जुलाई 2026 में भारत में बैंक क्रेडिट का आंकड़ा **₹220.8 लाख करोड़** पर पहुंच गया है, जो कि **26** महीनों का सबसे उच्चतम स्तर है। इंडस्ट्रियल और सर्विस सेक्टर की मजबूत मांग ने इसे गति दी है, हालांकि बैंक अब पर्सनल लोन को लेकर सतर्क हो गए हैं।
जुलाई 2026 में देश में बैंक क्रेडिट की रफ्तार में जबरदस्त तेजी देखी गई है। साल-दर-साल आधार पर यह ग्रोथ 19.3% दर्ज की गई है, जिससे कुल आउटस्टैंडिंग क्रेडिट ₹220.8 लाख करोड़ हो गया है, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹185 लाख करोड़ था। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, यह तेजी किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि चौतरफा मांग का नतीजा है।
इंडस्ट्री और मिड-साइज कंपनियों की भूमिका
इंडस्ट्रियल लैंडिंग इस बढ़त की मुख्य धुरी रही है, जिसमें 21.6% की उछाल के साथ कुल क्रेडिट ₹48 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। इसमें सबसे ज्यादा रुचि मीडियम-साइज एंटरप्राइजेज ने दिखाई है, जहां क्रेडिट ग्रोथ 30.5% रही है। वहीं, माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज ने भी 22.6% की शानदार बढ़त दर्ज की है। बड़ी कंपनियों ने 17.7% की ग्रोथ दिखाई है, क्योंकि वे पारंपरिक लोन के बजाय अब कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट का रुख कर रही हैं।
रिटेल सेगमेंट में सावधानी
सर्विस सेक्टर में भी 21.2% का इजाफा हुआ है। हालांकि, सबसे बड़े रिटेल लेंडिंग सेगमेंट (कुल ₹71.8 लाख करोड़) की रफ्तार थोड़ी धीमी होकर 16.6% रह गई है। बैंक अब रिस्क मैनेज करने के लिए अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन के मुकाबले होम या व्हीकल जैसे सिक्योर्ड लोन को प्राथमिकता दे रहे हैं।
निवेशकों के लिए अब यह देखना अहम होगा कि बैंक बढ़ती ब्याज दरों के माहौल में अपनी एसेट क्वालिटी को कैसे बनाए रखते हैं। बड़ी कंपनियों द्वारा बॉन्ड मार्केट से फंड जुटाने के ट्रेंड का असर आने वाले समय में बैंकों के मार्जिन पर कैसा पड़ेगा, इस पर नजर रखना जरूरी है।
