बड़े बैंक घटा रहे हैं प्रीमियम कार्ड्स के फायदे
भारत का क्रेडिट कार्ड बाज़ार एक नए मोड़ पर है। बड़े बैंक जैसे HDFC Bank, ICICI Bank और American Express अपनी ऑपरेशनल कॉस्ट्स (Operational Costs) को कंट्रोल करने के लिए प्रीमियम कार्ड्स पर मिलने वाले फायदों में कटौती कर रहे हैं। इनमें पॉपुलर वाउचर्स (Vouchers) को हटाना, बेनिफिट्स के लिए खर्च की बढ़ी हुई शर्तें रखना और लॉयल्टी पॉइंट्स (Loyalty Points) के ट्रांसफर रूल्स बदलना शामिल है। उदाहरण के तौर पर, HDFC Bank ने अपने Infinia कार्डधारकों के लिए कार्ड का स्टेटस बनाए रखने के लिए सालाना कम से कम ₹18 लाख खर्च करने या कुल ₹50 लाख का रिलेशनशिप वैल्यू (Relationship Value) बनाए रखने की शर्त रखी है। यह कदम दिखाता है कि बड़े इश्यूअर्स (Issuers) अब प्रॉफिट (Profit) को मैनेज करने के लिए लागत नियंत्रण और बेनिफिट्स में कटौती पर ध्यान दे रहे हैं।
प्रतिद्वंद्वी बैंक बढ़ा रहे हैं प्रीमियम कार्ड्स के ऑफर्स
जहां एक ओर बड़े बैंक पीछे हट रहे हैं, वहीं कुछ मिड-टियर प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर के बैंक आक्रामक तरीके से अपने प्रीमियम क्रेडिट कार्ड पोर्टफोलियो का विस्तार कर रहे हैं। IDFC First Bank, जिसने 2021 में अपना क्रेडिट कार्ड बिजनेस शुरू किया था, जबरदस्त डिमांड देख रहा है। इसके प्रीमियम कार्ड्स FY26 तक 4.5 मिलियन कार्ड्स इन फोर्स (Cards in Force) के लक्ष्य की ओर ग्रोथ को बढ़ावा दे रहे हैं। बैंक का तरीका है कि प्रीमियम फीचर्स को अनबंडल (Unbundle) करके उन्हें और भी तरह के कार्ड्स, जैसे कि फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit) द्वारा बैक्ड सिक्योरड कार्ड्स (Secured Cards) पर भी उपलब्ध कराना। IDFC First Bank कंपीटिटिव प्राइसिंग (Competitive Pricing), कोई फॉरेन एक्सचेंज फीस (Foreign Exchange Fees) नहीं, कभी एक्सपायर न होने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स और फ्लेक्सिबल रिडेम्पशन (Redemption) जैसे फायदों को हाईलाइट करता है। यह पारंपरिक प्रीमियम प्रोडक्ट्स के मुकाबले एक मजबूत विकल्प के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। बैंक रिवॉर्ड पॉइंट्स को एक सीधी करेंसी के तौर पर देखता है, जिससे एफ्लुएंट ग्राहकों के लिए एक अधिक सुलभ मॉडल तैयार होता है।
सरकारी बैंक भी प्रीमियम कार्ड्स पर फोकस कर रहे हैं
पब्लिक सेक्टर के बैंक भी प्रीमियम क्रेडिट कार्ड्स पर अपना फोकस बढ़ा रहे हैं। Bank of Baroda का हिस्सा BOBCard अपने Eterna और Tiara कार्ड्स को प्रमोट कर रहा है। BOBCard के MD & CEO, रविंद्र राय ने बताया कि ग्राहकों की रुचि के चलते प्रीमियम कार्ड इश्यूएंस (Issuances) में लगातार ग्रोथ देखी जा रही है। BOBCard के पास फरवरी 2026 तक 31 मिलियन से अधिक कार्ड्स इन फोर्स हैं और इसने फरवरी से मार्च 2025 के बीच एक लाख से अधिक कार्ड इश्यू किए, जो उस साल उसका सबसे बड़ा मंथली आंकड़ा था। राय ने कार्ड नंबर्स बढ़ाने की बजाय जिम्मेदार पोर्टफोलियो ग्रोथ पर जोर दिया, भले ही साइन-अप्स (Sign-ups) को बढ़ावा देने में शॉर्ट-टर्म ऑफर्स (Short-term Offers) की भूमिका हो। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने दिसंबर में अपना मेटल Luxura कार्ड लॉन्च किया, जो RuPay Ekaa और Visa Infinite पर उपलब्ध है। इसने जनवरी से मार्च 2026 के बीच 13,000 से अधिक इश्यूएंस दर्ज किए, और इसके कॉम्पिटिटिव बेनिफिट्स (Competitive Benefits) का हवाला दिया।
बाज़ार का विश्लेषण: लागत और ग्रोथ के बीच संतुलन
