बैंकिंग और वित्तीय शेयरों ने खींचा बाज़ार
शुक्रवार को भारतीय इक्विटी बेंचमार्क में शानदार तेज़ी देखी गई। इसकी मुख्य वजह घरेलू संस्थागत निवेशकों की ज़बरदस्त खरीदारी और अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक समाधान की संभावना को लेकर सकारात्मक भावना रही। BSE Sensex 602 अंक या 0.80% की बढ़त के साथ 75,785.44 पर कारोबार कर रहा था, वहीं Nifty 50 में 176.15 अंक यानी 0.74% का उछाल आया और यह 23,830.85 पर पहुंच गया। इस बाज़ार में उछाल का नेतृत्व मुख्य रूप से बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्रों ने किया, जहाँ Nifty Bank और Nifty Private Bank इंडेक्स ने मज़बूत प्रदर्शन किया। ICICI Bank, Axis Bank और HDFC Bank जैसे बड़े बैंकों में अच्छी खरीदारी देखी गई, जिसने Nifty Financial Services इंडेक्स को ऊपर ले जाने में मदद की।
विश्लेषकों का मानना है कि यह सेक्टर आकर्षक वैल्यूएशन और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा संभावित ब्याज दर वृद्धि से लाभान्वित होने की क्षमता के कारण मज़बूत बना हुआ है। बैंकिंग सेक्टर की कैपिटल एडिक्वेसी (Capital Adequacy) भी मज़बूत है, जो नियामक न्यूनतम से काफी ऊपर है, और एसेट क्वालिटी (Asset Quality) में सुधार हुआ है।
FMCG में सुधार, IT सेक्टर में दिखी भिन्नता
फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) सेक्टर ने भी मज़बूती दिखाई, जिसमें Hindustan Unilever (HUL) और Asian Paints में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह कंज्यूमर स्टॉक्स की ओर निवेशकों के झुकाव और पिछले कुछ समय से खराब प्रदर्शन के बाद Nifty FMCG इंडेक्स में रिकवरी का संकेत देता है। वहीं, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेक्टर का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। Wipro इंडेक्स के सबसे बड़े गेनर्स में से एक रहा, लेकिन TCS, Infosys, HCL Tech और Tech Mahindra जैसे अन्य IT स्टॉक्स में गिरावट देखने को मिली, जिससे Nifty IT इंडेक्स पर दबाव पड़ा। हालांकि IT सेक्टर में हाल ही में अमेरिकी डॉलर की मज़बूती और पिछले गिरावटों के बाद आकर्षक वैल्यूएशन के कारण कुछ सुधार हुआ है, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तैनाती के संभावित प्रभाव को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
प्रमुख मूवर्स और बाज़ार की चाल
Wipro Nifty के गेनर्स में सबसे आगे रहा, इसके बाद Trent, Axis Bank, ICICI Bank, Shriram Finance, HUL और Asian Paints का नंबर आया। दूसरी ओर, Max Health Care इंडेक्स के लिए सबसे बड़ा ड्रैग (Drag) साबित हुआ। ITC के शेयरों में भी बिकवाली का दबाव देखा गया क्योंकि निवेशकों ने डिफेंसिव कंज्यूमर स्टॉक्स से ध्यान हटा लिया। व्यापक Sensex और Nifty इंडेक्स लगभग 25x और 23x के फॉरवर्ड P/E (Price-to-Earnings) पर कारोबार कर रहे हैं, जबकि Nifty 50 का P/E रेश्यो 20.41 के आसपास है, जो इसके 10-साल के औसत से नीचे है। वर्तमान वैल्यूएशन बताता है कि भविष्य के रिटर्न मूल्यांकन विस्तार के बजाय कमाई में वृद्धि के अनुरूप होने की संभावना है।
जोखिम और एशियाई बाज़ार का रुख
कच्चे तेल की कीमतें एक महत्वपूर्ण जोखिम बनी हुई हैं। Brent क्रूड $104 प्रति बैरल से ऊपर और WTI लगभग $98 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जो भारत जैसे तेल-आयात करने वाले देशों के लिए चिंता का सबब है। इसके बावजूद, एशियाई बाज़ार मोटे तौर पर सकारात्मक रुझान पर थे, जहाँ टोक्यो का Nikkei 2% से अधिक और ताइपे 1.5% चढ़ा। यह भावना पिछली शाम वॉल स्ट्रीट पर एक सकारात्मक, हालांकि सतर्क, क्लोजिंग से भी परिलक्षित हुई। अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक सफलता की संभावना ने तेल में आक्रामक खरीदारी को धीमा कर दिया है, भले ही होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में मजबूती ने भी सकारात्मक बाज़ार भावना को बढ़ावा दिया। BofA ग्लोबल रिसर्च ने निकट अवधि में AI व्यवधान की संभावना के कारण भारत के IT सेक्टर के लिए 'अंडरवेट' (Underweight) रेटिंग बनाए रखी है, हालांकि वे लंबी अवधि में विकास की क्षमता देखते हैं।
