FY2026 में भारत का क्रेडिट कार्ड खर्च **12%** बढ़कर **₹23.6 लाख करोड़** पहुंच गया है। हालांकि ट्रांजैक्शन वॉल्यूम बढ़ा है, लेकिन बैंकों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव देखा जा रहा है क्योंकि ब्याज देने वाले ग्राहकों की संख्या कम हो रही है।
भारत का डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम तेजी से फैल रहा है। जुलाई 2026 तक देश में 1.03 अरब डेबिट कार्ड और 12.29 करोड़ क्रेडिट कार्ड चलन में हैं। रिजर्व बैंक के फाइनेंशियल इंक्लूजन इंडेक्स में भी सुधार दिखा है, जो पिछले साल के 67.0 से बढ़कर मार्च 2026 में 70.0 हो गया है। इसी का नतीजा है कि क्रेडिट कार्ड स्पेंडिंग में 12% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
बैंकों के लिए चुनौती
वॉल्यूम बढ़ने के बावजूद बैंकों की कमाई पर असर पड़ा है। क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों में से केवल 11% ही अब अपना बैलेंस आगे (carry forward) ले जा रहे हैं, जबकि पहले यह आंकड़ा 21% था। चूंकि अधिकांश ग्राहक हर महीने अपना ड्यू पेमेंट पूरा कर रहे हैं, इसलिए बैंकों की उस मोटी ब्याज आय (High-interest income) में गिरावट आई है जिस पर वे पारंपरिक रूप से निर्भर थे।
UPI और MDR पर नई अपडेट
अगस्त 2026 में संसद द्वारा पारित 'टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल' से डिजिटल पेमेंट सेक्टर में नई हलचल है। यह बिल UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शंस पर भविष्य में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का रास्ता साफ करता है। हालांकि सरकार ने अभी कोई दर या समयसीमा तय नहीं की है, लेकिन यह बैंकों के रेवेन्यू मॉडल को बदलने की क्षमता रखता है।
भविष्य का जोखिम
बैंक अब ग्रामीण इलाकों के 'न्यू-टू-क्रेडिट' ग्राहकों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। यहां रिस्क असेसमेंट करना मुश्किल है क्योंकि इन ग्राहकों की क्रेडिट हिस्ट्री का अभाव है। इसके साथ ही साइबर सुरक्षा और फ्रॉड के बढ़ते मामले भी बैंकों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। निवेशकों के लिए अब बैंकों के अगले क्वार्टरली नतीजों पर नजर रखना जरूरी होगा कि वे गिरते ब्याज मार्जिन की भरपाई कैसे करते हैं।