भारत का क्रेडिट कार्ड बाज़ार स्पष्ट रूप से दो हिस्सों में बंटा हुआ दिख रहा है: स्थापित बैंक लागत नियंत्रण और अपने मौजूदा ग्राहकों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि नए खिलाड़ी सक्रिय रूप से नए, ज्यादा खर्च करने वाले ग्राहकों को टारगेट कर रहे हैं। यह सब तब हो रहा है जब ओवरऑल क्रेडिट कार्ड खर्च की ग्रोथ धीमी पड़ी है। 2026 की शुरुआत में जहां बैंक क्रेडिट में 14.4% की सालाना ग्रोथ देखी गई, वहीं क्रेडिट कार्ड खर्च में केवल 6% की ग्रोथ हुई। इसके बावजूद, नए कार्ड इश्यूएंस (New Card Issuances) में वृद्धि हुई है, फरवरी 2026 में 1.05 मिलियन नए कार्ड जोड़े गए। यह दर्शाता है कि बैंक प्रॉफिट की सुरक्षा के लिए रिवॉर्ड के इस्तेमाल को सीमित करते हुए, यूजर्स बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, BOBCard Eterna ऑनलाइन खर्च और यात्रा पर 3.75% तक का हाई रिवॉर्ड (कैशबैक) और ₹2,499 की फीस (उच्च खर्च पर वेव ऑफ होने योग्य) के साथ अनलिमिटेड लाउंज एक्सेस (Lounge Access) प्रदान करता है। वहीं, पुराने बैंकों के टॉप कार्ड्स ऐसे बेनिफिट्स को सीमित कर रहे हैं या पात्रता की शर्तें बढ़ा रहे हैं। HDFC Bank के Infinia को अपना स्टेटस बनाए रखने के लिए ₹18 लाख के सालाना खर्च की जरूरत है। यह ग्राहकों को चैलेंजर बैंक्स (Challenger Banks) की ग्रोथ स्ट्रेटेजी (Growth Strategies) की बदौलत, अत्यधिक खर्च किए बिना प्रीमियम बेनिफिट्स पाने का मौका देता है।
कार्ड चैलेंजेस के लिए जोखिम
चैलेंजर बैंक्स का प्रीमियम कार्ड्स में आक्रामक रुख उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद है, लेकिन यह बैंकों के लिए जोखिम भी पैदा करता है। जीरो फॉरेन एक्सचेंज फीस और कभी एक्सपायर न होने वाले पॉइंट्स जैसे फ्लेक्सिबल बेनिफिट्स पर ध्यान केंद्रित करने से, यदि मजबूत कंट्रोल और खर्च अनुशासन के साथ प्रबंधन न किया जाए, तो प्रॉफिट को नुकसान हो सकता है। IDFC First Bank की स्ट्रैटेजी हाई वॉल्यूम (High Volumes) पर निर्भर करती है, जो तब एक समस्या बन सकती है यदि लोन डिफॉल्ट्स (Loan Defaults) बढ़ें, खासकर धीमी क्रेडिट कार्ड खर्च ग्रोथ के साथ। BOBCard और PNB जैसे पब्लिक सेक्टर बैंक नए ग्राहकों को जोड़ने और अपने पोर्टफोलियो को जिम्मेदारी से बढ़ाने के बीच संतुलन बनाना होगा, ताकि प्रॉफिट को नुकसान पहुंचाने वाली प्राइस वॉर (Price War) से बचा जा सके। बड़े बैंकों का इतिहास रिवॉर्ड्स को डीवैल्यू (Devalue) करने का रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि बाजार हिस्सेदारी के लक्ष्य पूरे होने के बाद चैलेंजर बैंक्स के वर्तमान बेनिफिट्स शायद लंबे समय तक न टिकें। इसके अलावा, विकसित हो रहे रेगुलेशंस (Regulations) से कंप्लायंस कॉस्ट्स (Compliance Costs) बढ़ सकती हैं। प्रति यूजर कार्ड्स की बढ़ती संख्या और धीमी खर्च ग्रोथ 'कार्ड एग्जॉशन' (Card Exhaustion) या बाजार में संतृप्ति (Saturation) का संकेत दे सकती है, जिससे उपलब्ध खर्च के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ जाएगी।
भारत के कार्ड बाज़ार का आउटलुक
भारत के क्रेडिट कार्ड बाज़ार में ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है, हालांकि यह धीमी गति से होगी। 2026 से 2034 तक 7.49% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) का अनुमान है। इनोवेशन (Innovation) जारी रहने की उम्मीद है, जिसमें UPI-लिंक्ड क्रेडिट कार्ड्स और को-ब्रांडेड प्रोडक्ट्स (Co-branded Products) का महत्व बढ़ेगा। टियर-II (Tier-II) और टियर-III (Tier-III) शहरों से भी ग्रोथ की उम्मीद है। बाज़ार बैंकों द्वारा मुनाफे वाली ग्रोथ हासिल करने और ग्राहकों द्वारा अधिकतम रिवॉर्ड वैल्यू (Reward Value) चाहने के बीच लगातार संतुलन का सामना कर रहा है। चैलेंजर बैंक्स की प्रीमियम स्ट्रैटेजी की स्थायी सफलता लागत प्रबंधन, जोखिम कम करने और बदलते उपभोक्ता आदतों व रेगुलेशंस के अनुकूल ढलने की उनकी क्षमता पर निर्भर करेगी।