पब्लिक सेक्टर बैंक (PSBs) में कॉर्पोरेट कर्ज की मांग में जोरदार उछाल देखने को मिला है। बैंकों के पास कुल **₹7.8 लाख करोड़** की लोन पाइपलाइन तैयार है, जो रिन्यूएबल एनर्जी, सेमीकंडक्टर और स्टील जैसे सेक्टरों में बढ़ते निवेश का संकेत है।
भारतीय पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSBs) में कॉर्पोरेट क्रेडिट की मांग तेजी से बढ़ रही है। इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि यह भारत के कॉर्पोरेट जगत में 'कैपिटल एक्सपेंडिचर' (Capex) के एक नए दौर की शुरुआत है। कई कंपनियां अब उन प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ा रही हैं जो बाजार में अनिश्चितता के कारण ठंडे बस्ते में डाल दिए गए थे।
प्रमुख बैंकों का दबदबा
इस दौड़ में State Bank of India (SBI) सबसे आगे है, जिसकी कॉर्पोरेट लोन पाइपलाइन अकेले ₹5 लाख करोड़ के करीब है। वहीं, Punjab National Bank (PNB) ने भी चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही में ₹2.5 लाख करोड़ से अधिक का लोन सैंक्शन किया है। ये आंकड़े बताते हैं कि बड़े बैंक अब रिन्यूएबल एनर्जी, बैटरी स्टोरेज और डेटा सेंटर जैसी नई और उभरती जरूरतों को पूरा करने के लिए आक्रामक रूप से काम कर रहे हैं।
रिस्क और डाइवर्सिफिकेशन
दिलचस्प बात यह है कि क्रेडिट की मांग अब केवल स्टील और सीमेंट जैसे ट्रेडिशनल सेक्टर तक सीमित नहीं है। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और सोलर मॉड्यूल इकोसिस्टम में भारी निवेश हो रहा है, जिसे सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं (PLI Schemes) का भी साथ मिल रहा है। इससे बैंकों का पोर्टफोलियो डाइवर्सिफाई हो रहा है और किसी एक सेक्टर पर निर्भरता कम हो रही है।
प्राइवेट सेक्टर का प्रदर्शन
सरकारी बैंकों के अलावा Axis Bank, ICICI Bank और HDFC Bank जैसे प्राइवेट लेंडर्स ने भी अपने कॉर्पोरेट और होलसेल सेगमेंट में डबल-डिजिट ग्रोथ दर्ज की है। वहीं RBL Bank और Central Bank of India की लोन बुक में भी काफी तेजी देखी गई है।
निवेशकों के लिए अलर्ट
बैंकों के बैलेंस शीट अब पहले से काफी मजबूत हैं, जो इस निवेश चक्र को सपोर्ट करने के लिए जरूरी लिक्विडिटी प्रदान करते हैं। हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान रखना होगा कि यह पाइपलाइन असल मुनाफे में तभी बदलेगी जब कंपनियां इन प्रोजेक्ट्स को सही समय पर पूरा करेंगी। आने वाली तिमाहियों में इन बड़े प्रोजेक्ट्स की 'एग्जीक्यूशन' पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा, क्योंकि लोन का प्रदर्शन सीधे तौर पर प्रोजेक्ट की सफलता पर निर्भर करेगा।
