देश में शॉर्ट-टर्म सरकारी कर्ज लेना महंगा हो गया है। बुधवार को हुई नीलामी में 182-डे और 364-डे ट्रेजरी बिल की यील्ड क्रमश: **6.29%** और **6.49%** पर पहुंच गई, जो पिछले **18 महीनों** का सबसे ऊंचा स्तर है।
बाजार में क्यों मचा है हड़कंप?
बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को हुई नीलामी के आंकड़ों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। 182-डे ट्रेजरी बिल की यील्ड 6.29% और 364-डे इंस्ट्रूमेंट की यील्ड 6.49% दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि बाजार अब 'हायर-फॉर-लॉन्गर' (Higher-for-longer) इंटरेस्ट रेट के दौर के लिए खुद को तैयार कर रहा है।
RBI की पॉलिसी और बढ़ता तनाव
वर्तमान में रेपो रेट 5.50% पर है, लेकिन बाजार जिस तरह से प्रीमियम मांग रहा है, उससे साफ है कि निवेशक महंगाई को लेकर डरे हुए हैं। 6 महीने और 1 साल के नोट्स के लिए स्प्रेड क्रमश: 79 बेसिस पॉइंट और 99 बेसिस पॉइंट तक बढ़ गया है, जो नवंबर 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है।
बॉन्ड और इक्विटी मार्केट पर असर
बॉन्ड यील्ड बढ़ने का सीधा मतलब है बॉन्ड की कीमतों में गिरावट, जिसका असर डेट म्यूचुअल फंड्स के पोर्टफोलियो पर पड़ सकता है। वहीं, 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड 7.41% के पास बनी हुई है। इसका दबाव शेयर बाजार पर भी दिख सकता है, क्योंकि जब सरकारी सिक्योरिटीज पर रिटर्न बढ़ता है, तो निवेशक शेयरों से भी ज्यादा रिटर्न की उम्मीद करने लगते हैं। साथ ही, कंपनियों की कर्ज लेने की लागत (Borrowing Cost) बढ़ने से उनके मुनाफे पर भी चोट पहुंच सकती है।
अब सबकी नजरें महंगाई के आंकड़ों और रिजर्व बैंक के अगले कदमों पर टिकी हैं। क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल संकेत आने वाले दिनों में बाजार की चाल तय करेंगे।
