भारतीय वेल्थ मैनेजमेंट सेक्टर में बड़ा बदलाव आ रहा है। अब इन्वेस्टमेंट बैंकिंग और एसेट मैनेजमेंट जैसी सुविधाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर मिल रही हैं। Spark Private Wealth जैसी कंपनियां AI और नई तकनीक के जरिए निवेशकों को 'सुपर ऐप' अनुभव दे रही हैं।
भारतीय वेल्थ मैनेजमेंट इंडस्ट्री अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। पहले निवेशक इन्वेस्टमेंट बैंकिंग, एसेट मैनेजमेंट और टैक्स एडवाइजरी के लिए अलग-अलग ऑफिस और कंपनियों पर निर्भर रहते थे, लेकिन अब डिमांड 'वन-स्टॉप' सॉल्यूशंस की है।
क्यों बढ़ रही है 'सुपर ऐप्स' की मांग?
फैमिली ऑफिस की बढ़ती जटिलताओं के कारण, अब succession प्लानिंग और ऑफशोर डाइवर्सिफिकेशन जैसी सेवाएं एक ही छत के नीचे चाहिए। Spark Private Wealth इसका जीता-जागता उदाहरण है, जिसने मात्र तीन साल में अपने असेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) को ₹3,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹52,000 करोड़ तक पहुंचा दिया है।
AI का बड़ा गेम
इस बदलाव के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बड़ा हाथ है। कंपनियां अब 'सेगमेंट ऑफ वन' स्ट्रैटेजी अपना रही हैं। इसका मतलब है कि AI की मदद से हर क्लाइंट को उनकी फैमिली के फाइनेंशियल फुटप्रिंट के हिसाब से कस्टमाइज्ड इनसाइट्स दी जा रही हैं। इससे रिलेशनशिप मैनेजर्स का समय बच रहा है और वे अब डेटा जुटाने के बजाय बेहतर स्ट्रैटेजिक एडवाइस देने पर फोकस कर पा रहे हैं।
मार्केट में नए समीकरण
इस बदलते माहौल में 360 ONE और Nuvama Wealth जैसे प्लेयर्स पहले से ही इंटीग्रेटेड मॉडल पर काम कर रहे हैं। जो कंपनियां ब्रोकरेज, एडवाइजरी और एसेट मैनेजमेंट को एक साथ जोड़ पा रही हैं, वे भविष्य में मार्केट लीडर बनने की रेस में सबसे आगे रहेंगी। निवेशकों के लिए यह सही समय है कि वे उन कंपनियों पर नजर रखें जो तकनीक और ह्यूमन-सेंट्रिक एडवाइजरी का बेहतरीन तालमेल बिठा रही हैं।
