### बैंकिंग सेक्टर में 'विक्सित भारत' के लिए बड़े सुधार
भारतीय फाइनेंशियल सेक्टर आज एक अहम पड़ाव पर है, जहां मजबूत वित्तीय स्थिति के साथ सरकार भविष्य की ओर देख रही है। बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के प्रस्तावों ने इस सेक्टर के भविष्य को आकार देने के लिए एक सक्रिय दृष्टिकोण का संकेत दिया है। इस रणनीति का मुख्य आकर्षण "High Level Committee on Banking for Viksit Bharat" का गठन है। इस कमेटी का काम भारत के अगले आर्थिक विस्तार की ज़रूरतों के साथ बैंकिंग सेक्टर को संरेखित (Align) करना है, साथ ही वित्तीय स्थिरता, उपभोक्ता संरक्षण और व्यापक समावेशिता (Inclusion) के लिए कड़े सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करना है।
वित्त मंत्री ने सेक्टर की मौजूदा मज़बूत स्थिति पर प्रकाश डाला, जिसमें मजबूत बैलेंस शीट और रिकॉर्ड स्तर का मुनाफा शामिल है। एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ है, और बैंकिंग सेवाओं की पहुंच देश के 98% से अधिक गांवों तक हो गई है। सीतारमण ने कहा कि यह नींव भविष्य में सुधार-आधारित विकास के लिए एक ठोस मंच प्रदान करती है। प्रस्तावित कमेटी का एजेंडा इस गति को बनाए रखने के लिए आवश्यक उपायों का विश्लेषण करना होगा, जिससे अल्पकालिक समाधानों के बजाय दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।
### NBFCs की दक्षता और पहुंच को मज़बूत करना
Public Sector Non-Banking Financial Companies (NBFCs) की क्षमता और परिचालन दक्षता (Operational Efficiency) को बढ़ाने की दिशा में, सरकार ने Power Finance Corporation (PFC) और Rural Electrification Corporation (REC) जैसी संस्थाओं के पुनर्गठन (Restructuring) को एक प्रारंभिक कदम के रूप में पहचाना है। यह पहल 'विक्सित भारत' फ्रेमवर्क के तहत NBFCs के एक व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें क्रेडिट वितरण (Credit Disbursement) के लिए विशिष्ट लक्ष्य और उन्नत प्रौद्योगिकी (Advanced Technology) का एकीकरण (Integration) शामिल है। इस कदम से संचालन सुव्यवस्थित होने और आर्थिक विकास में इन वित्तीय संस्थानों की सहायता करने की क्षमता में सुधार होने की उम्मीद है।
प्रत्यक्ष वित्तीय क्षेत्र सुधारों के अलावा, बजट में अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax) उपायों की भी शुरुआत की गई है, जिनका उद्देश्य टैरिफ संरचनाओं को सरल बनाना है। इन समायोजनों का लक्ष्य घरेलू विनिर्माण (Domestic Manufacturing) को बढ़ावा देना, निर्यात प्रतिस्पर्धा (Export Competitiveness) को बढ़ाना और मौजूदा ड्यूटी इनवर्जन को ठीक करना है, जो समग्र आर्थिक विकास रणनीति का पूरक है।
### आर्थिक पृष्ठभूमि और विकास की संभावनाएँ
फाइनेंशियल सेक्टर की इन पहलों को आर्थिक लचीलेपन (Economic Resilience) के मज़बूत परिदृश्य के बीच लाया जा रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) 2026-27 के लिए भारत के रियल GDP ग्रोथ (Real GDP Growth) का अनुमान 6.8% से 7.2% के बीच रहने का पूर्वानुमान लगाता है। यह अनुमान, एक चुनौतीपूर्ण वैश्विक आर्थिक माहौल के बावजूद, निरंतर मध्यम अवधि की विकास क्षमता को इंगित करता है। इस प्रकार, सरकार की राजकोषीय योजनाओं (Fiscal Plans) और सेक्टर-विशिष्ट सुधारों का उद्देश्य इस अपेक्षित आर्थिक विस्तार का लाभ उठाना और उसमें योगदान देना है।