भू-राजनीतिक चिंताओं के कम होने से भारतीय बाज़ार में तेज़ी
भारतीय शेयर बाज़ार में आज खासी तेज़ी देखी गई। BSE Sensex में भारी उछाल दर्ज किया गया, जिसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव का कम होना रहा। वैश्विक चिंताएं कम होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा, जिससे बाज़ार के ज़्यादातर सेक्टर्स में खरीदारी देखी गई।
सेक्टर परफॉर्मेंस में सुधार, अस्थिरता में गिरावट
Sensex और Nifty 50 इंडेक्स महत्वपूर्ण स्तरों को पार कर गए, जो बाज़ार में सकारात्मक मोमेंटम की वापसी का संकेत देता है। बाज़ार की अस्थिरता को मापने वाला India VIX 3.17% घटकर 17.86 पर आ गया, जो निवेशकों की घबराहट में कमी दर्शाता है। इस रिस्क से बचने की प्रवृत्ति में कमी का फायदा एविएशन सेक्टर को मिला, जहाँ IndiGo के शेयर में तेज़ी देखी गई। मेटल सेक्टर में भी खरीदारी हुई, जिसमें Tata Steel जैसे शेयर शामिल थे। रियल एस्टेट स्टॉक्स ने भी मज़बूत प्रदर्शन किया, जिससे Nifty Realty इंडेक्स 1.61% ऊपर गया। Nifty Realty इंडेक्स का मौजूदा P/E अनुपात 31.15 है, जो इसके 3-साल के औसत 29.88 से ज़्यादा है। ऑटो और मेटल सेक्टर ने भी बाज़ार की इस बढ़त में योगदान दिया, जहाँ Nifty Metal इंडेक्स का P/E 22.88 है, जो इसके इंडस्ट्री एवरेज के बराबर है।
IT स्टॉक्स पर दबाव
जहाँ एक ओर ब्रॉडर मार्केट में तेज़ी रही, वहीं दूसरी ओर सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेक्टर में मुनाफावसूली (Profit Taking) देखने को मिली। Sensex पर Infosys के शेयर में गिरावट दर्ज की गई, जो इस सेक्टर के प्रति सतर्कता को दर्शाता है। Nifty IT इंडेक्स में मामूली तेज़ी देखी गई, संभवतः ग्लोबल टेक्नोलॉजी खर्चों और विदेशी मांग में नरमी की चिंताओं के कारण। Nifty IT इंडेक्स का P/E 20.0 है, जो इसके ऐतिहासिक औसत और Nifty 50 के P/E 20.4 से कम है।
ग्लोबल मार्केट्स और क्रूड ऑयल की कीमतें
भारतीय बाज़ार की इस तेज़ी को ग्लोबल इक्विटी मार्केट्स के सकारात्मक प्रदर्शन का भी साथ मिला, जो वॉल स्ट्रीट पर मज़बूत रिकवरी को दर्शाता है। एशियाई बाज़ार भी इसी राह पर चले, जिसमें दक्षिण कोरिया का KOSPI सबसे आगे रहा। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी हुई और यह लगभग $105.87 प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था। अनुमान है कि 2026 की दूसरी तिमाही में ब्रेंट क्रूड का औसत $106 प्रति बैरल रहेगा, और मध्य पूर्व में उत्पादन बढ़ने से चौथी तिमाही तक यह घटकर $79 तक जा सकता है। हालाँकि भू-राजनीतिक तनाव कम हुआ है, लेकिन क्रूड ऑयल की कीमतें महंगाई के दबाव के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई हैं।
विभिन्न सेक्टर्स के वैल्यूएशन की तुलना
Nifty 50 इंडेक्स का P/E अनुपात लगभग 20.4 है, जिसे ऐतिहासिक रूप से एक उचित दायरे में माना जाता है, हालाँकि इसमें हालिया गिरावट देखी गई है। बैंकिंग सेक्टर, जिसका P/E 13.5 है, ब्रॉडर मार्केट की तुलना में डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा है। इसके विपरीत, रियलटी सेक्टर का P/E 31.15 अपने ऐतिहासिक औसत से ज़्यादा है, और IT सेक्टर का P/E 20.0 अपने ऐतिहासिक औसत से नीचे है। एविएशन सेक्टर का P/E 35.29 है, जो इसके इंडस्ट्री एवरेज के अनुरूप है। विभिन्न सेक्टर्स के वैल्यूएशन में यह अंतर बताता है कि जहाँ भू-राजनीतिक चिंताओं में कमी के कारण ब्रॉडर मार्केट का सेंटिमेंट सकारात्मक है, वहीं व्यक्तिगत सेक्टर्स अपने वैल्यूएशन चक्रों के अलग-अलग चरणों में हैं।
