सितंबर 2026 में भारत में प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल (PE-VC) निवेश ने **4 साल** का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी सेक्टर में हुए बड़े सौदों की बदौलत कुल निवेश **$6.1 बिलियन** तक पहुंच गया है।
भारत के इन्वेस्टमेंट मार्केट में सितंबर का महीना एक नई उम्मीद लेकर आया है। सितंबर 2026 में कुल $6.1 बिलियन का निवेश दर्ज किया गया, जो साल 2022 के बाद से अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। इस तेजी के पीछे 12 बड़े सौदे रहे, जिनका कुल मूल्य $4.9 बिलियन है। यह साफ दिखाता है कि अब निवेशकों का झुकाव स्टार्टअप्स के बजाय बड़े और भरोसेमंद इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की ओर बढ़ गया है।
मैच्योर एसेट्स की ओर निवेशकों का रुख
मार्केट का मूड बदल रहा है। पिछले साल के मुकाबले इस बार अर्ली-स्टेज फंडिंग गिरकर महज $226 मिलियन रह गई है, जबकि ग्रोथ-स्टेज इन्वेस्टमेंट दोगुना होकर $1.7 बिलियन पर पहुंच गया है। अब बड़े इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ऐसी कंपनियों को चुन रहे हैं जहां से पैसा आने (Cash Flow) की गारंटी ज्यादा हो, जैसे कि टेलिकॉम टावर, रिन्यूएबल एनर्जी और एयरपोर्ट ऑपरेशंस।
इन बड़े सौदों ने बदली तस्वीर
इस महीने की चर्चा में रहे कुछ बड़े सौदे:
- La Caisse ने Altius Telecom Infrastructure Trust में 24% हिस्सेदारी के लिए $1.3 बिलियन का निवेश किया है।
- Adani Airport Holdings को Temasek, BlackRock और Premji Invest से $1 बिलियन की बड़ी पूंजी मिली है।
- Brookfield ने ACME Cleantech Ventures में $600 मिलियन का निवेश कर एनर्जी सेक्टर के प्रति अपना भरोसा जताया है।
क्या है मार्केट का हाल?
सितंबर की जबरदस्त उछाल के बावजूद, साल-दर-साल (Year-to-date) कुल फंडिंग $31.6 बिलियन ही रही है, जो 2025 के आंकड़ों से अभी भी पीछे है। इसका मतलब है कि रिकवरी फिलहाल चुनिंदा सेक्टरों तक ही सीमित है। आने वाले समय में ग्लोबल ब्याज दरों और घरेलू इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग ही यह तय करेगी कि यह तेजी आगे भी बनी रहेगी या नहीं।
