Wealth Management: PMS और AIF की ओर बढ़े भारतीय वितरक, बड़ी कमाई के लिए बदल रहे बिजनेस मॉडल

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AuthorMehul Desai|Published at:
Wealth Management: PMS और AIF की ओर बढ़े भारतीय वितरक, बड़ी कमाई के लिए बदल रहे बिजनेस मॉडल

भारत में फाइनेंशियल डिस्ट्रीब्यूटर्स अब केवल म्यूचुअल फंड तक सीमित नहीं हैं। कमाई बढ़ाने के लिए वे PMS और AIF जैसे प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर दांव लगा रहे हैं, जहां PMS एसेट्स का आंकड़ा **₹43.3 लाख करोड़** तक पहुंच गया है।

भारतीय फाइनेंशियल डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब डिस्ट्रीब्यूटर्स केवल म्यूचुअल फंड बेचने के कम मार्जिन वाले बिजनेस पर निर्भर नहीं रहना चाहते। इसके बजाय, वे अपने पोर्टफोलियो में Portfolio Management Services (PMS) और Alternative Investment Funds (AIFs) को तेजी से शामिल कर रहे हैं। यह रणनीति हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) को लुभाने और वॉल्यूम के बजाय वैल्यू-आधारित बिजनेस मॉडल की ओर बढ़ने का संकेत है।

आंकड़ों में ग्रोथ

मार्केट के ताजा आंकड़े बताते हैं कि रईस निवेशकों पर फोकस करने से एसेट्स में जबरदस्त इजाफा हुआ है। जून 2026 तक देश में PMS इंडस्ट्री का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹43.3 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है, जबकि AIF कमिटमेंट्स ₹17.53 लाख करोड़ दर्ज किए गए। इसके अलावा, पिछले फाइनेंशियल ईयर में इंश्योरेंस सेक्टर ने भी ₹11.93 लाख करोड़ के प्रीमियम के साथ फाइनेंशियल इकोसिस्टम में बड़ा योगदान दिया है।

क्यों बदल रहे हैं डिस्ट्रीब्यूटर्स?

म्यूचुअल फंड्स में कमीशन फिक्स्ड होते हैं, जबकि PMS और AIF में कस्टमाइज्ड इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी और फ्लेक्सिबल फीस स्ट्रक्चर मिलता है। यह डिस्ट्रीब्यूटर्स को क्लाइंट्स के साथ लंबे समय के लिए गहरे रिश्ते बनाने का मौका देता है।

रिस्क और चुनौतियां

हालांकि, यह बदलाव रिस्क से खाली नहीं है। म्यूचुअल फंड के मुकाबले ये प्रोडक्ट्स कम लिक्विड होते हैं और इनमें निवेश जोखिम ज्यादा होता है। SEBI इस सेक्टर पर कड़ी नजर रख रहा है और मिस-सेलिंग को रोकने के लिए डिस्क्लोजर नॉर्म्स को सख्त कर रहा है। डिस्ट्रीब्यूटर्स को अब कॉम्प्लाइंस और बेहतर टेक्नोलॉजी पर ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है।

आने वाले समय में इंडस्ट्री का फोकस इन चुनौतियों से निपटने पर होगा, जिसके लिए मुंबई में Moneycontrol FiDEX 2026 जैसा इवेंट आयोजित किया जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि डिस्ट्रीब्यूटर्स जटिल प्रोडक्ट्स और सख्त रेगुलेटरी नियमों के बीच कैसे तालमेल बिठाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.