वित्तीय वर्ष 26 की पहली छमाही में बैंकिंग धोखाधड़ी की राशि 30% बढ़ी
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकिंग धोखाधड़ी के वित्तीय मूल्य में एक बड़ी वृद्धि का डेटा जारी किया है। वित्तीय वर्ष 2026 की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर) में, बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों में शामिल कुल राशि पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 30 प्रतिशत बढ़ी है। इस चिंताजनक प्रवृत्ति के तहत, यह मूल्य बढ़कर ₹21,515 करोड़ हो गया है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में रिपोर्ट किए गए ₹16,569 करोड़ से काफी अधिक है।
अग्रिमों (Advances) से संबंधित धोखाधड़ी का बोलबाला
धोखाधड़ी के मूल्य में इस तेज वृद्धि का मुख्य कारण अग्रिमों से संबंधित धोखाधड़ी की राशि में बढ़ोतरी प्रतीत होता है। इन प्रकार की धोखाधड़ी की राशि वित्तीय वर्ष 26 की पहली छमाही में ₹17,501 करोड़ थी, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह ₹15,521 करोड़ थी। यह बैंकों द्वारा प्रदान की जाने वाली ऋण और क्रेडिट सुविधाओं से जुड़े बढ़ते जोखिम को दर्शाता है।
कम घटनाएं, अधिक नुकसान
दिलचस्प बात यह है कि जहां धोखाधड़ी का मूल्य नाटकीय रूप से बढ़ा है, वहीं रिपोर्ट की गई धोखाधड़ी की घटनाओं की कुल संख्या में काफी गिरावट आई है। वित्तीय वर्ष 26 में सितंबर तक, धोखाधड़ी के मामलों की संख्या घटकर 5,092 रह गई, जो वित्तीय वर्ष 25 की समान अवधि में रिपोर्ट किए गए 18,386 मामलों के विपरीत है। यह विसंगति बताती है कि हालांकि धोखाधड़ी की गतिविधियां कम रिपोर्ट की जा रही हैं, लेकिन जो हो रही हैं वे वित्तीय रूप से बहुत बड़ी हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का प्रभाव
आरबीआई की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 2024-25 में धोखाधड़ी से जुड़ी कुल राशि में वृद्धि हुई है, जिसका आंशिक कारण 122 धोखाधड़ी के मामलों का पुनर्मूल्यांकन और नई रिपोर्टिंग है। इन मामलों की कुल राशि ₹18,336 करोड़ थी, जो 27 मार्च, 2023 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए एक निर्णय के अनुपालन के बाद रिपोर्ट की गई। इस पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया ने कुल रिपोर्ट किए गए मूल्यों को बढ़ाने में योगदान दिया है।
क्षेत्रवार विश्लेषण: निजी बनाम सार्वजनिक बैंक
बैंक के प्रकार के आधार पर डेटा का विश्लेषण करते हुए, निजी बैंकों में 2024-25 में रिपोर्ट की गई धोखाधड़ी की कुल संख्या का 59.3 प्रतिशत हिस्सा था। हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) ने धोखाधड़ी से जुड़ी कुल राशि का 70.7 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया। निजी बैंकों के भीतर, कार्ड और इंटरनेट से संबंधित धोखाधड़ी सबसे अधिक संख्या में थीं, जबकि अग्रिमों से संबंधित धोखाधड़ी ने मूल्य के हिसाब से सबसे बड़ा हिस्सा बनाया। इसके विपरीत, पीएसबी में अग्रिमों से जुड़ी धोखाधड़ी का अनुपात सबसे अधिक था, जो मामलों की संख्या और वित्तीय मूल्य दोनों के संदर्भ में था। रिपोर्ट में 2024-25 के दौरान सभी बैंक समूहों में कार्ड/इंटरनेट धोखाधड़ी में गिरावट देखी गई।
प्रभाव (Impact)
घटनाओं की संख्या में गिरावट के बावजूद, बैंकिंग धोखाधड़ी के मूल्य में यह वृद्धि वित्तीय क्षेत्र में निवेशकों के विश्वास को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है। यह बैंकों के लिए वित्तीय जोखिमों में वृद्धि का संकेत देती है, जो लाभप्रदता को प्रभावित कर सकती है और ऋण देने के मानदंडों को सख्त बना सकती है। ग्राहकों के लिए, यह डिजिटल लेनदेन और ऋण-संबंधी गतिविधियों के संबंध में बढ़ी हुई सतर्कता की आवश्यकता पर जोर देता है। बैंकिंग प्रणाली की समग्र स्थिरता और विश्वसनीयता जांच के दायरे में आ सकती है। प्रभाव रेटिंग: 7/10
कठिन शब्दों की व्याख्या
- FY26: वित्तीय वर्ष 2025-2026, जो 1 अप्रैल, 2025 से 31 मार्च, 2026 तक चलता है।
- YoY: साल-दर-साल (Year-on-Year), यानी पिछले साल की समान अवधि के साथ डेटा की तुलना।
- Advances: बैंकों द्वारा अपने ग्राहकों को दिए गए ऋण और अन्य क्रेडिट सुविधाएं।
- PSBs: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (Public Sector Banks), वे बैंक जिनमें भारत सरकार की बहुसंख्यक हिस्सेदारी होती है।
- Card / Internet Frauds: क्रेडिट/डेबिट कार्ड का उपयोग करके या ऑनलाइन बैंकिंग चैनलों के माध्यम से की जाने वाली धोखाधड़ी की गतिविधियां।
- Supreme Court of India: भारत का सर्वोच्च न्यायिक न्यायालय।