Indian Capital Markets: निवेशकों का बड़ा आधार, बाज़ार में गहराई और मजबूती का नया दौर

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Capital Markets: निवेशकों का बड़ा आधार, बाज़ार में गहराई और मजबूती का नया दौर
Overview

कोरोना काल के बाद से भारत के कैपिटल मार्केट्स (Capital Markets) में एक बड़ा बदलाव आया है। निवेशकों की संख्या में भारी बढ़ोतरी के चलते ये बाज़ार अब पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत और गहरे हो गए हैं। रेनेसां इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (Renaissance Investment Managers) के सीआईओ (CIO) पंकज मुरारका का कहना है कि यह एक संरचनात्मक बदलाव है, हालांकि सट्टा ट्रेडिंग पर लगाम लगाना भी ज़रूरी है।

पंकज मुरारका, जो रेनेसां इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (Renaissance Investment Managers) के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर (CIO) हैं, उनके अनुसार, भारत के कैपिटल मार्केट्स (Capital Markets) की गहराई और मजबूती का सबसे बड़ा श्रेय हाल के वर्षों में निवेशकों की बढ़ी हुई संख्या को जाता है। उन्होंने कहा कि यह बाज़ार में आया एक संरचनात्मक (structural) बदलाव है, जिसने इसे पिछली अवधियों की तुलना में कहीं ज़्यादा resilient बना दिया है।

निवेशकों का बढ़ता दायरा

पंकज मुरारका बताते हैं कि पेंडेमिक (pandemic) के बाद से भारतीय कैपिटल मार्केट्स में पहली बार निवेश करने वालों की संख्या में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा हुआ है। इस बड़े पैमाने पर हुए जुड़ाव ने बाज़ार की गहराई को बढ़ाया है, जिससे वोलेटिलिटी (volatility) के प्रति बाज़ार का लचीलापन भी बढ़ा है और एक ज़्यादा टिकाऊ ग्रोथ का माहौल बना है। मुरारका का मानना है कि भले ही कुछ नए निवेशक कम समय के लिए ट्रेडिंग करते हों, लेकिन बाज़ार का अंतर्निहित ढांचा (underlying structure) काफी मज़बूत हुआ है। उन्होंने यह भी चेताया कि इंडस्ट्री को शॉर्ट-टर्म स्पेकुलेशन (short-term speculation) को बढ़ावा नहीं देना चाहिए, लेकिन इस बात पर ज़ोर दिया कि ज़्यादातर नए निवेशक एक ज़्यादा स्थिर और गहरे बाज़ार पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) में योगदान दे रहे हैं।

सेक्टरल ग्रोथ और सामान्यीकरण (Normalization)

हाई-ग्रोथ वाले प्लेटफॉर्म बिज़नेस (platform businesses) के वैल्यूएशन में आए उतार-चढ़ाव पर मुरारका ने कहा कि यह गिरावट की बजाय एक नॉर्मलाइजेशन (normalization) का दौर है। उन्होंने भारत की लगभग 38% की मज़बूत सेविंग्स रेट (savings rate) का ज़िक्र किया और बताया कि कैपिटल मार्केट्स इन फंडों को विभिन्न इंटरमीडिएशन चैनलों (intermediation channels) के ज़रिए पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। एसेट मैनेजमेंट (asset management), वेल्थ मैनेजमेंट (wealth management), एडवाइजरी सर्विसेज (advisory services) और इन्वेस्टमेंट बैंकिंग (investment banking) जैसे सेगमेंट्स के लिए आउटलुक (outlook) काफी मज़बूत बना हुआ है। भारत का लगातार टॉप ग्लोबल IPO मार्केट्स में बना रहना भी इन वित्तीय सेवा क्षेत्रों (financial services sectors) में सक्रियता की पुष्टि करता है। भले ही डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग (derivatives trading) में वॉल्यूम में उतार-चढ़ाव आए, लेकिन बाज़ार के अन्य हिस्से लगातार मज़बूत विस्तार के लिए तैयार हैं।

बजट 2026-27 और वित्तीय व्यवस्था

यूनियन बजट 2026-27 को मुरारका ने व्यावहारिक और विस्तृत-केंद्रित (detail-oriented) बताया, जो सिर्फ बातों के बजाय कार्यान्वयन (execution) पर केंद्रित है। उन्होंने 16वें फाइनेंस कमीशन (Finance Commission) की सिफारिशों के अनुसार वर्टिकल डिवोल्यूशन शेयर (vertical devolution share) को 41% पर बनाए रखने के फैसले का स्वागत किया। उनका मानना है कि राज्यों के लिए अतिरिक्त फंडिंग से इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (infrastructure development) में तेज़ी आएगी, जो बदले में क्रेडिट मार्केट्स (credit markets) और बॉन्ड मार्केट्स (bond markets) को मज़बूत करेगा। पिछले तीन सालों में इन्वेस्टमेंट बैंकरों (investment bankers) ने बेहद सक्रिय डील पाइपलाइन (deal pipeline) की रिपोर्ट की है, जो व्यापक वित्तीय व्यवस्था (financial ecosystem) में मज़बूत गति का संकेत देता है। मुरारका ने कहा कि यह अवधि बैंकरों के लिए कमाई का एक बड़ा दौर है, जिसमें अनगिनत डील्स पर काम होना बाकी है। वित्तीय मध्यस्थता (financial intermediation) में यह मज़बूत गतिविधि एक स्वस्थ और गतिशील कैपिटल मार्केट माहौल को दर्शाती है।

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