इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) सितंबर तक **$650 मिलियन** विदेशी मुद्रा डिपॉजिट जुटाने की योजना बना रहा है। यह कदम बैंक के **$1 बिलियन** की फंडरेज़िंग योजना का हिस्सा है। हाल ही में बैंक ने पहली तिमाही में **49.3%** की शानदार बढ़ोतरी के साथ **₹1,659 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था।
बैंक का बड़ा कदम: विदेशी डिपॉजिट जुटाने की तैयारी
इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) अपनी विदेशी मुद्रा डिपॉजिट को बढ़ाने पर जोर दे रहा है। बैंक का लक्ष्य है कि सितंबर के अंत तक $650 मिलियन विदेशी डिपॉजिट जुटा लिए जाएं। बैंक के अनुसार, इस लक्ष्य की दिशा में $300 मिलियन की राशि पहले ही जुटाई जा चुकी है। यह कवायद बैंक की $1 बिलियन की बड़ी फंडरेज़िंग योजना का एक अहम हिस्सा है, जिसमें नॉन-रेजिडेंट एक्सटर्नल डिपॉजिट्स और एक्सटर्नल कमर्शियल बोर्रोइंग (ECB) शामिल हैं।
दमदार तिमाही नतीजे
यह डिपॉजिट जुटाने का अभियान चेन्नई स्थित इस सरकारी बैंक के लिए एक मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के बाद आया है। बैंक ने हालिया तिमाही नतीजों में ₹1,659 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹1,111 करोड़ की तुलना में 49.3% अधिक है। बैंक के मुख्य व्यापारिक मेट्रिक्स में भी सुधार देखा गया, जिसमें नेट इंटरेस्ट इनकम (Net Interest Income) 34.3% बढ़कर ₹3,688 करोड़ हो गई।
मार्जिन और एसेट क्वालिटी में सुधार
बैंक मैनेजमेंट ने बताया कि बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (Net Interest Margin), जो कि कमाई गई ब्याज और जमा पर दिए गए ब्याज के बीच का अंतर है, एक साल पहले के 3.04% से सुधरकर 3.37% हो गया है। इसके अलावा, बैंक की एसेट क्वालिटी में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला है। जून के अंत में ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (Gross NPA) रेशियो घटकर 1.33% रह गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 1.97% था।
फंडिंग और लिक्विडिटी पर असर
खास बात यह है कि IOB ने $300 मिलियन का आंकड़ा बिना किसी लीवरेज (कर्ज) का इस्तेमाल किए हासिल किया है। मैनेजिंग डायरेक्टर अजय कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, बैंक लीवरेज को एक सेकेंडरी विकल्प मानता है और केवल जरूरत पड़ने पर ही दूसरी तिमाही के अंत तक $650 मिलियन के लक्ष्य को पूरा करने के लिए इस पर विचार करेगा। बैंक के पास लगभग 4.5 लाख नॉन-रेजिडेंट खाताधारक हैं, जो इन फंड्स का एक प्रमुख स्रोत हैं।
निवेशकों के लिए, इस फंड जुटाने की सफलता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बैंक की डिपॉजिट प्रोफाइल को मजबूत करती है, बिना किसी बाहरी उधारी की लागत को तुरंत बढ़ाए। हालांकि, लाभप्रदता पर अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि बैंक इन फंड्स को क्रेडिट ग्रोथ में कितनी प्रभावी ढंग से लगा पाता है और अपने मौजूदा मार्जिन को बनाए रख पाता है या नहीं।
आने वाले महीनों में, बैंक की $650 मिलियन के लक्ष्य को महंगी उधारी के बिना पूरा करने की क्षमता, साथ ही नेट इंटरेस्ट मार्जिन में सुधार को बनाए रखने की क्षमता पर निवेशकों की बारीकी से नजर रहेगी। निवेशक भविष्य की फाइलिंग्स में डिपॉजिट ग्रोथ रेट्स और लोन बुक को बढ़ाने के लिए इन विदेशी फंड्स के वास्तविक उपयोग के बारे में भी अपडेट की उम्मीद करेंगे।
