में 62% की प्रभावशाली ग्रोथ का मुख्य कारण भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डायरेक्टिव्स और प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग के नियम हैं। RBI ने इस सेक्टर में कर्ज की लिमिट बढ़ाई है, ताकि देश को लो-कार्बन इकोनॉमी की ओर तेजी से ले जाया जा सके। इसका मतलब है कि इस सेक्टर की ग्रोथ काफी हद तक पॉलिसी की वजह से है, न कि पूरी तरह से बाजार की मांग से।

एनालिस्ट की नजर से: क्रेडिट-डिपॉजिट का बढ़ता अंतर

बैंकिंग सेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती यह है कि क्रेडिट ग्रोथ डिपॉजिट ग्रोथ से आगे निकल रही है। जनवरी 2026 तक, क्रेडिट ग्रोथ करीब 14.6% थी, जबकि डिपॉजिट ग्रोथ 12.5% पर ही रही। इससे क्रेडिट-टू-डिपॉजिट रेश्यो 81.75% (दिसंबर 2025 तक) तक पहुंच गया है। यह बैंकों के लिए फंडिंग की कमी और लागत बढ़ने का संकेत है। बैंक अब महंगे होलसेल बॉरोइंग्स पर निर्भर हो रहे हैं।

सेक्टर और बैंकों का भविष्य

जेम्स एंड ज्वैलरी और इंजीनियरिंग सेक्टर घरेलू स्तर पर अच्छा कर रहे हैं, लेकिन उनके एक्सपोर्ट पर असर पड़ा है। हालांकि, हालिया टैरिफ कटौती से कुछ उम्मीद जगी है। एनालिस्ट्स का मानना है कि भारतीय बैंकिंग सेक्टर मजबूत बना रहेगा, लेकिन फंडिंग की बढ़ती लागत के कारण नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) पर थोड़ा दबाव आ सकता है। FY2026 के लिए क्रेडिट ग्रोथ 10.4% से 11.3% के बीच रहने का अनुमान है, जिसमें रिटेल, MSME, इंफ्रास्ट्रक्चर और कॉर्पोरेट लेंडिंग आगे रहेंगे। पब्लिक सेक्टर बैंक (PSBs) गोल्ड लोन और प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग में अपनी बढ़त बनाए हुए हैं।

जोखिम और आगे का रास्ता

गोल्ड लोन में इतनी बड़ी बढ़ोतरी घरेलू स्तर पर वित्तीय तनाव का संकेत हो सकती है, खासकर अगर आर्थिक हालात और खराब हों। एक्सपोर्ट क्रेडिट में गिरावट भारत के एक्सपोर्ट-आधारित ग्रोथ को झटका दे सकती है। वहीं, बैंकिंग सेक्टर में क्रेडिट-डिपॉजिट का बढ़ता अंतर बैंकों की फंडिंग लागत बढ़ा रहा है। ऐसे में, बैंकों को अपने फंड जुटाने के स्रोतों पर ध्यान देना होगा। हालाँकि, नए टैरिफ से निर्यात क्षेत्र के लिए उम्मीद की किरण जगी है।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.