Indian Overseas Bank (IOB) ने क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए **₹5,000 करोड़** जुटाने की योजना बनाई है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बैंक में सरकारी हिस्सेदारी को घटाकर रेगुलेटरी नियमों के तहत पब्लिक शेयरहोल्डिंग की शर्तों को पूरा करना है।
सरकारी हिस्सेदारी में आएगी कमी
बैंक मैनेजमेंट ने साफ किया है कि इस फंडरेजिंग का मकसद सरकार की बड़ी हिस्सेदारी को कम करना है। फिलहाल सरकार के पास बैंक की 92.4% हिस्सेदारी है, जो इस शेयर सेल के बाद घटकर लगभग 86% पर आने की उम्मीद है। यह कदम बैंक को 75% पब्लिक फ्लोट नॉर्म्स के करीब लाने के लिए उठाया जा रहा है।
शानदार फाइनेंशियल परफॉर्मेंस
बैंक ने हाल ही में अपने सितंबर तिमाही के नतीजे पेश किए हैं, जो काफी मजबूत रहे हैं।
- नेट प्रॉफिट: सितंबर 2026 की तिमाही में बैंक ने ₹1,912 करोड़ का मुनाफा कमाया है, जो पिछले साल के ₹1,226 करोड़ से काफी ज्यादा है।
- ऑपरेटिंग प्रॉफिट: इसमें 25% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
- नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM): यह बढ़कर 3.5% पर पहुंच गया है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
दिलचस्प बात यह है कि बैंक को यह फंड अपनी जरूरतों के लिए नहीं चाहिए। बैंक का Capital to Risk-Weighted Assets Ratio 18.6% है, जो काफी सुरक्षित स्तर पर है। यह फंडरेजिंग केवल लिक्विडिटी बढ़ाने और सरकारी नियमों को पूरा करने की एक रणनीतिक चाल है।
हालांकि, निवेशकों को 'इक्विटी डाइल्यूशन' (Equity Dilution) पर नजर रखनी चाहिए। नए शेयर जारी होने से मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी कम हो सकती है, जिसका असर शॉर्ट टर्म में 'अर्निंग पर शेयर' (EPS) पर पड़ सकता है। साथ ही, मैनेजमेंट ने यह भी स्पष्ट किया है कि शेयर सेल का समय पूरी तरह से 'मार्केट सेंटीमेंट' पर निर्भर करेगा।
